Politics : कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की सुगबुगाहट के बीच राहुल गांधी ने सचिवों से की मुलाकात

Politics : कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाओं के बीच राहुल गांधी ने पार्टी सचिवों से बैठक की। राज्यों के दौरे, जिम्मेदारियों और 56 सचिवों की भूमिका को लेकर क्या हुआ, जानें पूरी खबर।

Politics : कांग्रेस में संगठनात्मक फेरबदल की चर्चाओं के बीच लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने मंगलवार को पार्टी के सचिवों के साथ बैठक की। इस दौरान उन्होंने सचिवों के कामकाज, राज्यों में उनकी सक्रियता और संगठन से जुड़ी चुनौतियों के बारे में जानकारी ली।

पार्टी से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, बैठक का उद्देश्य मध्य स्तर के इन नेताओं के प्रदर्शन, प्रतिबद्धता और संगठन के प्रति उनकी सक्रियता का आकलन करना था। बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल और प्रियंका गांधी वाड्रा भी मौजूद रहीं।

कांग्रेस में फेरबदल के अगले चरण की तैयारी

यह बैठक पिछले महीने संभावित नए सचिवों के चयन के लिए राहुल गांधी द्वारा किए गए साक्षात्कारों के कुछ सप्ताह बाद हुई है। कांग्रेस में संगठनात्मक बदलाव के तहत महासचिवों और प्रभारियों में कुछ परिवर्तन पहले ही किए जा चुके हैं।

अब फेरबदल के अगले चरण में महासचिवों के अधीन काम करने वाले पार्टी के 56 सचिवों की जिम्मेदारियों और भूमिकाओं में बदलाव किए जाने की संभावना है।

सचिवों से राज्यों में ज्यादा समय देने को कहा

बैठक में राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने सचिवों से उनके राज्यों के दौरे और जमीनी स्तर पर किए जा रहे काम के बारे में सवाल किए। राहुल गांधी ने नेताओं को कम से कम 15 दिन अपने-अपने राज्यों में बिताने, कार्यकर्ताओं से मिलने और जनता के बीच सक्रिय रहने की सलाह दी।

सूत्रों के अनुसार, नेताओं से यह भी पूछा गया कि वे संगठन को मजबूत करने के लिए किस तरह काम कर रहे हैं और उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है।

जिम्मेदारियों को लेकर सचिवों में असंतोष

कुछ सचिवों ने संगठन में अपनी भूमिका स्पष्ट नहीं होने और पर्याप्त अवसर नहीं मिलने की शिकायत की। एक नेता के मुताबिक, कई सचिवों ने चुनावी राज्यों और गैर-चुनावी राज्यों में स्पष्ट जिम्मेदारियां तय किए जाने की मांग की।

कुछ नेताओं ने ‘संगठन सृजन’ अभियान के दौरान भी सचिवों की सीमित भूमिका का मुद्दा उठाया। उनका आरोप था कि जिला समितियों के गठन में मुख्य भूमिका प्रभारियों और पर्यवेक्षकों की रही, जबकि सचिवों को निर्णय प्रक्रिया में पर्याप्त स्थान नहीं मिला।

एक सचिव ने कहा कि कांग्रेस में व्यवस्था काफी हद तक ‘प्रभारी-केंद्रित’ है और सचिवों से नियमित फीडबैक लेने या उन्हें निर्णय प्रक्रिया में शामिल करने की व्यवस्था कमजोर है।

राहुल गांधी के करीबी नेता ने आरोपों को खारिज किया

हालांकि, राहुल गांधी के करीबी माने जाने वाले एक नेता ने इन शिकायतों को खारिज करते हुए बैठक को नियमित संगठनात्मक संवाद बताया। उन्होंने कहा कि पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के लिए लगातार नेताओं से बातचीत करता है।

उनके मुताबिक, अवसर व्यक्ति की क्षमता और संगठन में उसके योगदान पर भी निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी और केसी वेणुगोपाल को यह जानकारी रहती है कि कौन-सा नेता कितने दिन राज्यों में रहा और किस क्षेत्र में काम कर रहा है।

हाल में कई महासचिवों के प्रभार बदले गए

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पिछले सप्ताह महासचिव भूपेश बघेल को चुनावी राज्य पंजाब से हटाकर असम की जिम्मेदारी दी थी। वहीं, कर्नाटक के महासचिव रणदीप सुरजेवाला को गुजरात का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है, जहां अगले वर्ष विधानसभा चुनाव होने हैं।

पार्टी ने तीन प्रभारियों को हटाकर पंजाब की जिम्मेदारी पूर्व राजस्थान उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट को दी है। इन बदलावों के बाद अब सचिव स्तर पर संभावित फेरबदल को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है।

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