C-Voter Snap Poll : ‘Gen-Z का चुनावी मूड साफ’, नेता नहीं, मुद्दे सबसे अहम; रोजगार-शिक्षा बनी पहली पसंद

C-Voter Snap Poll : C-Voter Snap Poll में Gen-Z के चुनावी मूड का खुलासा हुआ है। 53% युवाओं ने रोजगार, शिक्षा और हेल्थकेयर को सबसे बड़ा मुद्दा बताया।

C-Voter Snap Poll : देश की चुनावी राजनीति में जेनरेशन-जी (Gen-Z) मतदाताओं की भूमिका लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सी-वोटर स्नैप पोल सर्वे ने युवाओं के चुनावी मूड और उनकी प्राथमिकताओं को लेकर अहम तस्वीर सामने रखी है। सर्वे के मुताबिक रोजगार, शिक्षा और हेल्थकेयर Gen-Z के लिए सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दे हैं। कुल 53 प्रतिशत युवाओं ने इन तीनों मुद्दों को अपनी सबसे बड़ी प्राथमिकता बताया।

खास बात यह है कि इन मुद्दों को लेकर एनडीए और विपक्षी समर्थकों की राय में भी ज्यादा अंतर नहीं दिखा। एनडीए समर्थकों में 56.7 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 51.7 प्रतिशत लोगों ने रोजगार, शिक्षा और स्वास्थ्य को सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा माना। वहीं, अन्य राजनीतिक रुझान रखने वाले 45.8 प्रतिशत लोगों ने भी इन्हें प्राथमिकता दी।

रोजगार, शिक्षा और हेल्थकेयर सबसे बड़ा मुद्दा

मीडिया चैनल और सी-वोटर के स्नैप पोल में Gen-Z की चिंताओं, चुनावी मुद्दों, मतदान के फैसले, सोशल मीडिया की भूमिका, राष्ट्रवाद और उम्मीदवार की शैक्षणिक योग्यता सहित 10 सवालों पर लोगों की राय ली गई।

सर्वे में 53 प्रतिशत लोगों ने रोजगार, शिक्षा और हेल्थकेयर को सबसे महत्वपूर्ण चुनावी मुद्दा बताया। इसके बाद भ्रष्टाचार प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। कुल 11.9 प्रतिशत लोगों ने भ्रष्टाचार को चुनावी प्राथमिकता माना। एनडीए समर्थकों में यह आंकड़ा 11.6 प्रतिशत, विपक्षी समर्थकों में 12.2 प्रतिशत और अन्य वर्ग में 12.1 प्रतिशत रहा।

वोट देते समय मुद्दे नेता से ज्यादा अहम

सर्वे का एक अहम निष्कर्ष यह है कि Gen-Z मतदाताओं के लिए चुनावी फैसला लेते समय मुद्दे नेता या पार्टी से अधिक महत्वपूर्ण हो सकते हैं। कुल 33.3 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे वोट देते समय मुद्दों को प्राथमिकता देते हैं।

एनडीए समर्थकों में 30.5 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 33.3 प्रतिशत लोगों ने मुद्दों को सबसे अहम बताया। वहीं, अन्य राजनीतिक रुझान वाले मतदाताओं में 41.5 प्रतिशत ने मुद्दों को प्राथमिकता दी।

इसके मुकाबले नेता को वोट देने का आधार मानने वालों का आंकड़ा एनडीए समर्थकों में 22.9 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 23.1 प्रतिशत रहा।

सोशल मीडिया बना राजनीतिक राय का बड़ा माध्यम

Gen-Z की राजनीतिक सोच और चुनावी फैसलों में सोशल मीडिया की भूमिका भी महत्वपूर्ण दिखाई दी। सर्वे में 49.3 प्रतिशत लोगों ने माना कि सोशल मीडिया उनकी राजनीतिक राय बनाने में अहम भूमिका निभाता है।

एनडीए समर्थकों में 53.2 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 48.3 प्रतिशत लोगों ने सोशल मीडिया को राजनीतिक राय बनाने में प्रभावी माना। अन्य वर्ग में यह आंकड़ा 40.7 प्रतिशत रहा।

