
Politics: अमित शाह को लेकर कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की कथित टिप्पणी ने हिमाचल प्रदेश की सियासत में नया विवाद खड़ा कर दिया है। भाजपा ने खेड़ा के बयान को राजनीतिक मर्यादा के खिलाफ बताते हुए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है। सोमवार को भाजपा के प्रतिनिधिमंडल ने शिमला के पुलिस अधीक्षक को संबोधित शिकायत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक को सौंपी।
भाजपा का आरोप है कि पवन खेड़ा ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लिए कथित तौर पर आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया। पार्टी ने पुलिस से पूरे मामले की जांच करने, बयान की मूल रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की पड़ताल करने की मांग की है।
पवन खेड़ा पर भाजपा ने क्या आरोप लगाए?
भाजपा के मुख्य प्रवक्ता और विधायक राकेश जम्वाल ने आरोप लगाया कि पवन खेड़ा ने अमित शाह को लेकर कथित तौर पर ‘बौना’, ‘भगोड़ा’ और ‘तड़ीपार’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया। भाजपा का कहना है कि खेड़ा ने अमित शाह की ‘औकात’ को लेकर भी टिप्पणी की।
भाजपा ने इन कथित बयानों को राजनीतिक आलोचना से आगे का मामला बताते हुए आपत्ति जताई है। हालांकि, शिकायत में लगाए गए आरोपों की कानूनी स्थिति पुलिस की जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।
भाजपा ने पुलिस से क्या मांग की?
भाजपा ने शिमला पुलिस से मांग की है कि पवन खेड़ा के कथित बयान की पूरी पृष्ठभूमि और संदर्भ की जांच की जाए। पार्टी संबंधित वीडियो, सोशल मीडिया पोस्ट और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य पुलिस को उपलब्ध कराने की बात भी कह रही है।
भाजपा ने कथित बयान की मूल और बिना संपादन वाली वीडियो-ऑडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रखने की मांग की है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि बयान किस संदर्भ में दिया गया था और उसमें वास्तव में क्या कहा गया।
क्या सीधे FIR दर्ज करने की मांग है?
भाजपा की शिकायत में मामले की जांच भारतीय न्याय संहिता और लागू कानूनी प्रावधानों के तहत करने की मांग की गई है। पार्टी का कहना है कि यदि जांच के दौरान संज्ञेय अपराध के तत्व सामने आते हैं तो पवन खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज कर उचित कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
यानी भाजपा ने पुलिस से पहले शिकायत और उपलब्ध साक्ष्यों की जांच करने की मांग की है। इसके बाद पुलिस यह तय करेगी कि मामले में FIR या अन्य कानूनी कार्रवाई का आधार बनता है या नहीं।
भाजपा ने राजनीतिक मर्यादा का मुद्दा उठाया
राकेश जम्वाल ने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक असहमति और नेताओं की आलोचना स्वाभाविक है, लेकिन व्यक्तिगत और कथित अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल स्वीकार नहीं किया जा सकता। भाजपा का कहना है कि केंद्रीय गृह मंत्री जैसे महत्वपूर्ण संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के खिलाफ इस तरह की कथित टिप्पणी राजनीतिक संवाद की गरिमा को प्रभावित करती है।
फिलहाल पूरे मामले में पुलिस की जांच और आगे की कार्रवाई पर नजर है। यदि जांच में आरोपों के अनुरूप कोई संज्ञेय अपराध सामने आता है, तो पवन खेड़ा के खिलाफ FIR दर्ज हो सकती है।



