
नई दिल्ली: जुलाई 2026 में दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य स्थानों पर हुई हिंसा के मामलों की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट की ओर से गठित उच्चस्तरीय जांच समिति (HPEC) ने शिकायत दर्ज कराने के लिए एक पोर्टल लॉन्च किया है। इसके जरिए हिंसा से प्रभावित लोग, प्रत्यक्षदर्शी और अन्य संबंधित पक्ष अपनी शिकायतें, जानकारी और सुझाव समिति तक पहुंचा सकेंगे। समिति ने यह व्यवस्था संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा और उनकी पहचान की गोपनीयता को ध्यान में रखकर तैयार की है।
समिति के अनुसार, प्रभावित व्यक्ति चाहें तो अपनी पहचान गोपनीय रखने का अनुरोध कर सकते हैं। हिंसा के दौरान प्रभावित हुए पुलिसकर्मी भी इस पोर्टल के माध्यम से शिकायत दर्ज करा सकेंगे। जांच के दायरे में आने वाले मामलों से संबंधित जानकारी रखने वाला कोई भी व्यक्ति समिति के समक्ष अपना पक्ष रख सकता है।
HPEC पोर्टल पर कैसे दर्ज कराएं शिकायत?
जंतर-मंतर हिंसा मामले में शिकायत या जानकारी देने के लिए संबंधित व्यक्ति समिति के आधिकारिक पोर्टल hpec.nic.in पर जा सकते हैं। इसके अलावा शिकायत और संबंधित दस्तावेज डाक के माध्यम से भी भेजे जा सकते हैं।
समिति के कार्यालय में सभी कार्यदिवसों के दौरान दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी दी गई है। प्रभावित लोगों और अन्य संबंधित पक्षों से अपील की गई है कि वे घटना से जुड़ी जानकारी, शिकायतें और जरूरी साक्ष्य समिति तक पहुंचाएं।
पोर्टल का उद्देश्य हिंसा की घटनाओं से जुड़े विभिन्न पक्षों की बात सुनना और जांच के लिए प्रासंगिक जानकारियां जुटाना है। शिकायत दर्ज कराने वाले संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा और उनकी पहचान की गोपनीयता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
पैलेट गन से लेकर संपत्ति के नुकसान तक की होगी जांच
उच्चस्तरीय जांच समिति जंतर-मंतर और अन्य स्थानों पर हुई हिंसा के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगी। जांच के प्रमुख मुद्दों में पैलेट गन के इस्तेमाल, महिला प्रदर्शनकारियों के साथ कथित दुर्व्यवहार, लक्षित हिंसा और दोनों पक्षों की ओर से हुई अत्यधिक हिंसा शामिल हैं।
इसके अलावा, हिंसा के दौरान सार्वजनिक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान से संबंधित मामलों की भी जांच की जाएगी। समिति प्रभावित लोगों, प्रत्यक्षदर्शियों और अन्य संबंधित पक्षों से मिली जानकारी के आधार पर घटनाओं के विभिन्न पहलुओं की पड़ताल करेगी।
जांच समिति में कौन-कौन शामिल?
सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित HPEC में न्यायिक और पुलिस प्रशासन से जुड़े अनुभवी अधिकारी शामिल हैं। समिति में जस्टिस रेड्डी, पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व न्यायाधीश जस्टिस शालिंदर कौर, सीबीआई के पूर्व निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के सेवानिवृत्त पुलिस महानिदेशक एलआर बिश्नोई शामिल हैं।
समिति का उद्देश्य हिंसा से जुड़े सभी प्रमुख पहलुओं की जांच करना और संबंधित पक्षों से प्राप्त शिकायतों व जानकारियों पर विचार करना है।
20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के दौरान क्या हुआ था?
जुलाई 2026 में जंतर-मंतर पर शुरू हुए आंदोलन के दौरान 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़पें हुई थीं। प्रदर्शनकारी संसद की ओर मार्च करने की कोशिश कर रहे थे। भीड़ को आगे बढ़ने से रोकने के दौरान सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज किया और आंसू गैस के गोले दागे।
छात्रों के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन कई शहरों तक फैल गया था। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे समेत कई मांगें उठा रहे थे। खबर के मुताबिक, आंदोलन 25 जुलाई को समाप्त हुआ था।
अब सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित जांच समिति के पोर्टल के जरिए प्रभावित लोगों को अपनी शिकायतें और साक्ष्य उपलब्ध कराने का अवसर मिलेगा। इससे जांच के दौरान घटनाओं से जुड़े विभिन्न पक्षों के बयान और जानकारियां जुटाने में मदद मिल सकती है।