यह आंकड़ा राजनीतिक दलों के लिए महत्वपूर्ण है, क्योंकि युवा मतदाताओं तक पहुंच बनाने में सोशल मीडिया तेजी से प्रमुख माध्यम बन रहा है। हालांकि, सर्वे के अन्य निष्कर्ष संकेत देते हैं कि केवल सोशल मीडिया अभियान युवाओं को प्रभावित करने के लिए पर्याप्त नहीं हो सकता।

58.7% Gen-Z ने कहा- पार्टियां उनकी चिंता नहीं समझतीं

सर्वे का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष राजनीतिक दलों और युवाओं के बीच बढ़ती दूरी की ओर भी इशारा करता है। कुल 58.7 प्रतिशत युवाओं ने कहा कि राजनीतिक दल उनकी वास्तविक समस्याओं और चिंताओं को नहीं समझते।

एनडीए समर्थकों में 54 प्रतिशत और विपक्षी समर्थकों में 64 प्रतिशत लोगों ने ऐसा माना। इसके विपरीत केवल 26 प्रतिशत एनडीए समर्थकों और 17.1 प्रतिशत विपक्षी समर्थकों ने कहा कि राजनीतिक दल उनकी चिंताओं को समझते हैं।

यह आंकड़ा राजनीतिक दलों के लिए संकेत है कि युवाओं तक पहुंच बनाने के साथ-साथ उनकी रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी समस्याओं पर ठोस नीतिगत जवाब देना भी जरूरी होगा।

जाति से ज्यादा योग्यता और मुद्दों को महत्व

Gen-Z के चुनावी रुझान में जातिगत पहचान की भूमिका को लेकर भी सर्वे से महत्वपूर्ण संकेत मिले हैं। केवल 24.4 प्रतिशत लोगों ने कहा कि वे अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देना पसंद करते हैं, जबकि 48.2 प्रतिशत ने इससे इनकार किया।

एनडीए समर्थकों में 50.6 प्रतिशत और अन्य राजनीतिक वर्ग के 50.8 प्रतिशत लोगों ने अपनी जाति के उम्मीदवार को वोट देने से इनकार किया।

इससे संकेत मिलता है कि युवा मतदाताओं का एक बड़ा वर्ग उम्मीदवार की जातीय पहचान के बजाय योग्यता, मुद्दों और प्रदर्शन को चुनावी फैसले में अधिक महत्व दे सकता है।

राजनीतिक दलों के लिए क्या है संदेश?

सी-वोटर स्नैप पोल के नतीजे राजनीतिक दलों के लिए स्पष्ट संकेत देते हैं। Gen-Z मतदाताओं के बीच केवल नेता, पार्टी या पहचान की राजनीति पर्याप्त नहीं हो सकती। रोजगार के अवसर, बेहतर शिक्षा, स्वास्थ्य सुविधाएं और भ्रष्टाचार जैसे मुद्दे युवाओं के चुनावी फैसले को प्रभावित कर सकते हैं।

सोशल मीडिया युवा मतदाताओं तक पहुंचने का प्रभावी माध्यम जरूर है, लेकिन सर्वे के निष्कर्ष यह भी बताते हैं कि ऑनलाइन कैंपेन के साथ जमीनी स्तर पर ठोस काम और नीतिगत परिणाम दिखाना राजनीतिक दलों के लिए ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।

सर्वे कैसे हुआ?

सी-वोटर के मुताबिक यह सर्वे CATI (Computer Assisted Telephone Interviewing) पद्धति पर आधारित था। इसमें देशभर के 18 वर्ष से अधिक और 35 वर्ष से कम आयु के लोगों को शामिल किया गया। सर्वे में 95 प्रतिशत कॉन्फिडेंस इंटरवल के साथ मैक्रो और माइक्रो स्तर पर मार्जिन ऑफ एरर बताया गया है।

सर्वे के नतीजे बताते हैं कि Gen-Z मतदाता चुनावी राजनीति में केवल चेहरे, पार्टी या पहचान के आधार पर फैसला लेने के बजाय रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य ठोस मुद्दों को अधिक महत्व दे सकता है। आने वाले चुनावों में युवाओं के इस बदलते एजेंडे को राजनीतिक दल कितना समझ पाते हैं, यह महत्वपूर्ण होगा।

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