CJI Surya Kant: CJI सूर्यकांत ने राहुल गांधी से मिलने से किया इनकार, बोले- सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे सबके लिए खुले

CJI Surya Kant: INDIA गठबंधन के नेताओं ने चुनाव आयोग और SIR के मुद्दे पर मांगा था मिलने का समय, सीजेआई ने कहा- अपनी समस्या लेकर अदालत आएं, कानून के मुताबिक होगी सुनवाई

CJI Surya Kant:  मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और विपक्षी दलों के नेताओं से मुलाकात करने से इनकार कर दिया है। राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए सीजेआई से समय मांगा था। इस बीच, सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के लिए खुले हैं और कानून के मुताबिक आने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की जाएगी। <Cite refs={[“turn960587search0″,”turn960587search2″,”turn960587search8”]}/>

सीजेआई का यह बयान ऐसे समय आया है, जब राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के नेताओं ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बनाई है। विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

‘हर नागरिक को अदालत आने का अधिकार’

सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि भारत के प्रत्येक नागरिक को अपनी समस्या लेकर अदालत आने का अधिकार है। अदालत कानून और संवैधानिक व्यवस्था के अनुरूप संबंधित मामले की सुनवाई करेगी और जहां जिस पक्ष को कानूनी राहत मिलनी चाहिए, वहां उसके अधिकारों पर विचार किया जाएगा।

उनके इस बयान का आशय है कि किसी मुद्दे पर राहत पाने के लिए संबंधित पक्ष अदालत की निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपना सकते हैं। मुलाकात के अनुरोध को अस्वीकार करने का मतलब यह नहीं है कि संबंधित पक्ष की याचिका पर सुनवाई नहीं होगी। <Cite refs={[“turn960587news16″,”turn960587search8”]}/>

राहुल गांधी और खरगे ने क्यों मांगा था समय?

राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खरगे ने सीजेआई से मुलाकात के लिए 12 अक्टूबर को शाम 4 से 5 बजे के बीच का समय मांगा था। विपक्षी नेता चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते थे।

रिपोर्टों के अनुसार, विपक्षी नेताओं ने कथित ‘वोट चोरी’ पर रोक लगाने, ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR प्रक्रिया रोकने और बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांगों को भी अपने प्रस्तावित ज्ञापन में शामिल किया था। <Cite refs={[“turn960587search0″,”turn960587search5”]}/>

मुलाकात से इनकार के पीछे क्या वजह बताई गई?

सीजेआई की ओर से भेजे गए जवाब में कहा गया कि विपक्षी नेता जिन मुद्दों को उठाना चाहते हैं, उनसे जुड़े मामले पहले से सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन हैं। ऐसे मामलों पर ज्ञापन के जरिए प्रशासनिक स्तर पर निर्देश देने के बजाय न्यायिक प्रक्रिया अपनाना उचित होगा।

रिपोर्टों के मुताबिक, जवाब में यह भी स्पष्ट किया गया कि सुप्रीम कोर्ट अपनी प्रशासनिक भूमिका के तहत सरकार के कामकाज में हस्तक्षेप नहीं कर सकता। यदि विपक्षी नेताओं को किसी अधिकार के उल्लंघन की शिकायत है, तो वे उचित कानूनी प्रक्रिया के तहत याचिका दाखिल कर सकते हैं। <Cite refs={[“turn960587search3″,”turn960587search11”]}/>

INDIA गठबंधन का सुप्रीम कोर्ट तक मार्च

सीजेआई से मुलाकात का अनुरोध ठुकराए जाने के बावजूद विपक्षी दलों ने 12 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करने की योजना बनाई। राहुल गांधी ने इससे पहले विपक्षी दलों, नागरिक संगठनों और आम लोगों से कथित चुनावी अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठाने की अपील की थी।

विपक्ष का कहना है कि मतदाता सूची में नाम हटाए जाने और SIR की प्रक्रिया को लेकर गंभीर सवाल हैं। इन मुद्दों पर कार्रवाई की मांग को लेकर गठबंधन के नेता अपनी बात अदालत तक पहुंचाना चाहते हैं। हालांकि, विपक्ष की ओर से लगाए गए आरोपों पर संबंधित संस्थाओं का पक्ष और कानूनी प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण है। <Cite refs={[“turn960587search0″,”turn960587news20”]}/>

खरगे ने लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा उठाया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने इससे पहले कहा था कि विपक्षी नेता प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई, लोकतांत्रिक अधिकारों और चुनाव आयोग से संबंधित मुद्दों को उठाएंगे। उन्होंने मौजूदा परिस्थितियों पर केंद्र सरकार की आलोचना भी की थी।

खरगे और राहुल गांधी की ओर से उठाए गए मुद्दे विपक्ष की राजनीतिक मांगों का हिस्सा हैं। इन पर आगे क्या कानूनी या संस्थागत कार्रवाई होगी, यह संबंधित याचिकाओं और सक्षम संस्थाओं के फैसलों पर निर्भर करेगा।

बीजेपी ने राहुल गांधी पर साधा निशाना

सीजेआई द्वारा मुलाकात से इनकार किए जाने के बाद बीजेपी नेता गौरव भाटिया ने राहुल गांधी और विपक्ष पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका को रोजमर्रा की राजनीतिक गतिविधियों से अलग रखा जाना चाहिए और संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक विवादों का मंच नहीं बनाना चाहिए।

बीजेपी ने इस घटनाक्रम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता और शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत से जोड़कर देखा। वहीं कांग्रेस और अन्य विपक्षी दल चुनाव प्रक्रिया से जुड़े अपने सवालों को उठाने पर जोर दे रहे हैं। <Cite refs={[“turn960587news14″,”turn960587search4”]}/>

अब कानूनी प्रक्रिया पर टिकी नजरें

सीजेआई सूर्यकांत के बयान से स्पष्ट है कि विपक्षी दलों के लिए अदालत में अपनी बात रखने का रास्ता खुला है, लेकिन इसके लिए निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया अपनानी होगी। यदि कोई याचिका दाखिल की जाती है, तो उस पर कानून और संबंधित तथ्यों के आधार पर विचार किया जाएगा।

अब नजर इस बात पर रहेगी कि INDIA गठबंधन के नेता मार्च के दौरान क्या कदम उठाते हैं और चुनाव आयोग तथा SIR से जुड़े मुद्दों पर आगे कौन-सी कानूनी कार्रवाई की जाती है।

 

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