Parliament Monsoon Session 2026: पहले ही दिन संसद में हंगामा, लोकसभा-राज्यसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित

विपक्ष के जोरदार विरोध के बीच लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही तीन बार स्थगित, कई अहम मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी।

Parliament Monsoon Session 2026: संसद के मानसून सत्र 2026 की शुरुआत सोमवार को जोरदार राजनीतिक टकराव के साथ हुई। सत्र के पहले ही दिन लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में विपक्ष के हंगामे के कारण कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। स्थिति ऐसी रही कि दोनों सदनों को तीन-तीन बार स्थगित करना पड़ा।

सत्र शुरू होने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संसद पहुंचे और मीडिया को संबोधित किया। इसके बाद जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद विभिन्न मुद्दों को लेकर नारेबाजी करने लगे। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने विपक्ष से शांति बनाए रखने और सदन चलाने में सहयोग करने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके चलते पहले कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक, फिर 12:30 बजे तक और बाद में दोपहर 1 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।

उधर, राज्यसभा में भी हालात कुछ अलग नहीं रहे। सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने नए सदस्यों को शपथ दिलाई और पूर्व सदस्यों को श्रद्धांजलि अर्पित की, लेकिन इसके बाद विपक्ष के विरोध के कारण राज्यसभा की कार्यवाही भी बार-बार बाधित हुई। अंततः राज्यसभा को भी तीसरी बार 12:50 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।

इस दौरान लोकसभा में न्यायपालिका में जजों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया, लेकिन विपक्ष के शोर-शराबे के कारण इस पर सामान्य चर्चा नहीं हो सकी।

संसद परिसर के बाहर भी राजनीतिक बयानबाजी तेज रही। तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की सांसद महुआ मोइत्रा ने टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुए 20 सांसदों पर तीखा हमला बोला। उन्होंने उन्हें “गद्दार” बताते हुए आरोप लगाया कि उनके विलय को अभी तक औपचारिक मंजूरी नहीं मिली है, फिर भी उन्हें सर्वदलीय बैठक में शामिल किया गया। महुआ ने यह भी कहा कि सदन में अब “गद्दारों की बेंच” बना दी गई है, जो संसदीय परंपराओं के खिलाफ है।

वहीं, टीएमसी छोड़कर एनसीपीआई में शामिल हुईं सांसद रचना बनर्जी ने अलग रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि उनकी पूरी टीम इस नए राजनीतिक सफर को लेकर सकारात्मक है और उन्हें विश्वास है कि यह संसद सत्र उनके लिए यादगार साबित होगा। उन्होंने दावा किया कि उन्हें एनडीए सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी का पूरा समर्थन प्राप्त है।

सत्र के पहले दिन राज्यसभा में कई नवनिर्वाचित सदस्यों ने शपथ भी ली। इनमें गुजरात से भाजपा के मुकेशभाई जे. राठवा, कर्नाटक से कांग्रेस के पवन खेड़ा, राजस्थान से भाजपा के सतीश पूनिया, मध्य प्रदेश से भाजपा के महेश केवट, पश्चिम बंगाल से प्रकाश चिक बराइक, सुष्मिता देव और सुखेंदु शेखर राय समेत कई सदस्य शामिल रहे।

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इसके अलावा लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने पूर्व सांसदों और अन्य दिवंगत हस्तियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। सदन ने कुछ समय के लिए मौन रखकर उन्हें सम्मान दिया।

मानसून सत्र के पहले दिन की कार्यवाही से साफ संकेत मिला कि आने वाले दिनों में सरकार और विपक्ष के बीच कई अहम मुद्दों पर तीखी टक्कर देखने को मिल सकती है। विपक्ष पहले ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद, पेपर लीक, बेरोजगारी और अन्य मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति बना चुका है, जबकि सरकार कई महत्वपूर्ण विधेयकों को सदन में पेश करने की तैयारी में है।

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