इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आपराधिक अपील से जुड़ी आपराधिक विविध सजा निलंबन आवेदन पर आदेश दिया

The Allahabad High Court passed an order on an application for the suspension of sentence, filed in connection with a criminal appeal.

अपील की सुनवाई के दौरान आवेदक अपीलकर्ता को दी गई सजा भी निलंबित रहेगी।यह आदेश दो न्यायाधीशों कि डिवीजन बेंच न्यायमूर्ति सिद्धार्थ एवं न्यायमूर्ति विनय कुमार द्विवेदी द्वारा दिनांक 12/08/2026 को किया गया। अपीलकर्ता के विद्वान अधिवक्ता शुभम राणा और राज्य के विद्वान ए.जी.ए. की दलीलें सुनीं और रिकॉर्ड का अवलोकन करने के बाद यह आदेश पारित किया।
जमानत हुई मंजूर
यह जमानत याचिका अपीलकर्ता-आवेदक, नानकू उर्फ शिवप्रकाश चमार की ओर से दायर की गई है, जिसमें अपील की लंबित अवधि के दौरान सत्र परीक्षण संख्या 104/2019 (राज्य बनाम हेमराज और अन्य) में, जो कि अपराध संख्या 108/2019, धारा 363, 302, 201 आईपीसी के तहत, पुलिस स्टेशन बिंदकी, जिला फतेहपुर में दर्ज है, में उन्हें जमानत पर रिहा करने की प्रार्थना की गई थी।
उच्च न्यायालय ने कहा कि दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद और इस तथ्य पर विचार करते हुए कि इस न्यायालय के समक्ष प्रतिदिन सौ से अधिक आपराधिक अपीलें सूचीबद्ध होती हैं और सभी का गुण-दोष के आधार पर निर्णय लेना मानवीय रूप से संभव नहीं है, निकट भविष्य में इस अपील की सुनवाई की संभावना बहुत कम है, अत: आवेदक को जमानत देने का अनुरोध स्वीकार किया जाता है।

नहीं कर सकते संपत्ति का हस्तांरण
अपराध में दोषी ठहराए गए और सजा पाए आवेदक-अपीलकर्ता को संबंधित न्यायालय की संतुष्टि के अनुरूप व्यक्तिगत मुचलका और समान राशि के दो जमानती प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा किया जाए। इस अपील की सुनवाई के दौरान आवेदक-अपीलकर्ता को दी गई सजा भी निलंबित रहेगी आवेदक-अपीलकर्ता जमानत पर रहते हुए इस न्यायालय की अनुमति के बिना अपने नाम पर स्थित अचल संपत्ति का हस्तांतरण, विक्रय, हस्तांतरण या उस पर कोई प्रभार नहीं बना सकता है। यदि अपीलकर्ता के पते में कोई परिवर्तन हुआ हो तो उसे दस दिनों के भीतर सूचित करना होगा, अन्यथा राज्य को उसकी जमानत रद्द करने का अनुरोध करने का अधिकार होगा।

 

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