
FCRA Bill 2026: लोकसभा में विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक, 2026 को लेकर बुधवार को एक बार फिर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्षी दलों ने सरकार से बिल वापस लेने की मांग की, जबकि सरकार का कहना है कि इसे विस्तृत जांच और विचार-विमर्श के लिए संयुक्त संसदीय समिति यानी JPC के पास भेजा जा सकता है। इसी मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के बीच तीखी बहस देखने को मिली। विपक्ष की ओर से बिल को लेकर लगातार सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके समेत कई विपक्षी दलों ने इसके प्रावधानों पर आपत्ति जताई है। अखिलेश यादव ने सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि सरकार की ओर से लाए गए कई विधेयकों का असर अल्पसंख्यकों पर पड़ता है। उन्होंने सवाल किया कि अब तक सरकार जो बिल लेकर आई है, उनमें कितने विधेयक ऐसे हैं जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ नहीं रहे हैं।
अखिलेश यादव के इस सवाल पर केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने उन्हें खुली चुनौती दे दी। रिजिजू ने कहा कि अगर अखिलेश यादव या विपक्षी दलों को लगता है कि FCRA संशोधन विधेयक का कोई प्रावधान अल्पसंख्यकों के खिलाफ है, तो उन्हें स्पष्ट रूप से बताना चाहिए कि बिल की कौन सी धारा या कौन सा प्रावधान ऐसा है। रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार का उद्देश्य किसी भी समुदाय को निशाना बनाना नहीं है। उन्होंने कहा कि FCRA से जुड़े नियमों का उद्देश्य देश की सुरक्षा और विदेशी अंशदान से संबंधित व्यवस्था को मजबूत करना है। किसी अल्पसंख्यक या किसी विशेष समुदाय को निशाना बनाने का सवाल ही नहीं है।
केंद्रीय मंत्री ने विपक्ष को JPC में अपनी आपत्तियां रखने का भी सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल या सांसद को विधेयक के किसी प्रावधान पर आपत्ति है, तो संयुक्त संसदीय समिति के सामने अपनी बात रखने का पर्याप्त अवसर मिलेगा। JPC में विधेयक के विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की जा सकती है और जरूरत पड़ने पर संबंधित लोगों को भी सुनवाई के लिए बुलाया जा सकता है। रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि आम तौर पर जब सरकार किसी विधेयक को JPC के पास भेजती है तो विपक्ष इसका स्वागत करता है, क्योंकि इससे विधेयक की विस्तृत जांच का रास्ता खुलता है। लेकिन इस मामले में विपक्ष JPC का रास्ता अपनाए जाने के बावजूद विरोध कर रहा है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।
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लोकसभा में इस मुद्दे पर विपक्ष और सरकार के बीच टकराव ऐसे समय में देखने को मिला है, जब FCRA संशोधन विधेयक को लेकर राजनीतिक बहस लगातार तेज हो रही है। विपक्ष विधेयक के प्रावधानों को लेकर सरकार से स्पष्टता मांग रहा है, जबकि सरकार इसे देशहित और सुरक्षा से जुड़ा कदम बता रही है।FCRA यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम का संबंध भारत में विदेशी स्रोतों से मिलने वाले अंशदान के नियमन से है। ऐसे में प्रस्तावित संशोधनों को लेकर यह बहस महत्वपूर्ण हो जाती है कि विदेशी फंड प्राप्त करने वाले संगठनों के लिए नियम कितने कड़े होंगे और उनका प्रभाव सामाजिक, धार्मिक तथा गैर-सरकारी संगठनों पर किस तरह पड़ेगा।
फिलहाल इस विधेयक पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक घमासान जारी है। किरेन रिजिजू का अखिलेश यादव को दिया गया यह खुला चैलेंज कि वे बिल में ऐसा कोई प्रावधान बताएं जो अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो, अब इस बहस का प्रमुख मुद्दा बन गया है। आने वाले दिनों में JPC में विधेयक के प्रावधानों पर होने वाली चर्चा से यह स्पष्ट हो सकता है कि विपक्ष की आपत्तियां किन बिंदुओं पर केंद्रित हैं और सरकार उन पर क्या जवाब देती है।



