
West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल के बहुचर्चित शिक्षक भर्ती घोटाले से जुड़े कथित धन शोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई ने एक बार फिर राज्य की राजनीति को गर्मा दिया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी से दिल्ली स्थित सीजीओ कॉम्प्लेक्स में करीब 11 घंटे तक पूछताछ की गई। इस दौरान जांच एजेंसी ने कथित वित्तीय लेन-देन और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं पर विस्तृत सवाल पूछे।
पूछताछ के बाद क्या बोले अभिषेक बनर्जी?
पूछताछ खत्म होने के बाद देर रात बाहर आए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि यदि जांच एजेंसी उन्हें दोबारा बुलाती है तो वह पूरा सहयोग करेंगे। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने और उन पर दबाव बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल कर रही है। उनका कहना था कि वे जांच से भागने वाले नहीं हैं और हर सवाल का जवाब देने के लिए तैयार हैं।
रवि किशन का तीखा हमला
इस पूरे घटनाक्रम पर बीजेपी सांसद रवि किशन ने कड़ी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कोई भी जांच एजेंसी बिना आधार के किसी व्यक्ति को घंटों पूछताछ के लिए नहीं बुलाती। रवि किशन के मुताबिक, अगर किसी को ED के सामने पेश होना पड़ रहा है तो जांच एजेंसी के पास उसके पीछे कुछ कारण जरूर होंगे।
उन्होंने आगे कहा कि पिछले कई वर्षों में सत्ता में बैठे लोगों ने खुद को कानून से ऊपर समझ लिया था, लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। उनके शब्दों में, “अगर किसी ने जनता के पैसे का दुरुपयोग किया है या कोई गड़बड़ी की है तो उसे जवाब देना होगा। कानून अपना काम करेगा और दोषी पाए जाने पर किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”
क्या है शिक्षक भर्ती घोटाले का मामला?
पश्चिम बंगाल का शिक्षक भर्ती घोटाला पिछले कुछ वर्षों से जांच एजेंसियों के रडार पर है। इस मामले में कथित अनियमितताओं, रिश्वतखोरी और अवैध वित्तीय लेन-देन के आरोप लगे हैं। ED पहले भी कई नेताओं, अधिकारियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी इस पूरे नेटवर्क और धन के प्रवाह की पड़ताल कर रही है।
क्या अभिषेक बनर्जी आरोपी हैं?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, अभिषेक बनर्जी इस मामले में मुख्य आरोपी नहीं हैं। हालांकि, ED उन्हें जांच के लिहाज से एक महत्वपूर्ण व्यक्ति मान रही है और उनके बयान को केस के लिए अहम माना जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि जांच की जरूरत पड़ने पर उन्हें भविष्य में फिर से पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप जारी
ED की इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर सत्तारूढ़ बीजेपी और तृणमूल कांग्रेस आमने-सामने आ गई हैं। एक ओर बीजेपी इसे भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई बता रही है, तो दूसरी ओर TMC का आरोप है कि विपक्षी नेताओं को राजनीतिक रूप से निशाना बनाने के लिए केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
अब सभी की नजर ED की अगली कार्रवाई और इस हाई-प्रोफाइल मामले में सामने आने वाले नए तथ्यों पर टिकी हुई है।
Written By: Ekta Verma



