
Supreme Court: दिल्ली में INDIA गठबंधन और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिकाओं पर मंगलवार को सुनवाई हुई। इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील को बार-बार बीच में बोलने पर कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने नाराजगी जताते हुए कहा, “क्या कोर्ट को मछली बाजार समझ रखा है? इस तरह का आचरण नहीं चल सकता।”
सुनवाई के दौरान अदालत ने याचिकाकर्ताओं को एक जैसी और मिलती-जुलती याचिकाएं दाखिल करने से भी बचने की सलाह दी। चीफ जस्टिस ने कहा कि ऐसी याचिकाओं के कारण मामले की सुनवाई में परेशानी होती है। वहीं, केंद्र सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि मामले के सभी पहलुओं पर अलग-अलग जवाब तैयार किया गया है और उसे अदालत में दाखिल किया जा रहा है।
व्यापारियों ने अदालत में उठाया नुकसान का मुद्दा
सुनवाई के दौरान व्यापारिक संगठनों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी पेश हुए। उन्होंने अदालत को बताया कि प्रदर्शन के कारण आसपास के कारोबार पर असर पड़ रहा है और व्यापारियों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
रोहतगी ने कहा कि रामलीला मैदान के आसपास कई थोक बाजार हैं, जहां बड़ी संख्या में लोग काम करते हैं। इन बाजारों से लाखों लोगों की आजीविका जुड़ी हुई है। उन्होंने इस स्थिति को देखते हुए अदालत से मामले में हस्तक्षेप करने और व्यापारियों की परेशानी पर ध्यान देने का आग्रह किया।
सॉलिसिटर जनरल ने प्रदर्शन की अवधि पर उठाए सवाल
केंद्र सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सुनवाई के दौरान प्रदर्शन से जुड़े घटनाक्रम का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जुलाई में एक दिन के प्रदर्शन की अनुमति लेकर 17 दिनों तक धरना दिया गया और इसके बाद संसद मार्च का आह्वान किया गया।
मेहता ने सार्वजनिक स्थानों पर प्रदर्शन और निजता के अधिकार से जुड़े तर्कों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने वाले लोग सार्वजनिक जगहों पर तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाने को निजता का उल्लंघन बता रहे हैं। उनके अनुसार, यदि इस आधार पर आपत्ति की जाए तो सार्वजनिक स्थानों पर लगे CCTV कैमरों को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं।
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि सरकार की ओर से दाखिल जवाब में कहा गया है कि केवल तस्वीरें कैप्चर होने के आधार पर किसी व्यक्ति की पहचान करके उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया जाता।
याचिकाकर्ता पक्ष ने बताया विरोध को मौलिक अधिकार
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील ने प्रदर्शन के अधिकार का बचाव किया। उन्होंने दलील दी कि शांतिपूर्ण विरोध करना नागरिकों का मौलिक अधिकार है। उनके मुताबिक, जिस स्थान पर भी प्रदर्शन होगा, उसके आसपास कोई न कोई कारोबारी गतिविधि जरूर होगी। केवल व्यापार प्रभावित होने के आधार पर विरोध प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाई जा सकती।
इसी बहस के बीच याचिकाकर्ता पक्ष के एक वकील के बार-बार हस्तक्षेप करने पर चीफ जस्टिस सूर्यकांत नाराज हो गए। उन्होंने अदालत में अनुशासन बनाए रखने की बात कहते हुए वकील को फटकार लगाई।
प्रदर्शनकारियों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने पर भी सवाल
सुप्रीम कोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस की ओर से लोगों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड किए जाने का मुद्दा उठाया। उन्होंने इस संबंध में दायर याचिका पर भी नोटिस जारी करने का आग्रह किया।
भूषण ने दलील दी कि प्रदर्शन में शामिल लोगों की तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करना उनकी निजता के अधिकार से जुड़ा मामला है। उन्होंने इसे निजता का उल्लंघन बताते हुए अदालत से इस पहलू पर भी विचार करने की मांग की।
अलग-अलग पक्षों की दलीलों पर अदालत में हुई बहस
सुनवाई के दौरान प्रदर्शन के अधिकार, सार्वजनिक स्थानों के इस्तेमाल, व्यापारियों को होने वाले नुकसान और प्रदर्शनकारियों की निजता जैसे मुद्दे सामने आए। केंद्र सरकार ने अपने जवाब में प्रदर्शन की अवधि और सार्वजनिक स्थानों पर रिकॉर्डिंग से जुड़े पक्ष रखे, जबकि याचिकाकर्ताओं ने विरोध को मौलिक अधिकार बताया।
व्यापारिक संगठनों ने बाजारों और रोजगार पर पड़ रहे असर का मुद्दा उठाया। फिलहाल अदालत में हुई सुनवाई के दौरान इन सभी पहलुओं पर पक्षकारों की दलीलें सामने आईं। मामले में आगे की कार्यवाही और अदालत के निर्देशों पर नजर रहेगी।
written by Siddhi Srivastava



