
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। शिवसेना (UBT) के कुछ सांसदों के बागी तेवरों ने उद्धव ठाकरे खेमे की चिंता बढ़ा दी है। इसी बीच सांसदों की कथित खरीद-फरोख्त को लेकर शुरू हुई बयानबाजी अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सांसद महुआ मोइत्रा और शिवसेना (UBT) नेता संजय राउत के बीच सोशल मीडिया पर हुई बातचीत ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया है।
बागी सांसदों को लेकर बढ़ी चिंता
सूत्रों के मुताबिक, शिवसेना (UBT) के कई सांसदों के पार्टी लाइन से अलग रुख अपनाने की चर्चाओं ने पार्टी नेतृत्व को सतर्क कर दिया है। इसी कारण पार्टी ने अपने सभी लोकसभा सांसदों को दिल्ली में होने वाली महत्वपूर्ण बैठक में शामिल होने के लिए व्हिप जारी किया है।
राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा भी तेज है कि कुछ सांसदों पर पाला बदलने का दबाव बनाया जा रहा है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
संजय राउत का बड़ा आरोप
शिवसेना (UBT) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक पोस्ट करते हुए दावा किया कि सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए बड़ी रकम की पेशकश की जा रही है।
राउत ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र के कुछ सांसदों को कथित तौर पर पाला बदलने के लिए करोड़ों रुपये का ऑफर दिया गया है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए चिंताजनक बताते हुए सांसदों की राजनीतिक निष्ठा पर सवाल उठाए।
महुआ मोइत्रा का तंज
संजय राउत के पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए TMC सांसद महुआ मोइत्रा ने व्यंग्यात्मक अंदाज में लिखा कि यदि सांसद केवल 15 करोड़ रुपये में पार्टी छोड़ रहे हैं तो यह काफी “सस्ता सौदा” है।
महुआ मोइत्रा ने दावा किया कि उनकी पार्टी के कुछ नेताओं को पहले भी कथित तौर पर बड़ी आर्थिक पेशकश की गई थी। उन्होंने अपने पोस्ट में “हनी प्लस मनी” का जिक्र करते हुए राजनीतिक दलों में सेंधमारी की रणनीति पर सवाल खड़े किए।
संजय राउत का पलटवार
महुआ मोइत्रा के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए संजय राउत ने एक और पोस्ट किया। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि 15 करोड़ रुपये तो केवल एडवांस माने जा सकते हैं और सांसदों की वास्तविक “बाजार कीमत” इससे कहीं अधिक बताई जा रही है।
राउत ने आगे कहा कि जिन नेताओं को जनता ने एक राजनीतिक दल के नाम और विचारधारा पर चुना है, उनकी पहचान उसी पार्टी से बनी है। ऐसे में दल बदलने वाले नेताओं की राजनीतिक विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
विपक्ष का BJP पर अप्रत्यक्ष निशाना
हालांकि किसी नेता ने सीधे तौर पर भारतीय जनता पार्टी का नाम नहीं लिया, लेकिन विपक्षी दलों के नेताओं के बयानों को भाजपा और उसके सहयोगी दलों पर अप्रत्यक्ष हमला माना जा रहा है।
बीते कुछ वर्षों में विभिन्न राज्यों में हुए राजनीतिक घटनाक्रमों को देखते हुए विपक्ष लगातार आरोप लगाता रहा है कि निर्वाचित जनप्रतिनिधियों को तोड़कर सरकारें बनाने की कोशिश की जाती है। वहीं भाजपा इन आरोपों को निराधार और राजनीतिक प्रचार करार देती रही है।
क्या है आगे की रणनीति?
शिवसेना (UBT) फिलहाल अपने सांसदों को एकजुट रखने की कोशिश में जुटी हुई है। पार्टी नेतृत्व दिल्ली में सांसदों के साथ बैठक कर आगे की रणनीति तय करेगा।
उधर राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महाराष्ट्र की राजनीति में आने वाले दिनों में और बड़े घटनाक्रम देखने को मिल सकते हैं। यदि बगावत की अटकलें सच साबित होती हैं तो इसका असर सिर्फ महाराष्ट्र ही नहीं बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी पड़ सकता है।
महुआ मोइत्रा और संजय राउत के बीच हुई यह सोशल मीडिया बातचीत केवल एक राजनीतिक तंज नहीं है, बल्कि यह विपक्षी दलों की उस चिंता को भी दर्शाती है जो हाल के वर्षों में दल-बदल की राजनीति को लेकर लगातार सामने आती रही है। फिलहाल सभी की नजर शिवसेना (UBT) की आगामी बैठक और संभावित राजनीतिक घटनाक्रमों पर टिकी हुई है।



