
India UAE DigiLocker: भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में एक अहम पहल हुई है। नई दिल्ली में आयोजित भारत-यूएई संयुक्त कांसुलर मामलों की समिति (JCCA) की सातवीं बैठक में दोनों देशों ने भारतीय शैक्षणिक दस्तावेजों के डिजिटल सत्यापन को आसान बनाने पर सहमति जताई। इसके तहत भारत के डिजिलॉकर को यूएई के संबंधित डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा।
इस पहल का सबसे बड़ा फायदा यूएई में नौकरी करने वाले या वहां उच्च शिक्षा प्राप्त करने की तैयारी कर रहे भारतीय युवाओं और पेशेवरों को मिलेगा। डिजिटल माध्यम से डिग्रियों और अन्य शैक्षणिक दस्तावेजों का सत्यापन होने से लंबी कागजी प्रक्रिया, समय और अतिरिक्त खर्च में कमी आएगी।
उच्चस्तरीय बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा
विदेश मंत्रालय के अनुसार, बैठक की सह-अध्यक्षता भारत की ओर से सचिव (सीपीवी एवं ओआईए) अरुण कुमार चटर्जी रंगनाथन और यूएई की ओर से विदेश मंत्रालय के अवर सचिव उमर ओबैद मोहम्मद अल-हेसान अल-शम्सी ने की।
बैठक में कांसुलर सेवाओं, श्रमिकों की सुरक्षा, लोगों की आवाजाही, प्रत्यर्पण, आपसी कानूनी सहायता और अन्य द्विपक्षीय सहयोग के मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। तकनीकी स्तर पर दोनों देशों के अधिकारियों ने भारतीय शैक्षणिक प्रमाणपत्रों के निर्बाध सत्यापन की प्रक्रिया को सरल बनाने पर विशेष जोर दिया।
भारतीय पेशेवरों को होगा सीधा लाभ

डिजिलॉकर और यूएई के डिजिटल प्लेटफॉर्म के एकीकरण के बाद भारतीय डिग्रियों और प्रमाणपत्रों का सत्यापन ऑनलाइन हो सकेगा। इससे नौकरी के लिए आवेदन करने वाले पेशेवरों को बार-बार दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। इससे भर्ती प्रक्रिया तेज होगी और भारतीय युवाओं के लिए रोजगार तथा करियर में उन्नति के नए अवसर खुलेंगे।
45 लाख भारतीयों को मिल सकती है सुविधा
यूएई में लगभग 45 लाख भारतीय निवास करते हैं। दोनों देशों के बीच मजबूत आर्थिक और सामाजिक संबंधों को देखते हुए यह पहल भारतीय समुदाय के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे वहां काम करने वाले कर्मचारियों, छात्रों और पेशेवरों को सरकारी प्रक्रियाओं में अधिक सुविधा मिलने की उम्मीद है।
व्यापार और निवेश को भी मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल दस्तावेज सत्यापन व्यवस्था से केवल रोजगार ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच व्यापारिक प्रक्रियाएं भी अधिक पारदर्शी और आसान होंगी। इससे कुशल भारतीय कार्यबल को यूएई में बेहतर अवसर मिलने के साथ-साथ भारत-यूएई आर्थिक साझेदारी को भी नई गति मिलेगी।
यह पहल दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और डिजिटल सहयोग का एक महत्वपूर्ण उदाहरण मानी जा रही है, जो भविष्य में शिक्षा, रोजगार और निवेश के क्षेत्र में नए अवसरों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है।



