
IIT Delhi suicide case : IIT दिल्ली के एक PhD स्कॉलर की शनिवार को AIIMS ट्रॉमा सेंटर में इलाज के दौरान मौत हो गई। वह 18 अगस्त से अस्पताल में भर्ती था। पुलिस के मुताबिक, 18 अगस्त को उसे दक्षिणी दिल्ली के मुनिरका गांव स्थित किराए के मकान में बेहोशी और घायल हालत में पाया गया था।
पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 108 के तहत आत्महत्या के लिए उकसाने का केस दर्ज किया है। हालांकि, पुलिस ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि FIR में किसी व्यक्ति को आरोपी बनाया गया है या नहीं।
कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था
पुलिस के अनुसार, 18 अगस्त को PhD स्कॉलर अपने किराए के कमरे में घायल और बेहोशी की हालत में मिला था। कमरे का दरवाजा अंदर से बंद था। पड़ोसियों ने दरवाजा तोड़कर उसे बाहर निकाला, जिसके बाद पुलिस ने उसे AIIMS ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया।
पुलिस के मुताबिक, वह 45 दिन से अधिक समय तक अस्पताल में इलाजरत रहा और 3 अक्टूबर को उसकी मौत हो गई। पुलिस ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के निर्देश और IIT दिल्ली के सुरक्षा अधिकारी की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज की गई है।
IIT दिल्ली कैंपस में नहीं हुई थी घटना
दक्षिण-पश्चिमी जिला पुलिस ने स्पष्ट किया कि घटना IIT दिल्ली परिसर के अंदर नहीं हुई थी। छात्र मुनिरका स्थित अपने किराए के मकान में अकेला था।
पुलिस के अनुसार, परिवार या किसी गवाह की ओर से किसी व्यक्ति पर संदेह या आरोप नहीं लगाया गया है। घटनास्थल के बाहर लगे CCTV कैमरे की फुटेज से भी छात्र के उस समय अकेले होने की बात सामने आई है।
फिलहाल पुलिस मौत की परिस्थितियों और आत्महत्या के लिए उकसाने के मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
2026 में IIT दिल्ली से जुड़ी तीसरी छात्र आत्महत्या
पुलिस के अनुसार, यह 2026 में IIT दिल्ली से जुड़े कथित आत्महत्या के मामलों में तीसरी घटना है। इससे पहले कैंपस में दो छात्रों की कथित आत्महत्या की घटनाएं सामने आई थीं।
22 अगस्त को 31 वर्षीय MSc फिजिक्स के छात्र की मौत हुई थी। उसने कथित तौर पर IIT दिल्ली के लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स की छठी मंजिल से छलांग लगाई थी।
वहीं, मार्च 2026 में 19 वर्षीय प्रथम वर्ष के BTech छात्र की कैंपस स्थित कमरे में कथित तौर पर आत्महत्या से मौत हुई थी।
ताजा मामले में पुलिस जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि PhD स्कॉलर की मौत की वास्तविक परिस्थितियां क्या थीं और आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप का आधार क्या है।



