Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर पर बड़ा खुलासा: पाकिस्तान ने मांगा था सीजफायर, भारत ने रणनीति के तहत कराया इंतजार

Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर रिटायर्ड चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने एक महत्वपूर्ण खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि 10 मई 2025 की सुबह पाकिस्तान ने भारत से युद्धविराम (सीजफायर) की अपील की थी, लेकिन भारत ने तत्काल जवाब देने के बजाय अपनी सैन्य रणनीति को पूरा करने का फैसला किया। जनरल चौहान के अनुसार, उस समय तक भारतीय सेना की आधी से भी कम योजनाबद्ध कार्रवाई पूरी हुई थी, इसलिए जवाब जानबूझकर कुछ घंटों के लिए टाल दिया गया।

सुबह आई सीजफायर की मांग

जनरल अनिल चौहान ने बताया कि पाकिस्तान ने 10 मई की सुबह डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री ऑपरेशंस (DGMO) हॉटलाइन के जरिए भारत से संपर्क किया और तत्काल युद्धविराम की इच्छा जताई। हालांकि भारतीय पक्ष ने उसी समय प्रतिक्रिया नहीं दी। भारत ने दोपहर तक इंतजार किया ताकि पहले से तय सैन्य अभियानों को पूरा किया जा सके।

क्यों कराया गया इंतजार?

पूर्व CDS के मुताबिक, उस समय भारतीय सेना ने अपनी योजनाबद्ध कार्रवाई का केवल एक हिस्सा ही पूरा किया था। उनका कहना था कि यदि उसी समय सीजफायर स्वीकार कर लिया जाता, तो अभियान अपने निर्धारित सैन्य उद्देश्यों तक नहीं पहुंच पाता। इसलिए भारतीय सेना ने आगे की कार्रवाई जारी रखी और उसके बाद ही युद्धविराम पर सहमति बनी।

पाकिस्तान के रुख पर भी जताई हैरानी

जनरल चौहान ने कहा कि उन्हें सबसे अधिक आश्चर्य इस बात पर हुआ कि जो पाकिस्तान एक दिन पहले तक कड़े जवाब और लंबी लड़ाई की बातें कर रहा था, उसने कुछ ही घंटों में युद्धविराम के लिए संपर्क कर लिया। उनके अनुसार, यह घटनाक्रम भारतीय सैन्य कार्रवाई के प्रभाव को दर्शाता है।

ऑपरेशन सिंदूर क्यों था महत्वपूर्ण?

ऑपरेशन सिंदूर भारत द्वारा मई 2025 में शुरू किया गया सैन्य अभियान था, जिसे पहलगाम आतंकी हमले के बाद अंजाम दिया गया। अभियान के दौरान भारत ने सीमा पार आतंकी ढांचे और सैन्य प्रतिष्ठानों को निशाना बनाया। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा और अंततः 10 मई 2025 को युद्धविराम पर सहमति बनी।

रणनीतिक संदेश

जनरल चौहान के ताजा बयान से यह संकेत मिलता है कि भारत ने सैन्य कार्रवाई के दौरान अपने रणनीतिक लक्ष्यों को प्राथमिकता दी और किसी भी युद्धविराम पर सहमत होने से पहले अभियान के अहम चरण पूरे किए। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे बयान ऑपरेशन सिंदूर के सैन्य और रणनीतिक पहलुओं को समझने में महत्वपूर्ण हैं। हालांकि, संघर्ष के दौरान दोनों देशों ने अपने-अपने दावे किए थे और कई घटनाओं पर अलग-अलग आधिकारिक संस्करण भी सामने आए थे।

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