
Parliament Monsoon Session: संसद का मानसून सत्र लगातार हंगामे की भेंट चढ़ रहा है। मंगलवार को सत्र के 17वें दिन भी लोकसभा में विपक्ष के विरोध के चलते प्रश्नकाल नहीं हो सका। कांग्रेस और समाजवादी पार्टी समेत विपक्षी दल राम मंदिर चंदा मामले और छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के बयान की मांग कर रहे हैं।
सदन की कार्यवाही शुरू होने के कुछ ही मिनट बाद विपक्षी सांसदों ने नारेबाजी शुरू कर दी। हालात को देखते हुए लोकसभा की कार्यवाही दोपहर तक के लिए स्थगित करनी पड़ी। विपक्ष का कहना है कि दोनों मामलों पर सरकार को सदन के भीतर जवाब देना चाहिए।
अखिलेश यादव ने दोनों मुद्दों को बताया जुड़ा हुआ
सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने शिक्षा-परीक्षा और राम मंदिर से जुड़े विवाद को अलग-अलग मुद्दा मानने से इनकार किया। उनका कहना है कि दोनों मामलों के पीछे एक ही तरह की राजनीतिक व्यवस्था काम कर रही है और इसलिए संसद में दोनों पर चर्चा जरूरी है।
अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार चर्चा से बचने के लिए समय टाल रही है। उन्होंने राम मंदिर चंदे के मुद्दे का जिक्र करते हुए कहा कि जब सदन में इस विषय पर चर्चा होगी तो भगवान राम का नाम भी लिया जाएगा।
छात्रों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर अखिलेश ने सरकार को घेरते हुए कहा कि जिन लोगों ने युवाओं पर कार्रवाई की है, उन्हें याद रखना चाहिए कि ‘भगवान की लाठी में आवाज नहीं होती।’ उनके इस बयान को लेकर सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है।
डिंपल यादव ने पैलेट गन के इस्तेमाल पर उठाए सवाल
सपा सांसद डिंपल यादव ने भी सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि RTI से सामने आई जानकारी के मुताबिक छात्र प्रदर्शन के दौरान कई बच्चे पैलेट गन से घायल हुए।
डिंपल का आरोप है कि यह जानकारी सरकार के पहले के उस कथित दावे से अलग है, जिसमें पैलेट गन के इस्तेमाल से इनकार किया गया था। उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर भी सरकार से सवाल पूछे।
उन्होंने कहा कि अगर सरकार ने बच्चों के खिलाफ कार्रवाई न करने की बात कही थी तो नाबालिगों के खिलाफ FIR से जुड़े मामले कैसे सामने आए? डिंपल ने इस पूरे मामले पर संसद में स्पष्ट जवाब देने की मांग की।
राम मंदिर चंदे का मुद्दा भी गरमाया
विपक्ष ने अयोध्या राम मंदिर से जुड़े चंदे के मामले को भी संसद में प्रमुख मुद्दा बनाया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह सिर्फ आर्थिक अनियमितता का मामला नहीं है, बल्कि लोगों की आस्था से जुड़ा विषय है। इसलिए सरकार को इस पर सदन के भीतर जवाब देना चाहिए।
डिंपल यादव ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने स्कूलों की संख्या में कमी और सरकारी शिक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठाते हुए पूछा कि देश में शिक्षा को मजबूत करने के लिए सरकार की प्राथमिकताएं क्या हैं।
संसद परिसर में भी आमने-सामने आए पक्ष
संसद के अंदर हंगामे के साथ बाहर भी सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विरोध-प्रदर्शन देखने को मिला। NDA सांसदों ने पहले मार्च निकालकर राहुल गांधी पर निशाना साधा। सत्ता पक्ष का आरोप है कि विपक्ष चर्चा के बजाय सदन की कार्यवाही बाधित कर रहा है।
इसके जवाब में विपक्षी सांसदों ने भी संसद परिसर में प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके हाथों में ऐसे पोस्टर थे, जिनमें राम मंदिर चंदे से जुड़े सवाल उठाए गए थे। विपक्षी सांसदों ने सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की।
सरकार चर्चा के लिए तैयार, लेकिन शर्त के साथ
सत्ता पक्ष की ओर से लगातार कहा जा रहा है कि सरकार छात्र आंदोलन समेत संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि गृह मंत्री अमित शाह सदन में जवाब देने के लिए तैयार हैं।
हालांकि, सरकार चाहती है कि विपक्ष चर्चा के दौरान सदन में हंगामा न करे। वहीं विपक्ष का कहना है कि पहले सरकार को छात्रों पर हुई कार्रवाई और राम मंदिर चंदे के मामले में स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
ऐसे में मानसून सत्र के अंतिम दिनों में संसद के भीतर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और बढ़ता दिखाई दे रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या दोनों पक्ष किसी सहमति पर पहुंचेंगे या सत्र के बाकी दिन भी हंगामे की भेंट चढ़ेंगे।



