राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: सभी 8 आरोपी 14 दिन की न्यायिक हिरासत में, बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है। अगली सुनवाई 13 जुलाई को होगी।

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गिरफ्तार सभी आठ आरोपियों को सोमवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अदालत में पेश किया गया। अदालत ने सभी आरोपियों को 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। मामले में अगली सुनवाई अब 13 जुलाई को होगी।

पुलिस ने अदालत को बताया कि मामले की विवेचना अभी जारी है और महत्वपूर्ण साक्ष्य जुटाने के लिए समय की आवश्यकता है। इसी आधार पर आरोपियों को न्यायिक हिरासत में रखने का अनुरोध किया गया। पुलिस ने यह भी कहा कि जांच की आवश्यकता पड़ने पर आगे पुलिस कस्टडी रिमांड की मांग की जा सकती है।

बरामद नकदी और दस्तावेजों का सत्यापन जारी

जांच एजेंसियां आरोपियों के घरों से बरामद नकदी, आभूषण और दस्तावेजों का सत्यापन कर रही हैं। एसआईटी की प्रारंभिक जांच के आधार पर दर्ज एफआईआर में आरोपियों पर चोरी, आपराधिक विश्वासघात, धोखाधड़ी और आपराधिक साजिश सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में

जांच के दौरान अब दानराशि की गणना और बैंक में जमा करने की प्रक्रिया से जुड़े बैंक कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है। पुलिस ने दो बैंक कर्मचारियों से पूछताछ की है। आरोप है कि चढ़ावे की गिनती के दौरान रिकॉर्ड में कथित हेरफेर कर लंबे समय तक लाखों रुपये की निकासी की गई। एक वरिष्ठ बैंक अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

फैजाबाद बार एसोसिएशन का फैसला

फैजाबाद बार एसोसिएशन ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया है कि इस मामले के किसी भी आरोपी की पैरवी नहीं की जाएगी। वहीं, जांच एजेंसियां ट्रस्ट के कुछ पूर्व पदाधिकारियों के बयान भी दर्ज कर रही हैं। मामले में करीब 140 गवाहों से पूछताछ की तैयारी की जा रही है।

सीईओ मॉडल पर मंथन, विहिप ने जताई आपत्ति

राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी के बाद मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव पर भी विचार शुरू हो गया है। सूत्रों के अनुसार, तिरुपति बालाजी मंदिर की तर्ज पर सीईओ मॉडल लागू करने पर चर्चा चल रही है। हालांकि विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और संत समाज ने मंदिरों पर सरकारी नियंत्रण का विरोध करते हुए पारदर्शिता और स्वायत्तता के बीच संतुलन बनाए रखने की बात कही है। अब 7 जुलाई को प्रस्तावित ट्रस्ट की बैठक पर सभी की नजरें टिकी हैं, जिसमें प्रशासनिक सुधारों पर महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाने की संभावना है।

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