
GDP Growth : भारत की अर्थव्यवस्था में वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही के दौरान 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि दर्ज किए जाने के बाद राजनीतिक और आर्थिक बहस तेज हो गई है। GDP के आंकड़ों की गणना और पिछले वर्ष के आंकड़ों में बदलाव को लेकर विपक्ष तथा कुछ अर्थशास्त्रियों ने सवाल उठाए हैं। इस बीच केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने आलोचकों और विपक्ष पर तीखा हमला बोला है।
पीयूष गोयल ने कहा कि कुछ लोग खुद को अर्थशास्त्री बताकर टीवी चैनलों पर देश की आर्थिक छवि को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने लोगों से ऐसे दावों से भ्रमित नहीं होने की अपील की।
GDP के आंकड़ों पर क्यों उठा विवाद?
सरकार के अनुसार, अप्रैल-जून 2026 यानी वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में भारत की GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस आर्थिक प्रदर्शन की सराहना की।
हालांकि, पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने GDP के पिछले वर्ष के आंकड़ों में बदलाव को लेकर सवाल उठाए। उनका तर्क था कि वर्तमान कीमतों पर पिछले वर्ष की पहली तिमाही के GDP आंकड़ों में संशोधन के कारण नई वृद्धि दर अधिक प्रभावशाली दिखाई दे रही है।
गर्ग के इस तर्क को विपक्ष ने भी मुद्दा बनाया और केंद्र सरकार से GDP आंकड़ों की गणना और संशोधित आधार के संबंध में सवाल उठाए।
पीयूष गोयल का विपक्ष पर हमला
GDP को लेकर जारी बहस के बीच पीयूष गोयल ने विपक्ष और आलोचकों को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि सरकार के मंत्री अपनी इच्छा से आर्थिक आंकड़े तैयार नहीं करते हैं और नकारात्मक सोच रखने वाले लोग देश की उपलब्धियों को कमतर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं।
गोयल ने कहा कि 7.8 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि भारत की क्षमता, मेहनत और देशवासियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उनके अनुसार भारत तेजी से एक वैश्विक स्तर पर भरोसेमंद आर्थिक साझेदार के रूप में उभर रहा है।
उन्होंने विपक्षी नेताओं पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कुछ लोग भारत की अर्थव्यवस्था को कमजोर दिखाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में तेजी से आगे बढ़ता रहेगा।
MoSPI ने GDP आंकड़ों पर सरकार का पक्ष रखा
GDP के पिछले वर्ष के आंकड़ों में बदलाव को लेकर उठे सवालों पर सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) ने भी स्पष्टीकरण दिया है।
मंत्रालय ने उन दावों को खारिज किया कि पिछले वर्ष के GDP आंकड़े को इस उद्देश्य से कम किया गया ताकि मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही की वृद्धि दर अधिक दिखाई दे।
MoSPI के अनुसार, GDP अनुमानों में बदलाव नए आधार वर्ष, बेहतर डेटा स्रोतों और संशोधित कार्यप्रणाली के कारण हुआ है।
मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही का GDP अनुमान अगस्त 2025 में पुराने 2011-12 आधार वर्ष के आधार पर लगभग 86.05 लाख करोड़ रुपये था। बाद में फरवरी 2026 में नई 2022-23 आधार वर्ष श्रृंखला लागू होने के बाद इसमें संशोधन कर लगभग 80.32 लाख करोड़ रुपये किया गया।
मंत्रालय का कहना है कि यह बदलाव केवल मौजूदा वित्त वर्ष की GDP वृद्धि दर को अधिक दिखाने के लिए किया गया संशोधन नहीं है, बल्कि GDP श्रृंखला में डेटा और कार्यप्रणाली से जुड़े क्रमिक बदलावों का परिणाम है।
भारत की 7.8 फीसदी GDP ग्रोथ पर राजनीतिक बहस तेज
भारत की पहली तिमाही की 7.8 प्रतिशत GDP वृद्धि ने जहां सरकार को आर्थिक प्रदर्शन के मुद्दे पर विपक्ष के खिलाफ आक्रामक होने का अवसर दिया है, वहीं विपक्ष और कुछ आलोचक आंकड़ों की तुलना और संशोधित आधार वर्ष को लेकर सवाल उठा रहे हैं।
आने वाले दिनों में यह बहस केवल GDP की वृद्धि दर तक सीमित नहीं रहने वाली है, बल्कि भारत की आर्थिक नीतियों, डेटा की विश्वसनीयता और विकास के वास्तविक प्रभाव को लेकर राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बन सकती है।



