Gomti River: गोमती का पानी बढ़ा तो लखनऊ में रेस्क्यू ऑपरेशन तेज, 90 नावें उतारी गईं; 35 परिवार सुरक्षित पहुंचाए गए

Gomti River: दाउद नगर, लोहरामऊ और मिल्लत नगर में 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार, 250 सफाईकर्मी संभाल रहे मोर्चा; पानी उतरने के बाद बड़े सफाई और सैनिटाइजेशन अभियान की तैयारी

Gomti River: लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद जलभराव वाले इलाकों में प्रशासन ने राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। नगर आयुक्त गौरव कुमार ने बुधवार को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर मौके पर राहत व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने जोन-6 के सैठा और जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत कई इलाकों में पहुंचकर अधिकारियों को लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

निरीक्षण के दौरान जलभराव, नावों की आवाजाही, पेयजल, सफाई, फॉगिंग और एंटी लार्वा छिड़काव समेत राहत से जुड़ी व्यवस्थाओं की समीक्षा की गई।

12 जगहों पर अस्थायी रैन बसेरे

जलभराव के कारण घरों से सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाए गए परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं। इनमें अकेले दाउद नगर में 10 रैन बसेरे बनाए गए हैं, जबकि लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक अस्थायी रैन बसेरा तैयार किया गया है।

जोन-6 में करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है, जबकि 26 लोग फिलहाल रैन बसेरों में रह रहे हैं।

इसके अलावा पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। इन केंद्रों में बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, रोशनी और मोबाइल चार्ज करने के लिए 12 चार्जिंग पॉइंट की व्यवस्था की गई है।

90 नावों से लोगों और राहत सामग्री की आवाजाही

बाढ़ जैसे हालात से निपटने के लिए जिला प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में लगाई गई हैं। इन नावों की मदद से लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने के साथ जरूरतमंदों तक राहत सामग्री भी भेजी जा रही है।

दाउद नगर में दो शिफ्टों में 25-25 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई है। इसी तरह लोहरामऊ और मिल्लत नगर में भी 25-25 कर्मचारियों को राहत कार्य में लगाया गया है।

सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज समेत कई इलाकों में नाव और स्टीमर लगातार संचालित किए जा रहे हैं। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे एक नाव को विशेष रूप से राहत सामग्री पहुंचाने और वितरण के लिए लगाया गया है।

पीने के पानी की भी की गई व्यवस्था

प्रभावित बस्तियों में पेयजल की समस्या न हो, इसके लिए करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। इसके साथ ही लगभग 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है।

नगर निगम की टीमें राहत सामग्री की लोडिंग, अनलोडिंग और वितरण में जिला प्रशासन की मदद कर रही हैं, ताकि जरूरतमंद परिवारों तक सामग्री समय पर पहुंचाई जा सके।

250 सफाईकर्मी और ड्रोन से दवा का छिड़काव

जलभराव के बाद संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों के खतरे को देखते हुए सफाई और सैनिटाइजेशन पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं।

प्रभावित क्षेत्रों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन के जरिए एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है। ऐसे स्थानों पर ड्रोन का इस्तेमाल किया जा रहा है, जहां सामान्य मशीनों से पहुंचना मुश्किल है।

इसके अलावा छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के साथ एलएसए की दो बड़ी मशीनों से भी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।

ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती यूनिवर्सिटी में बनाया गया स्टॉक सेंटर

राहत सामग्री को जरूरत के समय तुरंत प्रभावित इलाकों तक पहुंचाने के लिए ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती यूनिवर्सिटी में अस्थायी भंडार केंद्र बनाया गया है। नगर आयुक्त ने निरीक्षण के दौरान यहां मौजूद राहत सामग्री और अन्य जरूरी संसाधनों की जानकारी ली।

अधिकारियों को सामग्री को व्यवस्थित तरीके से रखने और जरूरत के अनुसार संबंधित क्षेत्रों में तत्काल भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

पानी उतरने के बाद चलेगा बड़ा सफाई अभियान

प्रशासन ने मौजूदा राहत कार्यों के साथ जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी भी शुरू कर दी है। प्रभावित क्षेत्रों के लिए अलग-अलग टीमें तैयार की जा रही हैं।

पानी उतरने के बाद सड़क और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे और गंदगी को हटाया जाएगा। इसके बाद ब्लीचिंग पाउडर और एंटी लार्वा का छिड़काव तथा फॉगिंग कराई जाएगी। जरूरत के अनुसार दवाओं का भी वितरण किया जाएगा।

प्रशासन का उद्देश्य जलभराव खत्म होने के बाद पैदा होने वाले संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों के खतरे को समय रहते नियंत्रित करना है। फिलहाल प्रभावित इलाकों में राहत, रेस्क्यू और स्वास्थ्य-सफाई से जुड़ी टीमें लगातार सक्रिय हैं।

written by Siddhi Srivastava

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