
CJP protest : भारत में CJP प्रदर्शनों और मानवाधिकारों को लेकर उठे विवाद के बीच अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने अमेरिका का रुख स्पष्ट किया है। उन्होंने कहा कि यह भारत का आंतरिक मामला है और अमेरिका इसमें हस्तक्षेप नहीं करेगा। इससे पहले छह अमेरिकी सांसदों ने रूबियो से भारत सरकार के साथ बातचीत में प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दे उठाने की अपील की थी।
CJP प्रदर्शन पर क्या बोले अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो?
भारत में CJP प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठाए गए हैं। इसी मुद्दे पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने कहा कि भारत के आंतरिक मामलों में अमेरिका दखल नहीं देगा। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका में भी विरोध प्रदर्शन होते रहते हैं।
रूबियो के इस रुख को भारत के आंतरिक मामलों पर अमेरिकी हस्तक्षेप से दूरी बनाने के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, इस मुद्दे पर उनके बयान के सटीक आधिकारिक शब्दों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।
छह अमेरिकी सांसदों ने रूबियो से की थी हस्तक्षेप की अपील
मार्को रूबियो के भारत दौरे से पहले छह अमेरिकी सांसदों ने उनसे CJP प्रदर्शनों का मुद्दा भारत सरकार के सामने उठाने की अपील की थी। इन सांसदों में प्रमिला जयपाल, इल्हान उमर, जिम मैकगवर्न, रशीदा तलीब, एलेनोर होम्स नॉर्टन और जीसस गार्सिया के नाम शामिल हैं।
सांसदों ने भारत में प्रदर्शनों के दौरान कथित पुलिस कार्रवाई, हिरासत और मानवाधिकारों से जुड़े सवालों पर चिंता जताई थी। उन्होंने रूबियो से भारत के साथ बातचीत के दौरान इन मुद्दों को उठाने का आग्रह किया था।
भारत ने मानवाधिकारों के मुद्दे पर दिया कड़ा जवाब
CJP प्रदर्शनों को लेकर संयुक्त राष्ट्र के कुछ विशेष रैपोर्टेयर्स ने भी चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, विशेषज्ञों ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित बल प्रयोग, हिरासत और विरोध प्रदर्शनों पर लगाए गए प्रतिबंधों से जुड़े सवाल उठाए।
भारत ने इन टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि मानवाधिकारों के मुद्दे का इस्तेमाल राजनीतिक दबाव बनाने या चुनिंदा देशों को निशाना बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। भारत का रुख है कि ऐसे मामलों पर चर्चा तथ्यों और निष्पक्ष आकलन के आधार पर होनी चाहिए।
तीन दिन के भारत दौरे पर हैं मार्को रूबियो
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो 20 अक्टूबर को तीन दिवसीय भारत दौरे पर मुंबई पहुंचे। इस दौरान उन्होंने भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की। उनकी यात्रा में भारत-अमेरिका व्यापार समझौते, ऊर्जा सहयोग और सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर चर्चा शामिल है।
रूबियो के गुजरात के जामनगर स्थित रिलायंस इंडस्ट्रीज की रिफाइनरी का दौरा करने का कार्यक्रम भी बताया गया है। ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग और कच्चे तेल की प्रोसेसिंग से जुड़े विकल्प भी दोनों देशों के बीच चर्चा के विषय हैं।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते पर क्या बोले रूबियो?
भारत दौरे के दौरान रूबियो ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर भी सकारात्मक संकेत दिए। रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि समझौते पर लगभग 99 प्रतिशत काम पूरा हो चुका है, जबकि अंतिम रूप देने के लिए कुछ मुद्दों पर सहमति बनना बाकी है।
उन्होंने अमेरिकी टैरिफ और वीजा नीति पर भी अपनी बात रखी। रूबियो ने कहा कि अमेरिका की नीतियां भारत को विशेष रूप से निशाना बनाकर तैयार नहीं की गई हैं।
CJP प्रदर्शन पर अमेरिकी रुख क्यों है अहम?
CJP प्रदर्शनों और मानवाधिकारों से जुड़े मुद्दों पर अमेरिकी सांसदों की अपील के बावजूद भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करने का रुख कूटनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है। एक ओर मानवाधिकारों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सवाल उठ रहे हैं, वहीं दूसरी ओर भारत ने इन मुद्दों पर राजनीतिक दबाव बनाने की कोशिशों का विरोध किया है।
मार्को रूबियो का भारत दौरा ऐसे समय में हो रहा है, जब दोनों देश व्यापार, ऊर्जा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा कर रहे हैं। ऐसे में मानवाधिकारों से जुड़े विवादों पर दोनों देशों का रुख द्विपक्षीय संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण रहेगा।



