
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर मचे सियासी घमासान के बीच पार्टी सांसद महुआ मोइत्रा ने बागी सांसद सुदीप बंदोपाध्याय पर तीखा हमला बोला है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए अपने पोस्ट में महुआ ने सुदीप बंदोपाध्याय पर गंभीर आरोप लगाते हुए उन्हें “गद्दार” करार दिया और कहा कि उन्होंने बीमारी का बहाना बनाकर एक बार फिर पार्टी के साथ विश्वासघात किया है।
महुआ मोइत्रा ने अपने पोस्ट में 2017 के रोज वैली चिटफंड मामले का जिक्र करते हुए लिखा कि उस समय सुदीप बंदोपाध्याय ने स्वास्थ्य कारणों का हवाला दिया था और अब भी उन्होंने बीमारी का “ढोंग” रचकर दिल्ली पहुंचकर पार्टी विरोधी गतिविधियों में हिस्सा लिया। उन्होंने लिखा, “दादा, आपने पहले भी बीमारी का बहाना बनाया था और अब फिर वही किया ताकि दिल्ली जाकर गद्दारी कर सकें। तापस रॉय और कुणाल घोष आपके बारे में सही थे, हम ही गलत थे।”
TMC में बगावत ने बढ़ाया सियासी तापमान
महुआ मोइत्रा का यह बयान ऐसे समय आया है जब टीएमसी के बागी सांसदों ने पार्टी नेतृत्व के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। बागी गुट का दावा है कि उनके साथ दो-तिहाई से अधिक सांसद हैं और उन्होंने नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय का फैसला किया है।
बागी सांसदों की नेता काकोली घोष दस्तीदार ने लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात के बाद कहा कि उनका समूह अलग संसदीय पहचान चाहता है और आगे चलकर राष्ट्रीय जनहित के मुद्दों पर एनडीए के साथ सहयोग करेगा। इस घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है।
सुदीप बंदोपाध्याय का क्या है रुख?
बागी खेमे में शामिल सुदीप बंदोपाध्याय ने कहा है कि एनसीपीआई में शामिल होना उनकी रणनीति का पहला कदम है। उनका दावा है कि उनके साथ टीएमसी के पर्याप्त सांसद हैं और भविष्य में वे तृणमूल कांग्रेस के नाम और संगठनात्मक अधिकार को लेकर भी दावा पेश कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस संबंध में अंतिम फैसला कानूनी प्रक्रिया और न्यायालय के स्तर पर होगा।
2017 के रोज वैली मामले का फिर हुआ जिक्र
महुआ मोइत्रा ने अपने हमले में 2017 के बहुचर्चित रोज वैली चिटफंड मामले को भी उठाया। उस समय केंद्रीय जांच एजेंसी ने कथित संलिप्तता के आरोप में सुदीप बंदोपाध्याय को गिरफ्तार किया था। बाद में स्वास्थ्य आधार पर उन्हें सशर्त जमानत मिली थी। अब महुआ ने उसी संदर्भ को जोड़ते हुए उन पर दोबारा बीमारी का सहारा लेकर राजनीतिक कदम उठाने का आरोप लगाया है।
TMC के लिए बढ़ी चुनौती
टीएमसी में बढ़ती अंदरूनी कलह पार्टी नेतृत्व के लिए बड़ी चुनौती बनती दिखाई दे रही है। एक तरफ बागी सांसद नई राजनीतिक राह पर आगे बढ़ने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर महुआ मोइत्रा जैसे नेता खुलकर उनके खिलाफ मोर्चा संभाल चुके हैं। आने वाले दिनों में लोकसभा अध्यक्ष के समक्ष लंबित प्रक्रियाएं, संभावित कानूनी लड़ाई और पार्टी के भीतर शक्ति संतुलन इस पूरे घटनाक्रम की दिशा तय करेंगे।
फिलहाल इतना तय है कि बंगाल की राजनीति में मचा यह घमासान आने वाले समय में और तेज हो सकता है और इसके दूरगामी राजनीतिक असर देखने को मिल सकते हैं।
Written By: Ekta Verma



