
Donald Trump: मध्य पूर्व में जारी तनाव को कम करने की कोशिशों के बीच अमेरिका और ईरान के बीच नया कूटनीतिक विवाद सामने आया है। ईरान की ओर से पेश किए गए युद्धविराम प्रस्ताव को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया है। इस फैसले के बाद दोनों देशों के बीच शांति वार्ता को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।
अमेरिका के संयुक्त राष्ट्र राजदूत माइक वॉल्ट्ज ने कहा कि तेहरान ने बातचीत शुरू होने से पहले ही कई ऐसी शर्तें रख दीं, जिन्हें वॉशिंगटन स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था। उनके मुताबिक, ईरान ने प्रतिबंधों में राहत, समुद्री नाकाबंदी हटाने और अन्य रियायतों की मांग की थी।
अमेरिका ने क्यों जताई आपत्ति?
माइक वॉल्ट्ज का कहना है कि अमेरिका किसी भी समझौते से पहले भरोसेमंद और व्यावहारिक ढांचा चाहता है। उन्होंने दावा किया कि ईरान की ओर से रखी गई मांगें ऐसी थीं, जिनसे वार्ता शुरू होने से पहले ही अमेरिका पर दबाव बनता।
वॉल्ट्ज ने यह भी कहा कि अमेरिकी प्रशासन को इस बात पर संदेह है कि ईरान भविष्य में समझौते की शर्तों का पूरी तरह पालन करेगा या नहीं। इसी वजह से प्रस्ताव को मौजूदा स्वरूप में स्वीकार नहीं किया गया।
ईरान की प्रमुख मांगें क्या थीं?
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के मंच से युद्धविराम का प्रस्ताव रखा था। इसमें ईरान की जमी हुई संपत्तियों को जारी करने, तेल निर्यात पर लगे प्रतिबंधों में ढील देने और अमेरिकी नौसैनिक दबाव कम करने जैसी मांगें शामिल थीं।
इसके अलावा ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा की इच्छा जताई। यह समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है।
तेहरान ने आरोपों को बताया निराधार
अमेरिकी पक्ष की प्रतिक्रिया के बाद ईरान ने भी अपना पक्ष रखा। विदेश मंत्री अराघची ने कहा कि उनकी सरकार कोई असाधारण रियायत नहीं मांग रही, बल्कि उन अधिकारों की बात कर रही है जिन्हें वह वैध मानती है।
उन्होंने कहा कि कूटनीतिक समाधान का रास्ता अभी पूरी तरह बंद नहीं हुआ है, लेकिन पिछले अनुभवों ने दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी पैदा की है।
बातचीत की उम्मीद अब भी बरकरार
हालांकि ट्रंप प्रशासन ने मौजूदा प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ने संकेत दिए हैं कि आने वाले दिनों में फिर से संवाद की कोशिश हो सकती है। मीडिया रिपोर्टों में भी दावा किया गया है कि दोनों देशों के बीच अप्रत्यक्ष संपर्क जारी है और नई बातचीत की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
फिलहाल युद्धविराम पर सहमति नहीं बन सकी है, लेकिन कूटनीतिक प्रयास जारी रहने के संकेत मिल रहे हैं। ऐसे में दुनिया की नजर अब इस बात पर टिकी है कि क्या दोनों पक्ष किसी साझा रास्ते तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
written by Siddhi Srivastava



