
Bihar MLC Election: बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में मुकाबला अब सिर्फ उम्मीदवारों के बीच नहीं, बल्कि जनता दल यूनाइटेड (JDU) के भीतर चल रहे मतभेदों को लेकर भी चर्चा में आ गया है। मोकामा से JDU विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के मौजूदा एमएलसी और प्रत्याशी नीरज कुमार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने जन सुराज के उम्मीदवार डॉ. अनुज कुमार सिंह के समर्थन का ऐलान किया था और गुरुवार को उनके नामांकन कार्यक्रम में भी शामिल हुए।
अनुज सिंह के साथ खुली जीप में निकले अनंत सिंह
डॉ. अनुज सिंह पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से जन सुराज के प्रत्याशी हैं। गुरुवार को जब वह नामांकन दाखिल करने के लिए निकले तो अनंत सिंह भी उनके साथ मौजूद रहे। दोनों एक खुली जीप में सवार होकर नामांकन के लिए रवाना हुए। इस दौरान समर्थकों की बड़ी भीड़ जुटी और नारेबाजी भी हुई।
अनंत सिंह ने अनुज सिंह के समर्थन में रोड शो किया और उनके साथ कमिश्नर कार्यालय तक पहुंचे। इस पूरे घटनाक्रम ने इसलिए ज्यादा ध्यान खींचा क्योंकि JDU ने इसी सीट से अपने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को दोबारा उम्मीदवार बनाया है। ऐसे में JDU विधायक का विपक्षी खेमे के प्रत्याशी के साथ खुले तौर पर खड़ा होना पार्टी के लिए असहज स्थिति पैदा करने वाला घटनाक्रम माना जा रहा है।
‘यह पार्टी का चुनाव नहीं’, अनंत सिंह का दावा
नामांकन के दौरान अनंत सिंह ने अपनी स्थिति को लेकर कहा कि वह जनता के भरोसे चुनावी मैदान में हैं और उन्हें अपनी जीत का पूरा विश्वास है। उन्होंने यह भी कहा कि यह किसी पार्टी का चुनाव नहीं है और इसमें पार्टी का सिंबल नहीं होता।
अनंत सिंह पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि उनका विरोध JDU से नहीं बल्कि नीरज कुमार से है। उन्होंने नीरज कुमार के साथ अपने मतभेदों को व्यक्तिगत बताया है। हालांकि, व्यवहारिक तौर पर उनका जन सुराज प्रत्याशी के पक्ष में प्रचार करना JDU के लिए राजनीतिक तौर पर महत्वपूर्ण घटनाक्रम है।
नीरज कुमार के खिलाफ क्यों हैं अनंत सिंह?
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच मतभेद कोई नया मामला नहीं है। MLC चुनाव में उम्मीदवारों के नाम सामने आने के बाद दोनों नेताओं के बीच राजनीतिक दूरी खुलकर सामने आई। अनंत सिंह ने 28 सितंबर को ही अनुज सिंह के समर्थन की घोषणा कर दी थी और कहा था कि वह उनके लिए पूरे पटना स्नातक क्षेत्र में प्रचार करेंगे।
JDU की ओर से नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद भी अनंत सिंह ने अपना रुख नहीं बदला। रिपोर्टों के मुताबिक, पार्टी के प्रदेश नेतृत्व ने दोनों नेताओं के बीच सुलह कराने की कोशिश भी की, लेकिन मामला पूरी तरह शांत नहीं हुआ।
मामला JDU नेतृत्व तक पहुंचा
अनंत सिंह के खुले तौर पर जन सुराज प्रत्याशी का समर्थन करने के बाद यह विवाद पार्टी के शीर्ष नेतृत्व तक पहुंच गया है। JDU नेताओं की ओर से कहा गया है कि पार्टी नेतृत्व को पूरे घटनाक्रम की जानकारी है और मामले का समाधान उचित समय पर किया जाएगा। JDU प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने पार्टी की प्राथमिकता सभी आठ NDA उम्मीदवारों की जीत सुनिश्चित करना बताया है।
PTI की रिपोर्ट के मुताबिक, JDU के राष्ट्रीय सचिव ने भी कहा है कि पार्टी अध्यक्ष को घटनाक्रम की जानकारी दे दी गई है और आगे उचित कदम उठाए जाएंगे। हालांकि, अभी तक अनंत सिंह के खिलाफ किसी अनुशासनात्मक कार्रवाई की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
50 हजार रसगुल्ले भी चर्चा में
अनुज सिंह के नामांकन कार्यक्रम के साथ अनंत सिंह के यहां तैयार कराए गए 50 हजार रसगुल्ले भी चर्चा का विषय बने हुए हैं। कई रिपोर्टों में समर्थकों और नामांकन में शामिल लोगों के लिए बड़ी संख्या में रसगुल्ले तैयार कराने की बात कही गई है।
नामांकन के दौरान समर्थकों की भीड़ और रोड शो के कारण पटना में अनंत सिंह के शक्ति प्रदर्शन की भी चर्चा हुई। हालांकि, इस भीड़ को चुनावी समर्थन का अंतिम संकेत मानना उचित नहीं होगा, क्योंकि विधान परिषद की स्नातक सीट का चुनाव सामान्य विधानसभा चुनाव से अलग मतदाता समूह के बीच होता है।
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कब होगा MLC चुनाव?
बिहार विधान परिषद की स्नातक और शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित हो चुका है। इन सीटों पर 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है, जबकि मतगणना 27 अक्टूबर को होगी। पटना स्नातक सीट पर JDU के नीरज कुमार और जन सुराज के डॉ. अनुज कुमार सिंह के बीच मुकाबले पर अब खास नजर है।
अनंत सिंह के अनुज सिंह के समर्थन में खुलकर उतरने से पटना स्नातक सीट का मुकाबला और चर्चा में आ गया है। फिलहाल इसे JDU से उनकी औपचारिक बगावत कहना जल्दबाजी होगी, क्योंकि अनंत सिंह खुद अपने विरोध को पार्टी के बजाय नीरज कुमार के खिलाफ व्यक्तिगत मतभेद के रूप में बताते रहे हैं। अब देखना होगा कि पार्टी नेतृत्व इस घटनाक्रम पर क्या कदम उठाता है और चुनाव के दौरान अनंत सिंह का प्रचार कितना प्रभाव डालता है।



