
Uttarakhand: उत्तराखंड के दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मौसम की मार ने पांच परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। गंगोत्री क्षेत्र के केदारताल ट्रेक पर निकले पश्चिम बंगाल के बांकुरा जिले के पांच ट्रेकर्स का अब तक कोई पता नहीं चल पाया है। भारी बर्फबारी और खराब मौसम के कारण उनका संपर्क टूट गया। घटना की जानकारी सामने आने के बाद पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने भी चिंता जाहिर की है। उन्होंने लापता युवकों की सुरक्षित वापसी के लिए राज्य सरकार की ओर से हरसंभव मदद का भरोसा दिया है। वहीं, उत्तराखंड में लापता लोगों को खोजने के लिए तलाशी अभियान जारी है।
इस घटना ने एक बार फिर हिमालय के ऊंचाई वाले इलाकों में ट्रेकिंग के दौरान मौसम की चुनौतियों को सामने ला दिया है। जहां एक तरफ बर्फबारी के कारण रास्ते बंद होने और दृश्यता कम होने की समस्या है, वहीं दूसरी तरफ राहत एवं बचाव दल के सामने लापता लोगों तक पहुंचने की चुनौती बनी हुई है।
कौन हैं लापता पांच ट्रेकर्स?
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पांचों युवकों के लापता होने पर चिंता जताई। उन्होंने बताया कि बांकुरा जिले के रहने वाले रिंटू मंडल, उदय घोष, रतन घोष, तपस बाउरी और मनोज खवास केदारताल ट्रेक के दौरान खराब मौसम और भारी बर्फबारी के बाद लापता हो गए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार इस मुश्किल समय में प्रभावित परिवारों के साथ खड़ी है। बांकुरा में मौजूद परिवारों को हर संभव प्रशासनिक, भावनात्मक और जरूरी सहायता उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम बंगाल प्रशासन उत्तराखंड सरकार और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) के लगातार संपर्क में है, ताकि लापता युवकों की जल्द और सुरक्षित वापसी सुनिश्चित की जा सके।
सुवेंदु अधिकारी ने पांचों युवकों की सलामती के लिए प्रार्थना करते हुए कहा कि उन्हें वापस लाने के प्रयासों में कोई कमी नहीं छोड़ी जाएगी।
कुल आठ लोग हुए थे लापता, सात ट्रेकर्स और एक गाइड शामिल
इस घटना को लेकर 1 नवंबर को सामने आई जानकारी के मुताबिक, केदारताल ट्रेक पर गए कुल आठ लोग लापता बताए गए थे। इनमें सात ट्रेकर्स और एक गाइड शामिल हैं। इनके लापता होने की सूचना मिलने के बाद उत्तराखंड में राहत और बचाव एजेंसियां सक्रिय हो गईं।
SDRF कमांडेंट अर्पण यदुवंशी के निर्देश पर लापता लोगों की तलाश के लिए विशेष पर्वतारोहण टीम को तैनात किया गया। अभियान में जमीनी स्तर पर तलाश के साथ हवाई सर्वेक्षण की भी योजना बनाई गई, ताकि दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र में फंसे लोगों का पता लगाया जा सके।
फिलहाल पश्चिम बंगाल के पांच युवकों को लेकर विशेष चिंता बनी हुई है। उनके परिजन लगातार प्रशासन से संपर्क बनाए हुए हैं और किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।
भारी बर्फबारी ने बचाव अभियान की बढ़ाई मुश्किलें
केदारताल का इलाका अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के साथ-साथ कठिन ट्रेकिंग मार्ग के लिए भी जाना जाता है। यहां मौसम में अचानक बदलाव आना बड़ी चुनौती बन सकता है। इस बार भी भारी बर्फबारी और खराब मौसम ने बचाव अभियान को प्रभावित किया है।
लापता लोगों की सूचना मिलने के बाद SDRF की गंगोत्री टीम केदारताल क्षेत्र में रेकी करने पहुंची थी। लेकिन लगातार बर्फबारी और प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण जमीन पर तलाशी अभियान को आगे बढ़ाना आसान नहीं रहा। पहाड़ी रास्तों पर बर्फ जमने और मौसम खराब होने से बचाव दल की आवाजाही प्रभावित हुई।
ऐसी परिस्थितियों को देखते हुए अधिकारियों ने हेलीकॉप्टर के जरिए इलाके का हवाई सर्वेक्षण करने का फैसला किया। हवाई रेकी के दौरान लापता ट्रेकर्स या उनके टेंट का कोई स्पष्ट निशान नहीं मिल सका। इससे तलाशी अभियान की चुनौती और बढ़ गई है।
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परिवारों की बढ़ी चिंता, सुरक्षित वापसी की उम्मीद
एक तरफ उत्तराखंड की बचाव टीमें दुर्गम पहाड़ियों में लापता लोगों को खोजने की कोशिश कर रही हैं, तो दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में उनके परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी की ओर से मदद का भरोसा मिलने के बाद परिजनों को प्रशासनिक स्तर पर सहयोग की उम्मीद है।
इस पूरे मामले में मौसम सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी के बीच राहत अभियान चलाना जोखिम भरा होता है। ऐसे में बचाव दल को मौसम की स्थिति और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए आगे बढ़ना पड़ रहा है।
फिलहाल सभी की निगाहें तलाशी अभियान पर टिकी हैं। परिजन अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी की आस लगाए बैठे हैं। अब देखना होगा कि बचाव दल को कब तक लापता ट्रेकर्स और गाइड का कोई सुराग मिल पाता है।



