
श्री महंत बाबा हाथी राम पजावा रामलीला कमेटी के तत्वाधान में रविवार को कुंभकरण वध का मंचन किया गया।अपनी मृत्यु को जानते हुए भी कुंभकरण ने भाई का साथ न छोड़ा और भाई के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी। रामायण की इस चौपाई ने कुंभकरण के अपने जेष्ठ भाई रावण के प्रति प्रेम दर्शाया है। वो चौपाई है
अब भा भाई काल बस जियँ जनि सोचहु तात।
मैं रन भूमि पैठिहउँ देखउँ केतिक बात॥
यह बातें कुंभकरण ने रावण से कहीें अब तुम काल के वश में हो चुके हो, इसलिए अपने मन में ज्यादा चिंता मत करो। अब जब बात युद्ध तक आ ही गई है, तो मैं रणभूमि में उतरूँगा और देखूँगा कि उस वानर सेना में कितना दम है। मंचन प्रारंभ पूर्व सर्वप्रथम प्रभु श्री राम के आगमन पर जिलाधिकारी मनीष वर्मा, पुलिस आयुक्त पीयूष मोर्डिया और नगर आयुक्त ने भगवान की आरती कर कार्यक्रम का शुभारंभ किया। रामलीला निर्देशक सचिन कुमार गुप्ता द्वारा प्रस्तुत सीता के राम में कुंभकरण को जगाना एवं कुंभकरण रावण संवाद का मोहन दृश्य बहुत ही आकर्षक रहा,जब कुंभकर्ण ने देखा कि रावण किसी भी कीमत पर अपनी जिद छोड़ने को तैयार नहीं है और उसका अहंकार चरम पर है, तब एक सच्चे भाई का धर्म निभाते हुए उसने कहा कि श्री राम के हाथों उसका मरना निश्चित है, फिर भी उसने संकट के समय अपने भाई का साथ छोड़ना अधर्म समझा। उसने रावण से आखिरी बार गले मिलकर युद्ध भूमि की ओर प्रस्थान किया। कुंभकरण का युद्ध भूमि में राम एवं लक्ष्मण से युद्ध का बहुत ही रोमांचकारी रहा इसी के साथ अग्नि के बाणो का आवागमन बहुत ही रोचक रहा। कुंभकरण के वध के पश्चात साड़ी मैदान में जनता द्वारा जय श्री राम के नारे गूंज उठे , मेघनाथ और लक्ष्मण का युद्ध बहुत ही भीषण तरीके से प्रस्तुत किया गया।
रिपोर्ट:आकाश त्रिपाठी



