
Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत जोरदार हंगामे के साथ हुई। लोकसभा और राज्यसभा में विपक्षी दलों के विरोध और नारेबाजी के बीच सदन की कार्यवाही कई बार स्थगित करनी पड़ी। इसी हंगामे के बीच केंद्र सरकार ने न्यायपालिका से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक लोकसभा में पेश किया।
केंद्रीय कानून एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य देश की सर्वोच्च अदालत में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना है, ताकि लंबित मामलों के तेजी से निपटारे में मदद मिल सके।
क्या है संशोधन विधेयक?
प्रस्तावित संशोधन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश (CJI) को छोड़कर जजों की स्वीकृत संख्या 33 से बढ़ाकर 37 की जाएगी। इसके बाद मुख्य न्यायाधीश सहित सुप्रीम कोर्ट की कुल स्वीकृत क्षमता 34 से बढ़कर 38 हो जाएगी।
यह विधेयक मई 2026 में जारी किए गए अध्यादेश का स्थान लेगा। संसद से पारित होने के बाद यह संशोधन स्थायी कानून का रूप ले लेगा।
हंगामे के बीच पेश हुआ बिल
लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर वेल में पहुंच गए और नारेबाजी शुरू कर दी। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से चलाने की अपील की, लेकिन हंगामा जारी रहा।
पहली बार कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित की गई। दोबारा सदन की बैठक शुरू होने पर भी स्थिति नहीं बदली। इस दौरान पीठासीन अधिकारी के रूप में सांसद दिलीप सैकिया कार्यवाही का संचालन कर रहे थे। विपक्ष के विरोध के बीच ही कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने संशोधन विधेयक सदन के पटल पर रखा।
जजों की संख्या बढ़ाने की जरूरत क्यों?
सरकार का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामलों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ने से मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और न्यायिक प्रक्रिया अधिक प्रभावी बन सकेगी।
इसके अलावा, संविधान से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई के लिए पांच या उससे अधिक न्यायाधीशों की संविधान पीठ गठित करनी पड़ती है। वर्तमान व्यवस्था में संविधान पीठों के गठन के कारण नियमित मामलों की सुनवाई भी प्रभावित होती है। अतिरिक्त न्यायाधीशों की नियुक्ति से दोनों प्रकार की सुनवाई समानांतर रूप से बेहतर ढंग से हो सकेगी।
सत्र से पहले पीएम मोदी ने की थी सार्थक चर्चा की अपील
मानसून सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद परिसर में मीडिया को संबोधित करते हुए सभी सांसदों से तथ्य और तर्क के आधार पर चर्चा करने की अपील की थी।
प्रधानमंत्री ने कहा, “जहां तथ्य होते हैं, जहां तर्क होते हैं, वहां तूफान के लिए जगह नहीं होती। अगर तर्क मजबूत है और तथ्य मजबूत हैं, तो शांतिपूर्ण तरीके से भी अपनी बात प्रभावी ढंग से रखी जा सकती है।” उन्होंने सभी दलों से लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही में सक्रिय और रचनात्मक भागीदारी की अपील की।


