सौरव दास ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर पोस्ट करते हुए दावा किया कि सरकार ने हजारों प्राथमिक विद्यालयों को स्मार्ट स्कूल बनाने की घोषणा की है, लेकिन इसके लिए आवंटित बजट पर्याप्त नहीं दिखाई देता। उन्होंने कहा कि योजना के पैमाने और वित्तीय प्रावधानों के बीच अंतर को स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सोशल मीडिया पोस्ट से शुरू हुई चर्चा
CJP का कहना है कि उसने सरकारी स्कूलों की जमीनी स्थिति जानने के लिए सोशल ऑडिट अभियान शुरू किया है। इसी दौरान सौरव दास ने दावा किया कि अभियान शुरू होने के कुछ घंटों बाद ही राज्य सरकार ने स्मार्ट स्कूलों को लेकर बड़ा फैसला लिया।
उनके अनुसार, यदि बड़ी संख्या में स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करना है तो उसके अनुरूप बजट का भी प्रावधान होना चाहिए। उन्होंने प्रति विद्यालय खर्च को लेकर भी सवाल खड़े किए।
सरकारी स्कूलों का निरीक्षण कर रही CJP
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत CJP की टीम विभिन्न जिलों के सरकारी विद्यालयों का दौरा कर रही है। संगठन का कहना है कि स्कूल भवन, पेयजल, शौचालय, कक्षाओं और अन्य मूलभूत सुविधाओं की स्थिति का आकलन किया जा रहा है।
हाल के दिनों में नोएडा के कुछ सरकारी स्कूलों का निरीक्षण भी किया गया। इसके बाद संगठन ने युवाओं से अपने आसपास के स्कूलों की स्थिति की जानकारी साझा करने की अपील की।
स्कूल बंद होने के दावे पर विभाग का जवाब
इस अभियान के दौरान सौरव दास ने गौतम बुद्ध नगर के सरकारी स्कूलों को लेकर भी एक दावा किया था। हालांकि, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी राहुल पंवार ने उस दावे को खारिज करते हुए कहा कि सभी परिषदीय विद्यालय निर्धारित समय के अनुसार संचालित हो रहे हैं और स्कूल बंद करने का कोई आदेश जारी नहीं किया गया है।
शिक्षा को लेकर बढ़ी चर्चा
सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता, सुविधाओं और बजट को लेकर बहस लगातार तेज हो रही है। एक ओर CJP शिक्षा व्यवस्था की जमीनी तस्वीर सामने लाने की बात कर रही है, वहीं शिक्षा विभाग अपने स्तर पर व्यवस्थाओं को बेहतर बनाने का दावा कर रहा है। ऐसे में स्मार्ट स्कूल योजना और उससे जुड़े बजट को लेकर आगे भी चर्चा जारी रहने की संभावना है।