
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्कूली सहपाठी असगर अली वोरा से जुड़ा जमीन विवाद अब खत्म होने की ओर है। भायंदर के नवघर इलाके में स्थित करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। वोरा का आरोप था कि उनकी जमीन पर कब्जा किया गया है। अब बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी ने विवादित जमीन से कब्जा हटाने और निर्माण की अनुमति वापस लेने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही वोरा के खिलाफ दर्ज कराई गई शिकायत वापस लेने की बात भी सामने आई है।
15 साल से चल रहा था जमीन विवाद
81 वर्षीय असगर अली वोरा गुजरात के वडनगर स्थित बी.एन. स्कूल में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सहपाठी रहे हैं। वोरा के मुताबिक, उन्होंने वर्ष 1989 में भायंदर ईस्ट के नवघर इलाके में करीब 2,810 वर्ग मीटर जमीन खरीदी थी। उनका दावा है कि वर्ष 2011 में इस जमीन को लेकर विवाद शुरू हुआ और ‘स्वयं बिल्डर्स’ तथा बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता की कंपनी ‘सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन्स’ पर जमीन पर कब्जा करने का आरोप लगाया गया।
वोरा का कहना था कि अपनी जमीन से जुड़े विवाद को सुलझाने के लिए उन्होंने वर्षों तक प्रशासनिक स्तर पर प्रयास किए, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। करीब 15 साल तक चले इस विवाद के बाद उन्होंने 8 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की और उनके सामने अपनी परेशानी रखी।
PM मोदी से मुलाकात के बाद हुई बैठक
असगर अली वोरा के मुताबिक, प्रधानमंत्री के सामने मामला रखने के बाद उन्हें जल्द समाधान का भरोसा मिला। इसके बाद महाराष्ट्र मंत्रालय में इस मामले को लेकर एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में वोरा के साथ बीजेपी विधायक नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम के आयुक्त राधा विनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे समेत संबंधित अधिकारी मौजूद रहे।
बैठक में जमीन विवाद से जुड़े दस्तावेजों और दोनों पक्षों की स्थिति पर चर्चा की गई। इसके बाद विवादित जमीन को लेकर समाधान की दिशा में सहमति बनी।
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विधायक की कंपनी ने कब्जा छोड़ने की बात कही
बैठक के बाद नरेंद्र मेहता ने टाउन प्लानिंग विभाग को पत्र सौंपकर विवादित प्लॉट से अपना कब्जा छोड़ने और पहले मिली निर्माण अनुमति वापस लेने की बात कही। पत्र में मेहता की ओर से यह भी कहा गया कि उन्होंने संबंधित जमीन वर्ष 2019 में मर्विन फर्नांडिस से खरीदी थी।
इसके अलावा पुलिस कमिश्नर को दिए गए एक पत्र में वोरा के खिलाफ पहले की शिकायतों को वापस लेने की बात भी कही गई है। बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते के बाद शिकायत वापस लेने का निर्णय लिया गया।
इस घटनाक्रम के बाद असगर अली वोरा के लंबे समय से चले आ रहे जमीन विवाद के समाधान का रास्ता साफ हुआ है। हालांकि, जमीन के स्वामित्व और कब्जे से जुड़े सभी कानूनी पहलुओं की स्थिति संबंधित आधिकारिक दस्तावेजों और रिकॉर्ड के आधार पर ही पूरी तरह स्पष्ट होगी।



