
Prayagraj News: धूमनगंज के मुंडेरा स्थित नारायण स्वरूप हॉस्पिटल में रविवार को नारायण सेवा संस्थान के तत्वाधान में आयोजित निःशुल्क स्वास्थ्य कैम्प में लोगों का भारी उत्साह देखने को मिला। कैम्प में कुल 275 मरीजों ने फेफड़ा, मानसिक एवं त्वचा रोग विशेषज्ञों से निःशुल्क परामर्श प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने मरीजों की जाँच के साथ-साथ उन्हें बीमारी से बचाव और सही इलाज के बारे में भी जागरूक किया।
प्रदूषण का असर, साँस के मरीज बढ़े
टीबी, चेस्ट एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक यादव ने लंबे समय से खाँसी, साँस फूलने, अस्थमा, सीओपीडी, टीबी एवं फेफड़ों के संक्रमण से पीड़ित मरीजों का परीक्षण किया। डॉ. यादव ने बताया कि सर्दी की शुरुआत और शहर में बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण इन दिनों साँस के मरीजों की परेशानी बढ़ी है। गाड़ियों का धुआँ, निर्माण कार्यों की धूल और हवा में मौजूद महीन कण सीधे फेफड़ों को प्रभावित करते हैं।
उन्होंने लोगों को सलाह दी कि दो सप्ताह से अधिक खाँसी होने पर उसे सामान्य समझकर नज़रअंदाज़ न करें, बल्कि विशेषज्ञ को दिखाएँ। जो मरीज इनहेलर या दवा ले रहे हैं, वे आराम मिलने पर भी दवा बीच में बंद न करें। प्रदूषण अधिक होने पर सुबह-शाम की बाहर की गतिविधियाँ कम करें और बाहर निकलते समय सही फिटिंग वाला मास्क पहनें। बच्चों, बुज़ुर्गों और पहले से साँस की बीमारी वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
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मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर हुई बात
न्यूरो साइकियाट्रिस्ट डॉ. संतोष केशरवानी ने तनाव, चिंता, नींद न आने, घबराहट, बेचैनी, उदासी एवं बार-बार आने वाले विचारों जैसी समस्याओं से जूझ रहे मरीजों को परामर्श दिया। डॉ. केशरवानी ने कहा कि मानसिक परेशानी भी बुखार या दर्द जितनी ही वास्तविक है, लेकिन समाज में संकोच के कारण लोग इसके बारे में बात करने से बचते हैं। उन्होंने कहा कि यह अच्छा संकेत है कि अब लोग आगे आकर परामर्श ले रहे हैं। समय पर सही इलाज से इन समस्याओं को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
बिना सलाह क्रीम लगाना खतरनाक
त्वचा एवं बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. रिचा सिंह ने बाल झड़ने, खुजली, दाद, फंगल इन्फेक्शन, मुहाँसे एवं त्वचा पर दाग-धब्बों से पीड़ित मरीजों का परीक्षण किया। डॉ. सिंह ने बताया कि कैम्प में आए कई मरीज पहले से ही मेडिकल स्टोर से खरीदी गई स्टेरॉयड युक्त क्रीम का इस्तेमाल कर रहे थे। ऐसी क्रीम से कुछ दिन आराम मिलता है, लेकिन बाद में फंगल इन्फेक्शन और ज़िद्दी हो जाता है और त्वचा पतली हो सकती है। उन्होंने सलाह दी कि त्वचा पर कोई भी दवा लगाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह अवश्य लें।
जाँच और दवा भी निःशुल्क
कैम्प में मरीजों की शुगर, हीमोग्लोबिन एवं ईसनोफिलिया की निःशुल्क जाँच की गई। जाँच रिपोर्ट के आधार पर डॉक्टरों ने परामर्श दिया और आवश्यक दवाइयाँ भी निःशुल्क वितरित की गईं। जिन मरीजों को आगे इलाज की आवश्यकता थी, उन्हें फॉलो-अप के लिए हॉस्पिटल की ओपीडी में आने की सलाह दी गई।



