OBC Creamy Layer: OBC क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई 17 सितंबर को, CSE-2025 के 958 उम्मीदवारों पर टिकी नजर

OBC Creamy Layer: OBC क्रीमी लेयर मामले में सुप्रीम कोर्ट 17 सितंबर को सुनवाई करेगा। केंद्र ने CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन पुराने नियमों से करने की अनुमति मांगी है।

OBC Creamy Layer: OBC क्रीमी लेयर के निर्धारण से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार की याचिका पर सुनवाई के लिए 17 सितंबर की तारीख तय की है। जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आर. महादेवन की बेंच ने केंद्र की याचिका पर नोटिस जारी करते हुए सभी पक्षों से 17 सितंबर तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट से सिविल सर्विस परीक्षा (CSE) 2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर मानदंड के आधार पर पूरी करने की अनुमति मांगी है। सरकार का कहना है कि 11 मार्च के फैसले को CSE-2025 पर लागू करने से कई व्यावहारिक और कानूनी समस्याएं पैदा हो सकती हैं।

केंद्र ने क्या दलील दी?

केंद्र की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि CSE-2025 की प्रक्रिया 11 मार्च के सुप्रीम कोर्ट के फैसले से पहले शुरू हो चुकी थी। परीक्षा का नोटिफिकेशन 22 जनवरी 2025 को जारी हुआ था। प्रीलिम्स 25 मई 2025 को हुई, जबकि मेन्स परीक्षा 22 से 31 अगस्त 2025 के बीच आयोजित की गई थी।

केंद्र के मुताबिक, 6 मार्च 2026 को 958 उम्मीदवारों का परिणाम घोषित हुआ। इसके ठीक पांच दिन बाद 11 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने OBC क्रीमी लेयर की पहचान से जुड़े मामले में फैसला सुनाया।

सरकार का तर्क है कि यदि इस फैसले को पिछली तारीख से CSE-2025 पर लागू किया जाता है तो उन उम्मीदवारों के साथ अलग स्थिति पैदा हो सकती है, जिन्होंने उस समय लागू पुराने नियमों के आधार पर परीक्षा दी थी।

सिर्फ माता-पिता की आय से तय नहीं हो OBC क्रीमी लेयर

केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट के सामने कहा कि किसी उम्मीदवार को OBC क्रीमी लेयर में शामिल करने का फैसला केवल माता-पिता की सैलरी या आय के आधार पर नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए माता-पिता के पद, उनकी सामाजिक स्थिति, आय और संपत्ति समेत अन्य पहलुओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है।

यह विवाद सुप्रीम कोर्ट के ‘यूनियन ऑफ इंडिया बनाम रोहित नाथन’ मामले में 11 मार्च को दिए गए फैसले से जुड़ा है। कोर्ट ने कहा था कि 14 अक्टूबर 2004 का स्पष्टीकरण पत्र 8 सितंबर 1993 के ऑफिस मेमोरेंडम में बदलाव नहीं कर सकता।

OBC उम्मीदवारों को उम्र और अटेम्प्ट का नुकसान होने की आशंका

केंद्र ने अपनी याचिका में यह भी बताया कि पुराने नियमों के आधार पर कुछ उम्मीदवार खुद को OBC-NCL श्रेणी के लिए पात्र नहीं मानते रहे होंगे। खासकर ऐसे उम्मीदवार, जिनके माता-पिता PSU या निजी क्षेत्र में कार्यरत थे और जिनकी आय निर्धारित सीमा से अधिक थी।

ऐसे उम्मीदवारों ने संभव है कि जनरल कैटेगरी से परीक्षा दी हो या OBC-NCL के तहत आवेदन ही नहीं किया हो। इस वजह से उन्हें OBC उम्मीदवारों को मिलने वाली तीन साल की उम्र सीमा में छूट और अतिरिक्त प्रयास का लाभ नहीं मिला होगा।

वहीं, जिन उम्मीदवारों ने OBC-NCL के तहत आवेदन किया है, उनमें से कुछ नए नियमों की व्याख्या के आधार पर क्रीमी लेयर की श्रेणी में आ सकते हैं। केंद्र का कहना है कि इससे पुराने नियमों पर भरोसा करके परीक्षा देने वाले उम्मीदवारों के साथ असमानता की स्थिति बन सकती है।

दोबारा जांच से पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने का खतरा

सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि नए फैसले को लागू करने पर कई उम्मीदवारों के माता-पिता की नौकरी, पद और अन्य पात्रता मानकों की दोबारा जांच करनी पड़ सकती है।

यदि यह जांच उन उम्मीदवारों तक भी पहुंचती है, जिन्होंने OBC-NCL के तहत आवेदन नहीं किया था, तो उनकी कैटेगरी, उम्र में छूट और अतिरिक्त प्रयास जैसे मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। केंद्र के अनुसार इससे CSE-2025 की पूरी प्रक्रिया प्रभावित होने की आशंका है।

सर्विस अलोकेशन में देरी से ट्रेनिंग पर असर

केंद्र ने कहा कि 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया में देरी होने से उनकी आगे की ट्रेनिंग प्रभावित हो सकती है। मसूरी स्थित LBSNAA में फाउंडेशन कोर्स और अन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम निर्धारित समय के अनुसार होने हैं।

सरकार के मुताबिक, सर्विस अलोकेशन में देरी का असर IAS और IPS कैडर के साथ-साथ वरिष्ठता, वेतन और अन्य सेवाओं की ट्रेनिंग पर भी पड़ सकता है।

इसी वजह से केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से CSE-2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों की सर्विस अलोकेशन प्रक्रिया पुराने OBC क्रीमी लेयर मानदंड के आधार पर पूरी करने की अनुमति मांगी है। अब इस मामले में अगली सुनवाई 17 सितंबर को होगी।

Show More

Related Articles

Back to top button