
West Bengal : पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को OBC आरक्षण व्यवस्था में बड़े बदलाव करते हुए दो संशोधन विधेयक पारित कर दिए। इन संशोधनों के तहत OBC आरक्षण कोटा 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही, कलकत्ता हाई कोर्ट के 22 मई 2024 के आदेश के अनुपालन में OBC सूची से 77 मुस्लिम समुदायों को हटाने का प्रावधान किया गया है।
राज्य सरकार ने इसके लिए ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग (अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के अलावा) सेवाओं और पदों में रिक्तियों का आरक्षण (संशोधन) विधेयक, 2026’ तथा ‘पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग (संशोधन) विधेयक, 2026’ विधानसभा में पारित कराया।
OBC आरक्षण घटाकर 7% किया गया
संशोधित कानून के तहत राज्य में OBC आरक्षण 10 प्रतिशत से घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया गया है। साथ ही OBC श्रेणियों का पुनर्गठन किया गया है। सरकार के अनुसार, अब केवल सर्वेक्षण और आयोग की सिफारिश के आधार पर पात्र समुदायों को OBC सूची में शामिल किया जाएगा।
77 मुस्लिम समुदाय सूची से हटे, 66 समुदाय बरकरार
सरकार ने बताया कि पूर्ववर्ती सरकार के दौरान बिना पर्याप्त सर्वेक्षण के OBC सूची में शामिल किए गए 77 मुस्लिम समुदायों को हटा दिया गया है। वहीं, सामाजिक और आर्थिक सर्वेक्षण के आधार पर पात्र पाए गए 66 समुदायों को OBC सूची में बरकरार रखा गया है।
नई सूची में जोलाह (अंसारी मोमिन), फकीर, पहाड़िया मुस्लिम, हज्जाम (मुस्लिम) और चौदुली (मुस्लिम) जैसे समुदाय शामिल हैं, जबकि मुस्लिम नेहरिया, मुस्लिम हलदार, मुस्लिम माली, मुस्लिम दर्जी (ओस्तागर/इदरीसी), मुस्लिम राजमिस्त्री, मुस्लिम मुल्ला और अन्य 77 समुदायों को सूची से बाहर किया गया है।
सरकार का दावा- फर्जी OBC प्रमाणपत्रों पर लगेगी रोक
पिछड़ा वर्ग विकास मंत्री गौरीशंकर घोष ने विधानसभा में कहा कि यह संशोधन कलकत्ता हाई कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप किया गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सरकार ने बिना आयोग की प्रक्रिया अपनाए कई समुदायों को OBC सूची में शामिल किया था।
उन्होंने कहा कि अब पश्चिम बंगाल पिछड़ा वर्ग आयोग नियमित सर्वेक्षण करेगा और पात्रता के आधार पर ही समुदायों को सूची में शामिल किया जाएगा। सरकार का दावा है कि इससे फर्जी OBC प्रमाणपत्र जारी होने पर भी रोक लगेगी।
हाई कोर्ट के आदेश के बाद उठाया गया कदम
राज्य सरकार ने मई 2026 में अधिसूचना जारी कर कलकत्ता हाई कोर्ट के 22 मई 2024 के आदेश को लागू किया था। अब विधानसभा से संशोधन विधेयक पारित होने के बाद इन बदलावों को कानूनी रूप दे दिया गया है।
यह मामला 2010 से 2020 के बीच दायर कई याचिकाओं के बाद सामने आया था। याचिकाओं में आरोप लगाया गया था कि कई समुदायों को उनकी सामाजिक, शैक्षणिक और आर्थिक स्थिति का समुचित आकलन किए बिना OBC श्रेणी में शामिल किया गया था।



