
Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले आयोजित सर्वदलीय बैठक राजनीतिक विवाद का केंद्र बन गई। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने अपने बागी सांसदों को बैठक में शामिल किए जाने पर तीखा विरोध दर्ज कराया। टीएमसी के समर्थन में कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी, झारखंड मुक्ति मोर्चा, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दल और शिवसेना (यूबीटी) सहित कई विपक्षी दल बैठक से वॉकआउट कर गए।
क्या है पूरा विवाद?
टीएमसी का आरोप है कि पार्टी से अलग हुए कुछ सांसदों को ऐसी स्थिति में सर्वदलीय बैठक में बुलाया गया, जबकि उनके अलग गुट को अभी तक संवैधानिक और संसदीय स्तर पर अंतिम मान्यता नहीं मिली है। पार्टी का कहना है कि इन सांसदों से जुड़े मामलों पर लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष याचिकाएं अब भी लंबित हैं। ऐसे में उन्हें अलग राजनीतिक इकाई मानकर बैठक में शामिल करना नियमों और संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने सरकार पर उठाए सवाल
टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि संसदीय रिकॉर्ड में उनकी पार्टी की वास्तविक संख्या दर्ज होने के बावजूद बागी सांसदों को अलग पहचान देकर बैठक में बुलाया गया। उन्होंने दावा किया कि संविधान के 91वें संशोधन के बाद किसी भी दल के भीतर अलग गुट को आसानी से मान्यता देने का प्रावधान नहीं है। इसलिए सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि इन सांसदों को किस आधार पर निमंत्रण दिया गया।
कांग्रेस और अन्य दल भी आए समर्थन में
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि जब तक संबंधित मामलों पर संवैधानिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी गुट को अलग मान्यता देना उचित नहीं है। वहीं शिवसेना (यूबीटी) के सांसद अरविंद सावंत ने भी सवाल उठाया कि कानून में ऐसी मान्यता का आधार क्या है।
आम आदमी पार्टी ने भी इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी जताते हुए कहा कि उनके कुछ सांसदों से जुड़े मामले भी लंबित हैं, फिर भी उन्हें अलग बैठने की व्यवस्था दी गई है। पार्टी ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के विपरीत बताया।
20 जुलाई से शुरू होगा मानसून सत्र
संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होकर 13 अगस्त 2026 तक चलेगा। इस दौरान कुल 19 बैठकें प्रस्तावित हैं। सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों और राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की तैयारी में है, जबकि विपक्ष महंगाई, बेरोजगारी, सीमा सुरक्षा और अन्य राजनीतिक मुद्दों को जोर-शोर से उठाने की रणनीति बना रहा है।
अब सर्वदलीय बैठक में हुआ यह विवाद संकेत दे रहा है कि मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो चुका है, जिसका असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिल सकता है।



