
Lucknow News-डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान में अंतरराष्ट्रीय प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स दिवस के अवसर पर बुधवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया। भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की ओर से आयोजित कार्यक्रम में दिव्यांगजनों के पुनर्वास, कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों की उपलब्धता के साथ आधुनिक तकनीक के उपयोग पर चर्चा हुई। इस अवसर पर संस्थान की ओर से पांच से 20 नवंबर तक निश्शुल्क फुट स्कैनिंग और फ्लैट फुट की जांच का अभियान चलाने की जानकारी दी गई। इसमें कोई भी व्यक्ति जांच करा सकेगा।
कार्यक्रम में संस्थान के निदेशक प्रो. सीएम सिंह ने कहा कि पुनर्वास का उद्देश्य केवल बीमारी का उपचार करना या सहायक उपकरण उपलब्ध कराना नहीं है, बल्कि दिव्यांगजनों को आत्मनिर्भर बनाना भी है। इसके लिए चिकित्सा संस्थानों, शैक्षणिक संगठनों और तकनीकी संस्थाओं के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता है। डीन प्रो. राजन भटनागर ने पुनर्वास के क्षेत्र में अनुसंधान, प्रशिक्षण और कुशल मानव संसाधन विकसित करने पर जोर दिया। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक प्रो. विक्रम सिंह ने कहा कि दिव्यांगजनों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए पुनर्वास सेवाओं को सामान्य चिकित्सा सेवाओं के साथ जोड़ना जरूरी है।
वैज्ञानिक सत्र में भारतीय कृत्रिम अंग निर्माण निगम (एलिम्को) के महाप्रबंधक एवं मुख्य वित्त अधिकारी अतुल रुस्तोगी ने कृत्रिम अंगों और सहायक उपकरणों की उपलब्धता, तकनीकी नवाचार तथा पुनर्वास सेवाओं के विस्तार पर विचार रखे। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रविन्द्र सिंह ने दिव्यांगजनों के लिए अनुकूलित खेलों के महत्व पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि बोच्चिया जैसे खेल गंभीर शारीरिक दिव्यांगता वाले व्यक्तियों को भी खेल गतिविधियों और सामाजिक कार्यक्रमों में भागीदारी का अवसर प्रदान करते हैं।
चार केंद्रों पर मिलेगी जांच की सुविधा
संस्थान के भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग की ओर से पांच से 20 नवंबर तक निश्शुल्क फुट स्कैनिंग और फ्लैट फुट स्क्रीनिंग अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लोहिया संस्थान की पीएमआर ओपीडी, अर्बन हेल्थ सेंटर उजड़ियावं, रूरल हेल्थ ट्रेनिंग सेंटर जग्गौर और डॉ. आरपीजी परिसर में जांच की सुविधा उपलब्ध रहेगी। जांच में पैरों की बनावट और कार्यप्रणाली से संबंधित समस्याओं की पहचान की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित व्यक्ति को चिकित्सकीय परामर्श और आगे की जांच के लिए मार्गदर्शन दिया जाएगा। इस सुविधा का लाभ उठाने के लिए दिव्यांगता होना आवश्यक नहीं है।
क्यूआर कोड से दर्ज करा सकेंगे उपकरणों से जुड़ी समस्याएं
कृत्रिम अंग, कैलिपर और अन्य सहायक उपकरणों का उपयोग करने वाले दिव्यांगजनों की समस्याओं के समाधान के लिए विभाग की ओर से विशेष सुविधा शुरू की जा रही है। इसके तहत क्यूआर कोड स्कैन कर गूगल फॉर्म के माध्यम से उपकरणों की फिटिंग, रखरखाव, मरम्मत और उपयोग में होने वाली परेशानियों की जानकारी दी जा सकेगी। विभाग के विशेषज्ञ इन समस्याओं की समीक्षा कर संबंधित व्यक्तियों से फोन पर संपर्क करेंगे। जरूरत पड़ने पर उन्हें पीएमआर ओपीडी में चिकित्सकीय परामर्श के लिए बुलाया जाएगा।
पुनर्वास सेवाओं के विस्तार पर हुआ विचार-विमर्श
कार्यक्रम के दौरान आयोजित क्षेत्रीय सम्मेलन में केजीएमयू, एसजीपीजीआई, डॉ. शकुंतला मिश्रा राष्ट्रीय पुनर्वास विश्वविद्यालय, समेकित क्षेत्रीय केंद्र लखनऊ, भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी, बोच्चिया इंडिया और बोच्चिया उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सम्मेलन में प्रदेश में प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स सेवाओं को मजबूत करने, प्रशिक्षित विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने और जरूरतमंदों तक किफायती सहायक उपकरण पहुंचाने पर चर्चा की गई। इसके अलावा उपकरण उपलब्ध कराने के बाद उनके उपयोग का प्रशिक्षण, नियमित देखरेख और फॉलोअप की व्यवस्था बेहतर बनाने पर भी जोर दिया गया।
21 नवंबर को होगा बोच्चिया का प्रदर्शन मैच
कार्यक्रमों का समापन 21 नवंबर को सुबह 10:30 बजे से आयोजित सीएमई के साथ होगा। इस दौरान फुट स्कैनिंग अभियान की रिपोर्ट प्रस्तुत की जाएगी। साथ ही पुनर्वास और सहायक तकनीक से संबंधित शैक्षणिक सत्र आयोजित होंगे। इस अवसर पर बोच्चिया खेल का प्रदर्शन मैच भी होगा। इसका उद्देश्य दिव्यांगजनों के लिए खेलों की संभावनाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाना है। कार्यक्रम का समन्वय भौतिक चिकित्सा एवं पुनर्वास विभाग के सहायक आचार्य एवं प्रोस्थेटिक्स एवं ऑर्थोटिक्स सेक्शन के फैकल्टी इंचार्ज डॉ. अमित रंजन कर रहे हैं।
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