
Ketan Murder Case: चर्चित केतन अग्रवाल हत्याकांड में हर दिन नए खुलासे सामने आ रहे हैं। अब इस हाई-प्रोफाइल मामले में एक नया विवाद सिया गोयल की कानूनी पैरवी को लेकर खड़ा हो गया है। सिया के भाई साहिल ने मीडिया के सामने आकर साफ कहा है कि उनके परिवार ने एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव को कभी नियुक्त ही नहीं किया। इसके बाद यह सवाल उठने लगा है कि आखिर अदालत में सिया की ओर से आधिकारिक तौर पर पैरवी कौन कर रहा है।
भाई के बयान से बढ़ा सस्पेंस
सिया के भाई साहिल ने दावा किया कि उनका परिवार नहीं जानता कि एडवोकेट आशुतोष श्रीवास्तव किस आधार पर सिया की तरफ से बयान दे रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि परिवार की ओर से उन्हें कभी केस नहीं सौंपा गया। इस बयान के बाद पूरे मामले में कानूनी पेच और गहरा गया है।
अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने किया आधिकारिक दावा
इसी बीच अधिवक्ता विपुल दुशिंग ने सामने आकर कहा कि उनकी कानूनी टीम ही सिया गोयल का आधिकारिक प्रतिनिधित्व कर रही है। उन्होंने बताया कि मामला अभी शुरुआती जांच के दौर में है, इसलिए किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी।
दुशिंग के मुताबिक, उनकी प्राथमिक कोशिश अदालत से पुलिस कस्टडी की अवधि कम कराने या सिया को न्यायिक हिरासत में भेजने की होगी। सोमवार को सिया की सात दिन की पुलिस रिमांड पूरी होने के बाद कोर्ट में सुनवाई होने वाली है, जिस पर सभी की नजरें टिकी हैं।
अब तक जांच में सामने आईं पांच बड़ी बातें
पुलिस जांच के अनुसार, 18 जून को लोनावला के लोहागढ़ किले पर हुई केतन अग्रवाल की मौत को पहले हादसा बताया गया था, लेकिन बाद में जांच में इसे सुनियोजित हत्या का मामला माना गया।
जांच एजेंसियों का दावा है कि पहले से तय इशारे के बाद सह-आरोपी चेतन चौधरी ने केतन को करीब 400 फीट गहरी खाई में धक्का दिया। पुलिस का यह भी आरोप है कि चेतन ने अपनी लोकेशन छिपाने के लिए दूसरे व्यक्ति का मोबाइल फोन इस्तेमाल किया और कई घंटों तक खुद को ऑफलाइन रखा।
इस हाई-प्रोफाइल केस में राज्य सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष सरकारी वकील नियुक्त किया है। वहीं, हाल ही में पुलिस ने दोनों आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाकर पूरे घटनाक्रम का क्राइम सीन रीक्रिएशन भी कराया।
सगाई से हत्या तक की कहानी
केतन अग्रवाल और सिया गोयल की कुछ महीने पहले ही सगाई हुई थी। परिवार के मुताबिक, केतन इस रिश्ते को लेकर बेहद खुश था और शादी की तैयारियों में जुटा हुआ था। हालांकि पुलिस जांच में दावा किया गया है कि सिया पहले से चेतन चौधरी के साथ रिश्ते में थी और केतन से छुटकारा पाने की योजना बना रही थी।
पुलिस का आरोप है कि इसी योजना के तहत सिया ने केतन को ट्रैकिंग के बहाने लोनावला के लोहागढ़ किले पर बुलाया, जहां कथित तौर पर पूरी साजिश को अंजाम दिया गया और इसे हादसा दिखाने की कोशिश की गई।
कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें
अब इस मामले में कानूनी लड़ाई भी उतनी ही अहम हो गई है जितनी पुलिस जांच। एक तरफ परिवार आशुतोष श्रीवास्तव से दूरी बना रहा है, तो दूसरी ओर अधिवक्ता विपुल दुशिंग खुद को सिया का आधिकारिक वकील बता रहे हैं। ऐसे में अदालत की अगली सुनवाई न सिर्फ पुलिस रिमांड बल्कि सिया की कानूनी रणनीति को लेकर भी कई अहम सवालों के जवाब दे सकती है।
Written By: Ekta Verma



