कार्यशाला का शुभारंभ दीप प्रज्वलन, अतिथियों एवं विशेषज्ञ वक्ताओं के सम्मान तथा प्री-टेस्ट के साथ किया गया। संस्थान के निदेशक प्रो. (डॉ.) सी.एम. सिंह ने आयोजन के लिए शुभकामनाएं देते हुए शोध आधारित शिक्षा के महत्व पर जोर दिया। वहीं डीन प्रो. (डॉ.) राजन भटनागर ने प्रतिभागियों को अनुसंधान गतिविधियों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया।
दिनभर चले विभिन्न सत्रों में विशेषज्ञों ने अनुसंधान की आवश्यकता, शोध प्रक्रिया, रिसर्च डिजाइन, साहित्य समीक्षा, शोध प्रश्नों के निर्माण, उद्देश्यों की पहचान, परिकल्पना तैयार करने, सैंपलिंग तकनीकों और सैंपल साइज निर्धारण जैसे विषयों पर विस्तार से जानकारी दी। प्रतिभागियों को गुणात्मक अनुसंधान पद्धति और रिसर्च प्रोटोकॉल तैयार करने की प्रक्रिया भी समझाई गई।
विशेषज्ञों ने साझा किए व्यावहारिक अनुभव
कार्यशाला में कॉलेज ऑफ नर्सिंग, सामुदायिक चिकित्सा विभाग और सामान्य चिकित्सा विभाग के विशेषज्ञों ने विभिन्न तकनीकी सत्रों का संचालन किया। सत्रों के दौरान विद्यार्थियों और स्वास्थ्य पेशेवरों ने अपने प्रश्न रखे, जिनका विशेषज्ञों ने विस्तार से उत्तर दिया। संवादात्मक शैली में आयोजित चर्चाओं ने प्रतिभागियों की सीखने की प्रक्रिया को और प्रभावी बनाया।
पोस्ट-टेस्ट और फीडबैक के साथ हुआ समापन
कार्यक्रम के अंत में पोस्ट-टेस्ट आयोजित किया गया, जिससे प्रतिभागियों द्वारा अर्जित ज्ञान का मूल्यांकन किया गया। साथ ही फीडबैक सत्र के माध्यम से उनकी प्रतिक्रियाएं भी प्राप्त की गईं।
यह कार्यशाला आयोजन अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) शिव कुमार मुडगल के नेतृत्व में संपन्न हुई। आयोजन को सफल बनाने में डॉ. अमित कौशिक, प्रो. निपिन कलाल, डॉ. नवीना जे.एच. और डॉ. मिली सेंगर ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
संस्थान का मानना है कि इस तरह के अकादमिक कार्यक्रम न केवल विद्यार्थियों की शोध क्षमता को मजबूत करते हैं, बल्कि स्वास्थ्य शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण अनुसंधान संस्कृति विकसित करने में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। प्रतिभागियों ने कार्यशाला को ज्ञानवर्धक, उपयोगी और भविष्य के शोध कार्यों के लिए प्रेरणादायक बताया।