
Pratapgarh News:प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र मांधाता को लेकर क्षेत्र में लगातार शिकायतें सामने आ रही हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि अस्पताल आने वाले लगभग 60 प्रतिशत मरीजों को डॉक्टर सरकारी दवाएं देने के बजाय बाहरी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के लिए भेज रहे हैं। यदि यह आरोप सही है तो यह गंभीर जांच का विषय है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकारी अस्पताल गरीबों के इलाज के लिए बने हैं या फिर मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर तक पहुंचाने के लिए? प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराने आने वाले अधिकांश लोग आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से होते हैं। उनके लिए बाहर से महंगी दवाएं खरीदना अतिरिक्त बोझ बन जाता है।
क्षेत्र में सोशल मीडिया पर इस मुद्दे को लेकर लगातार खबरें और शिकायतें प्रसारित हो रही हैं, लेकिन अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई प्रभावी कार्रवाई दिखाई नहीं दी है। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है और विभागीय कार्यशैली पर सवाल उठ रहे हैं।
जनता की मांग है कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराएं, अस्पताल में उपलब्ध दवाओं का स्टॉक सार्वजनिक किया जाए तथा यदि किसी स्तर पर कमीशनखोरी या बाहरी दवा लिखने की अनियमितता पाई जाए तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की जाए, ताकि गरीब मरीजों को सरकारी योजनाओं का वास्तविक लाभ मिल सके।
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रिपोर्ट -उमेश पाण्डेय जिला संवाद दाता यूनाईटेड भारत



