
Kajli Utsav Chandauli 2026: पूर्वांचल की समृद्ध लोक संस्कृति को संरक्षित करने और विलुप्त होती कजली गायन परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से 22 अगस्त 2026 को चंदौली के सिटी क्लब में तीसरे भव्य कजली उत्सव का आयोजन किया जाएगा। यह आयोजन प्राचीन महादेव मंदिर बूढ़ेनाथ के अष्ट कौशल महंत डॉ. योगानंद महाराज के संरक्षण तथा लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र के तत्वावधान में आयोजित होगा।
आयोजकों के अनुसार कजली, बिरहा और चैता जैसी लोक विधाएं पूर्वांचल की सांस्कृतिक पहचान हैं, लेकिन बदलते समय के साथ इनका दायरा लगातार सिमटता जा रहा है। इसी विरासत को जीवित रखने और लोक कलाकारों को मंच उपलब्ध कराने के उद्देश्य से पिछले दो वर्षों से कजली उत्सव का आयोजन किया जा रहा है, जिसे लोगों का भरपूर समर्थन मिला है। इस वर्ष तीसरे संस्करण को और अधिक भव्य रूप देने की तैयारी की गई है।
लोक संस्कृति संरक्षण केन्द्र की निदेशक ऊषा गुप्ता ने बताया कि महोत्सव में मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, वाराणसी, गाजीपुर, बलिया सहित पूर्वांचल के विभिन्न जिलों से प्रसिद्ध लोकगायक, लोकगायिकाएं और ग्रामीण महिला मंडलियां पारंपरिक कजली गायन प्रस्तुत करेंगी। इसके अलावा पद्मश्री सम्मानित लोक कलाकार तथा राज्य स्तरीय पुरस्कार प्राप्त कलाकार भी अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम की शोभा बढ़ाएंगे।
कार्यक्रम में ढोलक, मंजीरा, हारमोनियम और नगाड़े जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों की धुन पर कजली गायन की प्रस्तुति होगी। आयोजन के दौरान उत्कृष्ट कलाकारों को शील्ड, सम्मान पत्र और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया जाएगा।
आयोजकों ने बताया कि कार्यक्रम में भाग लेने वाले कलाकारों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य होगा। इच्छुक कलाकार 18 अगस्त 2026 तक अपना नाम, पता और मोबाइल नंबर व्हाट्सएप 9935609572, 9451623574, 9838908721 या ई-मेल lokkendra2026@gmail.com पर भेजकर निःशुल्क पंजीकरण करा सकते हैं। बिना रजिस्ट्रेशन किसी भी कलाकार को मंच पर प्रस्तुति देने की अनुमति नहीं होगी।
आयोजन समिति ने स्पष्ट किया है कि प्रतिभागियों से किसी प्रकार का पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा। हालांकि यात्रा भत्ता, मानदेय या रात्रि विश्राम की व्यवस्था नहीं होगी। सभी प्रतिभागी कलाकारों को कार्यक्रम के समापन पर मुख्य अतिथियों द्वारा सम्मानित किया जाएगा। वाद्य यंत्रों की व्यवस्था संस्था की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी, इसलिए कलाकारों को अपनी अलग टीम या वाद्य यंत्र लाने की आवश्यकता नहीं होगी।
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कजली महोत्सव के सचिव संदर्भ पाण्डेय ने बताया कि कार्यक्रम में सीटें सीमित हैं, इसलिए कलाकार समय रहते अपना पंजीकरण सुनिश्चित कर लें। छात्र-छात्राओं और लोक कला से जुड़े लोगों के लिए भी विशेष व्यवस्था की गई है।
आयोजकों के अनुसार महोत्सव का उद्देश्य केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित करना नहीं, बल्कि कजली जैसी लोक विधाओं का संरक्षण, ग्रामीण कलाकारों को राष्ट्रीय स्तर का मंच उपलब्ध कराना तथा लोक गायन के माध्यम से कलाकारों के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ाना भी है।
22 अगस्त को शाम 5 बजे से रात 10 बजे तक चलने वाले इस सांस्कृतिक आयोजन में जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न क्षेत्रों की प्रमुख हस्तियों के शामिल होने की संभावना है। सिटी क्लब को पारंपरिक पूर्वांचली थीम के अनुसार सजाया जाएगा और मंच, प्रकाश तथा ध्वनि की विशेष व्यवस्था की जा रही है। आयोजकों ने आमजन से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर अपनी लोक संस्कृति को संरक्षित करने के इस अभियान का हिस्सा बनने की अपील की है।



