Politics : ‘शिक्षा-रोजगार और संपत्ति पर बराबर अधिकार जरूरी’, राहुल गांधी बोले- महिलाओं के खिलाफ तीन तरह की हिंसा

Politics : राहुल गांधी ने पुणे के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता और पितृसत्ता पर बात की। उन्होंने महिलाओं के खिलाफ हिंसा के तीन रूप बताए और शिक्षा, रोजगार, संपत्ति व निर्णय लेने की आजादी पर जोर दिया।

Politics : कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने शनिवार को पुणे के AISSMS कॉलेज ग्राउंड में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम में महिलाओं की स्वतंत्रता, पितृसत्ता और शिक्षा के मुद्दे पर छात्राओं से संवाद किया। करीब एक घंटे 16 मिनट चले कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं की पहचान उनके पिता, पति या बेटे से नहीं, बल्कि उनकी अपनी पहचान से होनी चाहिए।

राहुल गांधी ने महिलाओं के खिलाफ हिंसा को तीन रूपों में बांटते हुए कहा कि पहली हिंसा जन्म के समय होती है, दूसरी शारीरिक हिंसा और तीसरी आर्थिक बंदिशों के रूप में सामने आती है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, रोजगार, संपत्ति और अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने की पूरी आजादी मिलनी चाहिए।

महिलाओं को नियंत्रित करने के चार तरीके बताए

राहुल गांधी ने कहा कि महिलाओं को नियंत्रित करने के लिए समाज में चार तरह के दबाव काम करते हैं – हिंसा, अपमान या अनादर, समय और नियंत्रण। उन्होंने कहा कि लड़कियों को देर तक घर से बाहर रहने, नौकरी करने या अपनी पसंद से जीवन जीने को लेकर अक्सर सामाजिक और पारिवारिक पाबंदियों का सामना करना पड़ता है।

उन्होंने छात्राओं से कहा कि उन्हें डरकर या दबकर नहीं रहना चाहिए और अपनी आवाज मजबूती से उठानी चाहिए।

मनुस्मृति का किया जिक्र

राहुल गांधी ने अपने संबोधन में मनुस्मृति का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि महिलाओं को पिता, पति या बच्चों की संपत्ति मानने वाली सोच शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि महिला का अपने पिता, पति और बेटे से रिश्ता जरूर है, लेकिन उसकी पहचान किसी दूसरे व्यक्ति पर निर्भर नहीं होनी चाहिए।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को स्वतंत्र पहचान के साथ जीने का अधिकार है।

लड़कियों की पढ़ाई और नौकरी पर उठाए सवाल

राहुल गांधी ने सवाल उठाया कि वह मानसिकता कहां से आती है जिसमें लड़के की शिक्षा को प्राथमिकता दी जाती है और लड़की को पढ़ाई या नौकरी से रोक दिया जाता है। उन्होंने कहा कि शादी और घरेलू कामकाज के कारण बड़ी संख्या में लड़कियों की पढ़ाई प्रभावित होती है।

उन्होंने छात्राओं से शिक्षा हासिल करने, रोजगार के अवसर पाने और आर्थिक रूप से स्वतंत्र बनने की अपील की।

‘बी लाउड, बी प्राउड एंड फाइट फॉर योरसेल्फ’ का संदेश

राहुल गांधी ने छात्राओं से कहा कि वे अपनी बात खुलकर रखें और अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाएं। उनका संदेश था – ‘बी लाउड, बी प्राउड एंड फाइट फॉर योरसेल्फ।’

उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं के लिए बनाए गए डर और पाबंदियों के ‘पिंजरे’ को तोड़ने की जरूरत है। महिलाओं को अपनी पसंद से शिक्षा, नौकरी और जीवन के फैसले लेने की स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।

छात्राओं से संवाद, कई मुद्दों पर हुई चर्चा

कार्यक्रम के दौरान राहुल गांधी ने कई छात्राओं से सीधे संवाद किया। छात्राओं ने शिक्षा, परीक्षा व्यवस्था, महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक दबाव से जुड़े मुद्दे उठाए। भोजपुरी गायिका नेहा राठौर ने भी मंच से अपने अनुभव साझा किए और सरकार से सवाल पूछने पर कार्रवाई का आरोप लगाया।

कार्यक्रम में बड़ी संख्या में छात्राएं मौजूद रहीं। राहुल गांधी ने मराठी में ‘पुणे म्हणजे प्रेम’ कहते हुए पुणे के लोगों का अभिवादन भी किया। राहुल गांधी ने कहा कि वह कार्यक्रम में मुख्य रूप से राजनीति पर बात करने नहीं आए हैं। उन्होंने छात्राओं को अपनी बात रखने का अवसर दिया और उनके विचारों पर चर्चा की।

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