Gyanesh Kumar: CEC ज्ञानेश कुमार विवाद गहराया, पूर्व IAS अधिकारियों और कार्यकर्ताओं ने लगाए गंभीर आरोप

Gyanesh Kumar: मतदाता सूची पुनरीक्षण और निर्वाचन आयोग के फैसलों को लेकर पूर्व अफसरों व सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उठाए सवाल, आयोग मुख्यालय तक पहुंचने से रोके जाने का भी दावा।

Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को लेकर जारी राजनीतिक विवाद अब एक नए चरण में पहुंच गया है। विपक्षी दलों के विरोध प्रदर्शनों के बीच पूर्व नौकरशाहों और नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं के एक समूह ने उनके खिलाफ ‘जनता का महाभियोग’ नोटिस जारी कर दिया है। इस पहल के जरिए निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं।

समूह में पूर्व केंद्रीय गृह सचिव जी.के. पिल्लई, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हैं। इन लोगों का कहना है कि चुनाव आयोग से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण फैसलों में पारदर्शिता और संस्थागत प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया।

आयोग मुख्यालय पहुंचने को लेकर भी विवाद

समूह के सदस्यों ने दावा किया कि वे अपना नोटिस निर्वाचन आयोग के मुख्यालय में सौंपना चाहते थे, लेकिन उन्हें वहां तक पहुंचने से रोक दिया गया। नागरिक अधिकार कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज ने आरोप लगाया कि आयोग कार्यालय की ओर जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए थे, जिससे प्रतिनिधिमंडल को आगे नहीं बढ़ने दिया गया।

नोटिस में क्या-क्या आरोप लगाए गए?

महाभियोग नोटिस में छह प्रमुख बिंदुओं का उल्लेख किया गया है। आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से जुड़े कई फैसले आयोग के भीतर पर्याप्त विचार-विमर्श के बिना लिए गए। नोटिस में यह भी दावा किया गया कि कुछ निर्णयों को लेकर आयोग के अन्य सदस्यों ने आपत्तियां जताई थीं।

इसके अलावा चुनावी प्रक्रियाओं में इस्तेमाल होने वाले डिजिटल सिस्टम और प्रशासनिक फैसलों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप लगाने वालों का कहना है कि इन कदमों से चुनावी पारदर्शिता और जवाबदेही प्रभावित हो सकती है।

फॉर्म-6 को लेकर भी उठे सवाल

नोटिस में फॉर्म-6 के संशोधित प्रारूप का विशेष उल्लेख किया गया है। आरोप है कि इसकी वैधता को लेकर आंतरिक स्तर पर सवाल उठाए गए थे, फिर भी इसका इस्तेमाल किया गया। साथ ही उन मतदाताओं से दोबारा घोषणा पत्र लेने की आवश्यकता पर भी सवाल खड़े किए गए हैं, जिनके नाम कथित रूप से पहले मतदाता सूची से हट गए थे।

ECINet प्रणाली पर भी आपत्ति

नोटिस में ECINet प्लेटफॉर्म को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई है। आरोप है कि इस व्यवस्था से चुनाव पंजीकरण अधिकारियों (ERO) की पारंपरिक वैधानिक शक्तियां प्रभावित हुई हैं। यही अधिकारी मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और संशोधन करने की प्रक्रिया के लिए जिम्मेदार होते हैं।

विवाद के केंद्र में SIR प्रक्रिया

पिछले कुछ समय से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर लगातार बहस चल रही है। विपक्षी दल और कुछ सामाजिक संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं, जबकि चुनाव आयोग अपनी प्रक्रिया को नियमों के अनुरूप बता चुका है। ऐसे में पूर्व अधिकारियों द्वारा जारी यह नोटिस विवाद को और अधिक राजनीतिक तथा संवैधानिक चर्चा के केंद्र में ले आया है।

written by Siddhi Srivastava

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