International News: केशम द्वीप पर अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से फिर भड़का ईरान तनाव, मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप का बड़ा दांव!

होर्मुज जलडमरूमध्य के पास पांच धमाकों की खबर, अमेरिकी अधिकारियों ने सीमित रक्षात्मक हमले की पुष्टि की। मिडटर्म चुनाव से पहले सैन्य कार्रवाई ने बढ़ाई चिंता।

International News: अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंचता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एक तरफ तेहरान के साथ बातचीत और संभावित समझौते की उम्मीद जता रहे हैं, तो दूसरी तरफ ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण इलाके में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई की खबर सामने आई है। सोमवार देर रात ईरान के केशम द्वीप पर कई धमाके हुए। अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से आई रिपोर्टों में इन धमाकों को अमेरिकी सेना की सीमित सैन्य कार्रवाई बताया गया है। यह घटनाक्रम ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका में मध्यावधि चुनाव होने वाले हैं और ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बातचीत आगे बढ़ाने के संकेत दे रहा है।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA के मुताबिक, केशम द्वीप पर लगातार पांच धमाकों की आवाज सुनी गई। वहीं, पास के बंदरगाह शहर बंदर लेंगेह में भी विस्फोटों की खबर सामने आई। अमेरिकी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमेरिकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में ईरानी ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि, यह कार्रवाई बड़े पैमाने पर युद्ध दोबारा शुरू करने के बजाय सीमित और रक्षात्मक बताई जा रही है।

केशम द्वीप पर क्या हुआ?

ईरान का केशम द्वीप फारस की खाड़ी में स्थित है और होर्मुज जलडमरूमध्य के बेहद करीब होने के कारण सामरिक दृष्टि से काफी अहम माना जाता है। मंगलवार की शुरुआत में यहां पांच धमाकों की खबर सामने आई। स्थानीय लोगों ने आसमान में दो विमानों को उड़ते देखने की बात भी कही।

ईरान की सरकारी समाचार एजेंसी IRNA ने विस्फोटों की जानकारी दी, जबकि समाचार एजेंसी फार्स ने बंदर लेंगेह में समुद्र की दिशा से धमाकों की आवाज आने की खबर दी। शुरुआती रिपोर्टों में यह स्पष्ट नहीं था कि विस्फोट किस वजह से हुए और उनसे कितना नुकसान हुआ है।

हालांकि, इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से वॉल स्ट्रीट जर्नल और एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्टों में पुष्टि की गई कि अमेरिकी सेना ने होर्मुज क्षेत्र में ईरानी ठिकानों पर सीमित हमले किए। अमेरिकी पक्ष के अनुसार, यह कार्रवाई उन ईरानी सैन्य ठिकानों के खिलाफ थी, जहां से अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने के लिए सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों का इस्तेमाल किया जा रहा था।

एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाने की चर्चा

अमेरिकी सैन्य कार्रवाई को लेकर शुरुआती रिपोर्टों में ईरान के एयर डिफेंस सिस्टम को निशाना बनाए जाने की बात कही गई। हालांकि, हमले के सटीक ठिकानों और नुकसान को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।

रिपोर्टों के मुताबिक, ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इससे पहले होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास अमेरिकी निगरानी ड्रोनों को रोकने और उन्हें मार गिराने का दावा किया था। ईरान ने अमेरिकी MQ-9 ड्रोन को निशाना बनाने की बात भी कही थी।

ऐसे में दोनों देशों के बीच पहले से जारी सैन्य तनाव और बढ़ गया है। हालांकि, अमेरिकी अधिकारियों ने इस कार्रवाई को बड़े सैन्य अभियान की शुरुआत मानने से इनकार किया है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से भी शुरुआती रिपोर्टों के समय कोई विस्तृत सार्वजनिक बयान सामने नहीं आया था

