Delhi PG Accident: दिल्ली PG हादसे के बाद एक्शन में MCD, राजधानी की सभी इमारतों की होगी जांच; 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

Delhi PG Accident: सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के बाद MCD ने दिल्ली की इमारतों की जांच के आदेश दिए हैं। 10 सितंबर तक रिपोर्ट मांगी गई है, सुप्रीम कोर्ट भी इसी दिन सुनवाई करेगा।

Delhi PG Accident: दिल्ली के सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के हादसे के बाद नगर निगम (MCD) ने राजधानी की इमारतों की जांच के आदेश दिए हैं। MCD ने सभी जोन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियरों (बिल्डिंग) को अपने-अपने क्षेत्र में इमारतों का निरीक्षण कर 10 सितंबर तक रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

सत्य निकेतन में रविवार को हुए इस हादसे में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 6 लोग घायल हुए। करीब 28 घंटे तक चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद मलबे से लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे के बाद प्रशासन ने इमारतों की सुरक्षा को लेकर व्यापक जांच शुरू कर दी है।

सुप्रीम कोर्ट 10 सितंबर को करेगा सुनवाई

दिल्ली के बिल्डिंग हादसे का मामला अब सुप्रीम कोर्ट भी पहुंच गया है। कोर्ट ने कहा है कि वह 10 सितंबर को मामले की सुनवाई करेगा। जरूरत पड़ने पर केस को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट में ट्रांसफर किया जा सकता है।

वहीं, MCD की ओर से की जा रही जांच से जुटाई गई जानकारी को दिल्ली हाईकोर्ट में दाखिल किए जाने वाले हलफनामे में शामिल किया जाएगा। इस मामले में हाईकोर्ट में अगली सुनवाई 25 सितंबर को प्रस्तावित है।

27.84 लाख इमारतों का हुआ था सर्वे

MCD के मुताबिक, इस साल की शुरुआत में दिल्ली में 27 लाख 84 हजार 286 इमारतों का सर्वे किया गया था। इनमें से केवल 19 इमारतों को खतरनाक पाया गया था। सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी की इमारतों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर सवाल उठ रहे हैं।

हादसे को लेकर NSUI का विरोध प्रदर्शन

सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी के कुलपति के एक कार्यक्रम में NSUI कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। NSUI ने कुलपति पर छात्रों की सुरक्षा और हादसे से प्रभावित परिवारों के प्रति संवेदनहीनता का आरोप लगाया।

प्रदर्शनकारी छात्रों ने मामले की जिम्मेदारी तय करने और कुलपति के इस्तीफे की मांग की। छात्रों ने सवाल उठाया कि हादसे में कई लोगों की जान जाने के बाद इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा।

बिल्डिंग मालिक दंपती समेत 3 गिरफ्तार

सत्य निकेतन बिल्डिंग हादसे के मामले में पुलिस ने संपत्ति मालिक उर्मिला गुप्ता, उनके पति हरिराम गुप्ता और बेटे महेश गुप्ता को गिरफ्तार किया है।

पुलिस के मुताबिक, संपत्ति उर्मिला गुप्ता के नाम पर पंजीकृत है, जबकि इसके प्रबंधन और संचालन की जिम्मेदारी उनके पति और बेटे के पास थी।

तीनों आरोपियों को पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने हरिराम और उर्मिला को 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया, जबकि महेश को 2 दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है।

पुलिस अब PG संचालकों और लेबर कॉन्ट्रैक्टर की भूमिका की भी जांच कर रही है। उनकी गिरफ्तारी के लिए तलाश जारी है।

28 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन

सत्य निकेतन में पांच मंजिला इमारत गिरने के बाद NDRF समेत अन्य बचाव दलों ने करीब 28 घंटे तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया। मलबे से कुल 12 लोगों को बाहर निकाला गया। हादसे में 7 लोगों की मौत हुई, जबकि 3 घायलों की हालत गंभीर बताई गई।

मृतकों में अभिषेक कुमार, अर्पित जाज, युवराज सोनी, पवन कुमार, सुरेंद्र सिंह, अक्षत सिंह और परम लाल कोरी शामिल हैं।

MCD ने साउथ जोन के 5 अधिकारियों को किया सस्पेंड

हादसे के बाद MCD ने साउथ जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार को निलंबित कर दिया। उनके साथ चार इंजीनियरिंग अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई पूरी होने तक निलंबन की कार्रवाई की गई है।

इसके बाद IAS अधिकारी शाश्वत सौरभ को MCD के साउथ जोन का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। वह वर्तमान में साउथ वेस्ट जोन के डिप्टी कमिश्नर के पद पर तैनात हैं।

सत्य निकेतन में 300 मकान, करीब 170 में PG

सत्य निकेतन इलाके में करीब 300 मकान हैं, जिनमें लगभग 170 मकानों में PG संचालित होने की जानकारी सामने आई है। यह इलाका मूल रूप से झुग्गीवासियों के पुनर्वास के लिए 1960 के दशक के मध्य में विकसित किया गया था। बाद में दिल्ली यूनिवर्सिटी के साउथ कैंपस और आसपास के कॉलेजों के विस्तार के साथ यहां छात्रों की संख्या बढ़ती गई।

अर्बन प्लानिंग एक्सपर्ट जगदीश ममगैन के मुताबिक, दिल्ली की कई पुरानी इमारतों को अतिरिक्त मंजिलों का भार उठाने के हिसाब से डिजाइन नहीं किया गया था। उनका दावा है कि दिल्ली में करीब 75 लाख घरों में से केवल 1.75 लाख इमारतों के पास स्वीकृत बिल्डिंग लेआउट प्लान हैं।

सत्य निकेतन हादसे के बाद राजधानी में पुरानी और बहुमंजिला इमारतों की सुरक्षा को लेकर MCD की जांच अहम मानी जा रही है। अब 10 सितंबर तक आने वाली रिपोर्ट से यह साफ होने की उम्मीद है कि दिल्ली में कितनी इमारतें सुरक्षा मानकों पर खरी उतरती हैं।

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