
New Delhi:भारत और रूस के बीच तेल कारोबार में अब एक दिलचस्प बदलाव देखने को मिल रहा है। अभी तक भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चा तेल रूस से खरीदता रहा है, लेकिन अब रूस को भारत से पेट्रोल मंगाने की जरूरत पड़ गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रूस ने पहली बार भारत से पेट्रोल की बड़ी खेप खरीदी है।
गुजरात से रवाना हुई पेट्रोल की खेप
तेल कारोबार पर नजर रखने वाली संस्था के आंकड़ों के अनुसार, रूस के झंडे वाले टैंकर साइक्लोन ने 18 जून को गुजरात के वाडिनार से करीब 42 हजार टन पेट्रोल लोड किया था। बाद में इस पेट्रोल को मिस्र के दमिएटा बंदरगाह के पास दूसरे जहाज में ट्रांसफर किया गया।
बताया गया है कि यह खेप अगस्त की शुरुआत में रूस पहुंची। आंकड़ों के मुताबिक, 5 अगस्त को रूस में भारत से भेजी गई पेट्रोल की पहली खेप पहुंची, जबकि आगे भी ऐसी सप्लाई जारी रहने की संभावना जताई जा रही है।
रूस को भारत से पेट्रोल खरीदने की जरूरत क्यों पड़ी?
रूस दुनिया के प्रमुख ईंधन निर्यातक देशों में शामिल है। ऐसे में उसका भारत से पेट्रोल खरीदना काफी महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमले बताए जा रहे हैं।
इन हमलों के कारण रूस की कुछ रिफाइनरियों में उत्पादन प्रभावित हुआ है और घरेलू बाजार में पेट्रोल की उपलब्धता पर दबाव बढ़ा है। इसके अलावा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी भू-राजनीतिक तनाव ने भी ईंधन बाजार को प्रभावित किया है।
निर्यात पर लगानी पड़ी रोक
घरेलू मांग और उपलब्धता को देखते हुए रूस को पेट्रोल और डीजल के निर्यात पर प्रतिबंध या नियंत्रण लगाना पड़ा है। इसके बावजूद घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए भारत जैसे देशों से तैयार पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने का रास्ता अपनाया जा रहा है।
नायरा एनर्जी कर रही है सप्लाई
रिपोर्ट के अनुसार, नायरा एनर्जी लिमिटेड रूस को पेट्रोल की आपूर्ति कर रही है। कंपनी में रूस की सरकारी तेल कंपनी रोसनेफ्ट की हिस्सेदारी और समर्थन का भी उल्लेख किया जाता रहा है।
भारत से रूस को पेट्रोल की यह शुरुआती खेप वैश्विक तेल कारोबार में बदलती परिस्थितियों की ओर इशारा करती है। आने वाले समय में अगर रूस की रिफाइनरियों पर हमले जारी रहते हैं, तो भारत से पेट्रोल की और खेप भेजे जाने की संभावना बढ़ सकती है।



