
Rahul Gandhi: कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी पर महिला पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगा है। दिल्ली बीजेपी के प्रदेश उपाध्यक्ष राजेश भाटिया ने दावा किया कि घटना के बाद पत्रकार को अस्पताल ले जाना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि डॉक्टरों ने महिला की गर्भावस्था से जुड़ी परेशानी की जानकारी दी और उसे भर्ती करने की सलाह दी।
यह मामला सोमवार को इंडिया ब्लॉक के नेताओं के सुप्रीम कोर्ट तक निकाले गए मार्च के दौरान सामने आया। महिला पत्रकार ऋचा पाराशर ने भी घटना को लेकर अपना पक्ष रखा है। हालांकि, आरोपों और चिकित्सकीय स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध जानकारी से नहीं होती है।
BJP नेता राजेश भाटिया ने क्या दावा किया?
राजेश भाटिया के मुताबिक, राजेंद्र नगर स्थित पार्टी कार्यालय के पास रात करीब आठ से साढ़े आठ बजे के बीच एक युवती उनसे मिली। उसने बताया कि उसकी बहन पत्रकार है और मार्च के दौरान राहुल गांधी ने उसे धक्का दिया, जिससे उसे चोट लगी है।
भाटिया ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद उन्होंने स्थानीय विधायक उमंग बजाज और पार्टी नेता प्रतीक शर्मा से संपर्क किया। इसके बाद वे अस्पताल पहुंचे, जहां महिला अपने पति के साथ मौजूद थी।
बीजेपी नेता के अनुसार, उन्होंने महिला को प्राथमिक चिकित्सा दिलाने में मदद की और डॉक्टरों से बातचीत की। उन्होंने दावा किया कि चिकित्सकों ने गर्भावस्था से संबंधित समस्या की बात कही और आगे की जांच के लिए महिला को अस्पताल में भर्ती किया।
डॉक्टरों की निगरानी में होने की कही बात
राजेश भाटिया ने बताया कि महिला को अस्पताल में भर्ती करने के बाद उसकी जांच और उपचार किया गया। उनके दावे के मुताबिक, अल्ट्रासाउंड सहित अन्य चिकित्सकीय जांच की गई और महिला को डॉक्टरों की निगरानी में रखा गया।
उन्होंने यह भी कहा कि वरिष्ठ डॉक्टरों की ओर से आगे की जांच और उपचार किया जाना था। हालांकि, महिला की मौजूदा चिकित्सकीय स्थिति या गर्भावस्था पर घटना के प्रभाव को लेकर कोई स्वतंत्र मेडिकल रिपोर्ट यहां उपलब्ध नहीं है।
महिला पत्रकार ऋचा पाराशर ने सुनाई अपनी आपबीती
पत्रकार ऋचा पाराशर ने भी घटना का विवरण देते हुए आरोप लगाया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर से बाहर निकलते समय राहुल गांधी ने उन्हें धक्का दिया। उनके अनुसार, वह प्रदर्शन को कवर करने के लिए नहीं, बल्कि राहुल गांधी का बयान रिकॉर्ड करने के उद्देश्य से वहां मौजूद थीं।
ऋचा ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट परिसर में दो गेट थे और वह उस गेट के पास खड़ी थीं, जहां से राहुल गांधी के निकलने की संभावना थी। उन्होंने कहा कि जब राहुल गांधी बाहर आए तो उन्होंने अपना माइक आगे बढ़ाया, लेकिन आसपास मौजूद लोगों ने उसे हटाने का इशारा किया। इसके बाद उन्होंने माइक हटा लिया।
पत्रकार के मुताबिक, जब उन्होंने अन्य मीडियाकर्मियों को कैमरे और माइक के साथ देखा तो दोबारा अपना माइक आगे बढ़ाया। उनका कहना है कि इसी दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की हुई।
‘सीढ़ियों से गिर गई और फोन की स्क्रीन टूट गई’
ऋचा पाराशर ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने उनका कंधा पकड़कर खींचा और वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने भी उन्हें धक्का दिया। उनके अनुसार, वह सीढ़ियों से गिर गईं और उनके फोन की स्क्रीन टूट गई।
उन्होंने दावा किया कि घटना के दौरान उन्होंने धक्का नहीं देने की अपील भी की थी। पत्रकार के मुताबिक, बाद में उन्होंने अपने वरिष्ठों से संपर्क किया और उन्हें घटना के बारे में जानकारी दी।
ऋचा ने बताया कि उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां उन्होंने पेट में हल्के दर्द की शिकायत की। उन्होंने यह भी कहा कि घटना के दौरान उनके कैमरामैन को भी चोट लगी। इन आरोपों की पुष्टि के लिए संबंधित वीडियो और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों का स्वतंत्र परीक्षण जरूरी होगा।
CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर निकला था मार्च
यह घटना ऐसे समय सामने आई, जब इंडिया ब्लॉक के नेता मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR से जुड़े मुद्दों को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे।
सोमवार को राहुल गांधी के नेतृत्व में विपक्षी नेताओं ने बाराखंभा रोड से सुप्रीम कोर्ट तक मार्च किया। विपक्षी दलों ने घोषणा की थी कि वे चुनाव आयोग से जुड़े अपने आरोपों और ज्ञानेश कुमार के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करेंगे।
मार्च में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव, बिहार विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी और कर्नाटक के उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार सहित कई विपक्षी नेता शामिल हुए थे।
राजनीतिक विवाद के बीच आरोपों पर नजर
महिला पत्रकार के आरोप और राजेश भाटिया के बयान के बाद यह मामला राजनीतिक विवाद का विषय बन गया है। एक ओर बीजेपी नेता ने महिला की चिकित्सकीय स्थिति को लेकर दावा किया है, वहीं पत्रकार ने घटना का अपना विवरण साझा किया है।
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर आरोपों को सिद्ध तथ्य नहीं माना जा सकता। घटना से संबंधित वीडियो, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और चिकित्सकीय दस्तावेज सामने आने पर पूरे मामले की स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।
written by Siddhi Srivastava



