
Trump Tariff: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर वैश्विक व्यापार को लेकर बड़ा फैसला लिया है। ट्रंप प्रशासन ने जबरन श्रम (Forced Labour) से बने उत्पादों के आयात पर सख्ती बढ़ाते हुए भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन और कनाडा समेत 17 देशों पर नया आयात शुल्क (Tariff) लागू कर दिया है। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ओर से जारी यह फैसला 24 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गया है।
इस नई व्यवस्था के तहत विभिन्न देशों के उत्पादों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त आयात शुल्क लगाया गया है। भारत को 10% टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है।
भारत पर कितना टैरिफ लगाया गया?
अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया है। हालांकि शुरुआती प्रस्ताव में भारत को 12.5% टैरिफ वाले उच्च जोखिम वाले समूह में रखा गया था, लेकिन बाद में इसमें बदलाव किया गया।
बताया जा रहा है कि भारत सरकार ने 14 जून को अपनी विदेश व्यापार नीति में संशोधन करते हुए जबरन श्रम से तैयार वस्तुओं के आयात पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया था। इसी के बाद अमेरिका ने भारत को राहत देते हुए 10% टैरिफ वाले समूह में शामिल किया।
पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी 10% शुल्क
भारत के अलावा पाकिस्तान, बांग्लादेश, ब्रिटेन, कनाडा समेत कुल 17 देशों को भी 10% टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों को अपने सप्लाई चेन और श्रम मानकों को और मजबूत करने की आवश्यकता है।
अमेरिका ने यह कदम क्यों उठाया?
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) का कहना है कि कई देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों के निर्माण में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल किया जाता है। अमेरिका लंबे समय से ऐसे सामान के आयात का विरोध करता रहा है और अब उसने ट्रेड एक्ट 1974 की धारा 301 के तहत इस कार्रवाई को लागू किया है।
अमेरिका का कहना है कि वैश्विक व्यापार में मानवाधिकारों और श्रम मानकों का पालन सुनिश्चित करना सभी व्यापारिक साझेदारों की जिम्मेदारी है।
भारत ने जताई आपत्ति
भारत सरकार ने USTR की इस कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई है। भारत का कहना है कि ऐसे संवेदनशील व्यापारिक मामलों का समाधान एकतरफा फैसलों से नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के जरिए होना चाहिए।
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भारतीय निर्यात पर क्या पड़ेगा असर?
अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार और दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। वर्ष 2025 में दोनों देशों के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार लगभग 141 अरब अमेरिकी डॉलर रहा, जिसमें भारत का निर्यात करीब 87.3 अरब डॉलर था।
विशेषज्ञों का मानना है कि नया 10% टैरिफ भारतीय निर्यातकों की लागत बढ़ा सकता है और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा पर असर डाल सकता है। हालांकि, 12.5% के बजाय 10% शुल्क लगने से भारत को शुरुआती प्रस्ताव की तुलना में कुछ राहत जरूर मिली है।