मिडटर्म चुनाव से पहले ट्रंप के सामने बड़ी चुनौती

इस पूरे घटनाक्रम का समय भी काफी अहम है। अमेरिका में 3 नवंबर को मध्यावधि चुनाव होने हैं। इन चुनावों में राष्ट्रपति ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी के सामने प्रतिनिधि सभा और सीनेट में अपना नियंत्रण बनाए रखने की चुनौती है।

ईरान के साथ जारी संघर्ष अमेरिकी राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बना हुआ है। युद्ध के कारण तेल की कीमतों और अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर ट्रंप प्रशासन पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की खबर ने अमेरिकी राजनीति में भी नई चर्चा शुरू कर दी है।

खास बात यह है कि ट्रंप ने सोमवार को अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर ईरान के साथ संभावित समझौते को लेकर सकारात्मक संकेत दिए थे। उन्होंने दावा किया था कि ईरान जल्द से जल्द समझौता करना चाहता है और दोनों देशों के बीच डील संभव है।

ट्रंप ने तेल की कीमतों में आई गिरावट का जिक्र करते हुए कहा था कि बाजार को उम्मीद है कि ईरान के साथ युद्ध नहीं होगा। उनके मुताबिक, कच्चे तेल की कीमतों में प्रति बैरल करीब 10 डॉलर की गिरावट आई है। ऐसे में एक तरफ समझौते की उम्मीद और दूसरी तरफ सैन्य कार्रवाई की खबर ने अमेरिकी रणनीति को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

केशम द्वीप के आसपास हुई सैन्य कार्रवाई को केवल एक स्थानीय घटना के तौर पर नहीं देखा जा सकता। इसकी सबसे बड़ी वजह होर्मुज जलडमरूमध्य की भौगोलिक और आर्थिक अहमियत है।

यह समुद्री रास्ता फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ता है। दुनिया के बड़े तेल निर्यातक देशों के लिए यह बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है। वैश्विक तेल और ऊर्जा आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है।

यदि यहां सैन्य तनाव बढ़ता है या जहाजों की आवाजाही बाधित होती है, तो उसका असर केवल ईरान और अमेरिका तक सीमित नहीं रहेगा। भारत समेत दुनिया के कई देशों की अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।

भारत के लिए भी यह रास्ता काफी अहम है, क्योंकि देश अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। होर्मुज में किसी भी तरह की लंबी बाधा से अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसका असर पेट्रोल-डीजल की कीमतों, परिवहन खर्च और महंगाई पर पड़ने की आशंका रहती है।

2027 Assembly Elections: 7 राज्यों की 940 सीटों पर सियासी मुकाबला, 2029 से पहले BJP के सामने होंगी ये चुनौतियां

क्या फिर शुरू होगा अमेरिका-ईरान के बीच बड़ा संघर्ष?

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि केशम द्वीप पर हुई अमेरिकी कार्रवाई के बाद दोनों देशों के बीच तनाव किस दिशा में जाएगा। एक तरफ अमेरिका इसे रक्षात्मक कार्रवाई बता रहा है, तो दूसरी तरफ ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य गतिविधियां लगातार चिंता बढ़ा रही हैं।

हालांकि, इस घटनाक्रम को लेकर यह कहना जल्दबाजी होगी कि दोनों देशों के बीच पहले से लागू युद्धविराम पूरी तरह समाप्त हो गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने भी कार्रवाई को सीमित बताया है और बड़े स्तर पर युद्ध दोबारा शुरू होने का संकेत नहीं दिया है।

दूसरी ओर, उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत में प्रगति होने की बात कही है। ऐसे में कूटनीतिक प्रयासों और सैन्य गतिविधियों के बीच आगे का घटनाक्रम काफी महत्वपूर्ण रहने वाला है।

अब पूरी दुनिया की नजर इस बात पर है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ बातचीत को आगे बढ़ाता है या फिर सैन्य दबाव की रणनीति जारी रखता है। केशम द्वीप पर हुए धमाकों ने एक बार फिर यह साफ कर दिया है कि होर्मुज क्षेत्र में तनाव कम होने के संकेत अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं।

Show More

Related Articles

Back to top button