
PM Modi Foreign Visits: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की विदेश यात्राओं पर होने वाले खर्च को लेकर सरकार ने संसद में विस्तृत जानकारी दी है। विदेश राज्य मंत्री पाबित्रा मार्गेरिटा ने राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि 2025-26 वित्त वर्ष के दौरान अब तक प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं पर ₹67.08 करोड़ खर्च हुए हैं। यह जानकारी संसद के मानसून सत्र में पूछे गए एक प्रश्न के जवाब में दी गई।
सरकार के अनुसार यह खर्च उन विदेश दौरों से जुड़ा है, जिनमें प्रधानमंत्री मोदी ने विभिन्न देशों की द्विपक्षीय यात्राएं, बहुपक्षीय सम्मेलन और अंतरराष्ट्रीय शिखर बैठकों में हिस्सा लिया।
किन मदों में शामिल होता है खर्च?
विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि विदेश यात्राओं पर होने वाले कुल व्यय में कई तरह के खर्च शामिल होते हैं, जैसे:
- विशेष विमान और हवाई यात्रा की व्यवस्था
- सुरक्षा प्रबंध
- होटल और आवास
- स्थानीय परिवहन
- आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल से जुड़े अन्य प्रशासनिक खर्च
सरकार ने यह भी कहा कि विदेश यात्राओं का उद्देश्य भारत के कूटनीतिक, रणनीतिक और आर्थिक हितों को मजबूत करना होता है।
संसद में क्यों उठा सवाल?
विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री की विदेश यात्राओं की संख्या और उन पर हुए खर्च का विवरण मांगा था। इसके जवाब में सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अब तक का अद्यतन आंकड़ा प्रस्तुत किया।
सरकार ने क्या कहा?
विदेश मंत्रालय के अनुसार प्रधानमंत्री की विदेश यात्राएं केवल औपचारिक दौरे नहीं होतीं, बल्कि इनका सीधा संबंध विदेशी निवेश (FDI), व्यापारिक साझेदारी, रक्षा सहयोग, ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक मंचों पर भारत की भूमिका से होता है। सरकार का कहना है कि इन यात्राओं के जरिए भारत को निवेश आकर्षित करने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने में मदद मिलती है।
पहले भी जारी होते रहे हैं आंकड़े
संसद में समय-समय पर प्रधानमंत्रियों और मंत्रियों की विदेश यात्राओं पर हुए खर्च का ब्योरा दिया जाता रहा है। मौजूदा आंकड़ा केवल 2025-26 वित्त वर्ष में अब तक हुए खर्च से संबंधित है, इसलिए इसे प्रधानमंत्री मोदी के पूरे कार्यकाल की विदेश यात्राओं पर हुए कुल खर्च के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक बहस तेज
इस खुलासे के बाद राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है। विपक्ष जहां विदेश दौरों पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल उठा रहा है, वहीं सरकार का कहना है कि वैश्विक स्तर पर भारत की बढ़ती भूमिका को देखते हुए ऐसे दौरे आवश्यक हैं और उनका लाभ दीर्घकाल में देश की अर्थव्यवस्था और रणनीतिक हितों को मिलता है।



