BRICS Summit 2026 : 7 साल बाद भारत आएंगे शी जिनपिंग, मोदी से होगी अहम मुलाकात; LAC पर शांति और रिश्ते सुधारने पर नजर

BRICS Summit 2026 : शी जिनपिंग 12-13 सितंबर को भारत यात्रा पर आएंगे। मोदी-शी बैठक में भारत-चीन संबंध, LAC पर शांति, सीमा विवाद और द्विपक्षीय सहयोग पर चर्चा की उम्मीद है।

BRICS Summit 2026 : चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सात साल बाद भारत की यात्रा पर आ रहे हैं। चीन के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को आधिकारिक तौर पर पुष्टि की कि शी जिनपिंग 12 और 13 सितंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निमंत्रण पर भारत आएंगे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच द्विपक्षीय बैठक होगी, जिसमें भारत-चीन संबंधों को सामान्य बनाने, सीमा विवाद और LAC पर शांति बनाए रखने** जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।

शी जिनपिंग की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब भारत और चीन पिछले कुछ समय से सीमा पर तनाव कम करने और द्विपक्षीय संबंधों को पटरी पर लाने की दिशा में लगातार बातचीत कर रहे हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान होने वाली मोदी-शी बैठक को इसी प्रक्रिया के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

7 साल बाद भारत की यात्रा पर शी जिनपिंग

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग की भारत में आखिरी मुलाकात अक्टूबर 2019 में तमिलनाडु के महाबलीपुरम में हुई थी। दोनों नेताओं के बीच दूसरा अनौपचारिक शिखर सम्मेलन हुआ था। इसके कुछ ही महीनों बाद लद्दाख में भारत और चीन की सेनाओं के बीच गंभीर सैन्य गतिरोध शुरू हो गया।

लद्दाख सीमा विवाद के कारण दोनों देशों के रिश्तों में लंबे समय तक तनाव बना रहा। सैन्य और कूटनीतिक स्तर पर कई दौर की बातचीत के बाद हाल के वर्षों में दोनों पक्षों ने संबंधों को धीरे-धीरे सामान्य करने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।

मोदी-शी बैठक में किन मुद्दों पर होगी चर्चा?

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान मोदी और शी जिनपिंग के बीच होने वाली बैठक में कई अहम मुद्दे उठ सकते हैं। इनमें प्रमुख रूप से LAC पर शांति और स्थिरता, भारत-चीन सीमा विवाद का समाधान, सीमा प्रबंधन और सैन्य तनाव कम करने के उपाय, द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध, सीधी उड़ानों को बढ़ावा देना, कैलाश मानसरोवर यात्रा और लोगों के बीच संपर्क, भारतीय कारोबारियों से जुड़ी वीजा पाबंदियां, महत्वपूर्ण तकनीक और उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध।

शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी की रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्राबोवो सुबियांतो और संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस समेत कई नेताओं से भी मुलाकात प्रस्तावित है।

सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश

भारत और चीन के बीच सीमा से जुड़े मुद्दों पर बातचीत के लिए वर्किंग मैकेनिज्म फॉर कंसल्टेशन एंड कोऑर्डिनेशन (WMCC) और विशेष प्रतिनिधि स्तर की वार्ता जारी है।

भारत की ओर से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीन की ओर से विदेश मंत्री वांग यी सीमा संबंधी मुद्दों पर विशेष प्रतिनिधि स्तर की बातचीत का हिस्सा रहे हैं।

25 अगस्त को बीजिंग में विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता का 25वां दौर हुआ। इसमें सीमा निर्धारण और सीमा प्रबंधन से जुड़े मामलों में बातचीत को आगे बढ़ाने तथा जल्द और ठोस परिणाम हासिल करने पर जोर दिया गया।

इसके अलावा, हाल ही में अरुणाचल प्रदेश सेक्टर में भारत और चीन के वरिष्ठ सैन्य कमांडरों के बीच भी सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखने को लेकर बातचीत हुई।

रिश्ते सामान्य करने के लिए उठाए गए कई कदम

अक्टूबर 2024 में मोदी और शी की मुलाकात के बाद दोनों देशों के बीच संबंधों को सामान्य करने की प्रक्रिया में कुछ महत्वपूर्ण प्रगति हुई है।

दोनों पक्षों ने सीधी हवाई सेवाएं बहाल करने, कैलाश मानसरोवर यात्रा फिर से शुरू करने और निर्धारित मार्गों से सीमा व्यापार दोबारा शुरू करने जैसे कदम उठाए हैं।

इन पहलों को दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है।

कई मुद्दों पर अब भी मतभेद

हालांकि भारत और चीन के संबंधों में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर दोनों देशों के बीच मतभेद अभी भी कायम हैं।

भारतीय कारोबारियों के लिए चीन की वीजा पाबंदियां, महत्वपूर्ण तकनीक और उपकरणों के निर्यात पर प्रतिबंध तथा सीमा विवाद को आर्थिक एवं विकास संबंधी मुद्दों से अलग रखने को लेकर चीन का रुख प्रमुख विवादित विषयों में शामिल है।

ऐसे में शी जिनपिंग की भारत यात्रा और प्रधानमंत्री मोदी के साथ उनकी बैठक को भारत-चीन संबंधों में आगे की दिशा तय करने वाली अहम कड़ी माना जा रहा है। खास तौर पर LAC पर स्थायी शांति और सीमा विवाद के समाधान की दिशा में दोनों देशों के रुख पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी।

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