UP Hookah Bar Ban: हुक्का बार पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, स्मोकिंग एरिया में भी नहीं मिलेगी हुक्का सर्विस

UP Hookah Bar Ban: इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने यूपी में हुक्का सर्विस पर सख्ती बरती है। स्मोकिंग एरिया, सेल्फ सर्विस और किराए पर हुक्का देने की दलीलें भी खारिज।

UP Hookah Bar Ban: उत्तर प्रदेश में हुक्का बार संचालकों को इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने रेस्टोरेंट, कैफे और अन्य प्रतिष्ठानों में बनाए गए निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी ग्राहकों को हुक्का सर्विस देने की अनुमति नहीं दी है। अदालत ने हुक्का बार के संचालन के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई को बरकरार रखते हुए संचालकों की याचिकाएं खारिज कर दीं।

यह फैसला जस्टिस शेखर बी. सर्राफ और जस्टिस अबधेश कुमार चौधरी की डिवीजन बेंच ने सुनाया। मामला लखनऊ में बिना लाइसेंस चल रहे हुक्का बार के खिलाफ पुलिस कार्रवाई से जुड़ा था। फैशन टीवी कैफे समेत कई प्रतिष्ठानों ने पुलिस की कार्रवाई को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का रुख किया था।

स्मोकिंग एरिया का बहाना भी नहीं चलेगा

याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई थी कि रेस्टोरेंट में अलग से निर्धारित स्मोकिंग एरिया बनाया गया है, जहां ग्राहकों को हुक्का उपलब्ध कराया जाता है। हाईकोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि निर्धारित स्मोकिंग एरिया सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान संबंधी प्रतिबंध से सीमित अपवाद हो सकता है, लेकिन वहां किसी तरह की सेवा उपलब्ध कराने की अनुमति नहीं है।

‘सेल्फ सर्विस’ के नाम पर भी हुक्का नहीं

हुक्का संचालकों ने यह तर्क भी दिया कि ग्राहक खुद हुक्का ले सकते हैं और इसे सेल्फ सर्विस माना जाना चाहिए। अदालत ने इस दलील को भी स्वीकार नहीं किया। कोर्ट के मुताबिक हुक्का तैयार करने, उसमें तंबाकू भरने, अंगारा लगाने, ग्राहक तक पहुंचाने या कोयला बदलने जैसी गतिविधियां सेवा की श्रेणी में आती हैं।

किराए पर हुक्का देने की दलील भी खारिज

संचालकों की ओर से हुक्का ग्राहकों को किराए पर देने की दलील भी रखी गई थी। कोर्ट ने इसे भी स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि हुक्का उपलब्ध कराने के बाद उसके इस्तेमाल पर प्रतिष्ठान का नियंत्रण समाप्त नहीं माना जा सकता और हुक्का सेवा को केवल ‘किराए’ का नाम देने से कानूनी स्थिति नहीं बदलती।

खाद्य विभाग या नगर निकाय नहीं दे सकते हुक्का बार का लाइसेंस

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि खाद्य सुरक्षा विभाग और नगर निकायों के पास हुक्का बार के संचालन के लिए अलग से लाइसेंस जारी करने का अधिकार नहीं है। अदालत ने COTPA और उससे जुड़े नियमों के तहत पुलिस की कार्रवाई की शक्तियों को भी बरकरार रखा है।

गैर-धूम्रपान करने वालों के स्वच्छ हवा के अधिकार पर जोर

अदालत ने गैर-धूम्रपान करने वाले लोगों के स्वच्छ हवा में सांस लेने के अधिकार को भी महत्वपूर्ण माना। कोर्ट के इस फैसले के बाद उत्तर प्रदेश में रेस्टोरेंट या कैफे के निर्धारित स्मोकिंग एरिया में भी हुक्का सर्विस देने की गुंजाइश नहीं रहेगी। फैसले की प्रति उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को आवश्यक अनुपालन के लिए भेजने का निर्देश दिया गया है।

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