Voter List Case: सोनिया गांधी की वोटर लिस्ट एंट्री पर फिर उठा सवाल, कोर्ट के फैसले के बाद BJP आक्रामक

Voter List Case: दिल्ली की अदालत द्वारा मामले में नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिए जाने के बाद बीजेपी और कांग्रेस के बीच राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज हो गए हैं।

Voter List Case: कांग्रेस संसदीय दल की प्रमुख सोनिया गांधी से जुड़ा एक पुराना मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चाओं के केंद्र में आ गया है। दिल्ली की एक विशेष अदालत द्वारा पुराने आदेश को रद्द करते हुए मामले में नए सिरे से सुनवाई का निर्देश दिए जाने के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस नेतृत्व पर सवाल उठाए हैं और राहुल गांधी से जवाब मांगा है। वहीं, मामला दोबारा अदालत में पहुंचने के बाद इसकी कानूनी प्रक्रिया पर भी नजरें टिक गई हैं।

क्या है पूरा मामला?

यह विवाद 1980 की मतदाता सूची से जुड़ा बताया जा रहा है। याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया है कि उस समय सोनिया गांधी का नाम मतदाता सूची में दर्ज था, जबकि उन्हें भारतीय नागरिकता बाद में प्राप्त हुई थी। इसी आधार पर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई थी और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए थे।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि इन आरोपों पर अभी कोई अंतिम न्यायिक निष्कर्ष नहीं निकला है। मामला फिलहाल अदालत में विचाराधीन है और सभी पक्षों की दलीलों पर सुनवाई की प्रक्रिया जारी है।

अदालत ने क्या फैसला दिया?

दिल्ली के राउज एवेन्यू स्थित विशेष अदालत ने 21 सितंबर 2026 को महत्वपूर्ण आदेश जारी करते हुए उस पुराने फैसले को निरस्त कर दिया, जिसमें एफआईआर दर्ज कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया गया था। अदालत ने कहा कि मामले के तथ्यों और प्रस्तुत तर्कों पर दोबारा विचार किए जाने की आवश्यकता है।

इसके साथ ही कोर्ट ने मामले को संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत के पास वापस भेज दिया और नए सिरे से सुनवाई करने का निर्देश दिया। अदालत के इस आदेश के बाद अब मामले की फिर से कानूनी समीक्षा होगी और दोनों पक्षों को अपनी-अपनी दलीलें रखने का अवसर मिलेगा।

बीजेपी ने कांग्रेस को घेरा

अदालत के आदेश के बाद बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता प्रदीप भंडारी ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मामले से जुड़े तथ्यों पर कांग्रेस को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। भंडारी ने यह भी पूछा कि यदि आरोपों में सच्चाई नहीं है तो पार्टी इस विवाद पर अपनी स्थिति सार्वजनिक रूप से स्पष्ट क्यों नहीं करती।

बीजेपी ने इस मुद्दे को पारदर्शिता और जवाबदेही से जोड़ते हुए कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में मतदाता सूची और नागरिकता से जुड़े मामलों पर किसी भी तरह की शंका का स्पष्ट जवाब दिया जाना चाहिए।

राजनीतिक गलियारों में बढ़ी चर्चा

मामले के दोबारा अदालत पहुंचने के बाद राजनीतिक हलकों में इसकी चर्चा तेज हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के नेताओं की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अदालत की आगामी सुनवाई इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

आगे क्या होगा?

अब यह मामला संबंधित मजिस्ट्रेट अदालत में फिर से सुना जाएगा। अदालत उपलब्ध दस्तावेजों, कानूनी पहलुओं और दोनों पक्षों की दलीलों का परीक्षण करेगी। सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मामले में आगे कौन-से कानूनी कदम उठाए जाएंगे और याचिका पर क्या निर्णय आता है।

फिलहाल, अदालत के हालिया आदेश ने वर्षों पुराने इस विवाद को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है। आने वाले दिनों में न्यायिक प्रक्रिया और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं के चलते यह मामला चर्चा का विषय बना रह सकता है।

written by Siddhi Srivastava

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