
Sambhal Violence: संभल हिंसा मामले में आरोपी मुल्ला अफरोज को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। शीर्ष अदालत ने उसके खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई निवारक हिरासत को रद्द कर दिया है। अदालत ने इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार पर 10 लाख रुपये की लागत भी लगाई है।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने मामले की सुनवाई के दौरान इस बात पर सवाल उठाया था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश दिया जा सकता है या नहीं। अदालत ने 8 सितंबर को मामले में अपना फैसला सुरक्षित रखा था।
पुलिस कस्टडी में दिए बयान पर था विवाद
मामले में अफरोज की हिरासत का आधार बनाए गए दस्तावेजों और सामग्री को लेकर अदालत में बहस हुई। अफरोज की ओर से दलील दी गई कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित कबूलनामे को NSA के तहत हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं माना जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान निवारक हिरासत के लिए जरूरी ‘subjective satisfaction’ यानी अधिकारियों की संतुष्टि के आधार और उसके लिए इस्तेमाल की गई सामग्री की प्रासंगिकता पर सवाल उठाए थे।
2024 में हुई थी संभल में हिंसा
यह मामला नवंबर 2024 में संभल की शाही जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई हिंसा से जुड़ा है। कोर्ट के आदेश पर मस्जिद का सर्वे कराया जा रहा था। 24 नवंबर 2024 को सर्वे के विरोध के दौरान हिंसा भड़क गई थी। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी।
अफरोज को हिंसा से जुड़े मामलों में आरोपी बनाया गया था। उसे 17 जनवरी 2025 को गिरफ्तार किया गया। बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट से उसे जमानत मिली। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 अक्टूबर 2025 को उसके खिलाफ NSA के तहत हिरासत का आदेश जारी किया था। उपलब्ध न्यायिक रिकॉर्ड के अनुसार, यह आदेश संभल के जिला मजिस्ट्रेट ने पारित किया था।
सरकार ने बताई थी सार्वजनिक व्यवस्था की चिंता
राज्य सरकार की ओर से अदालत में कहा गया था कि अफरोज की गतिविधियों से सार्वजनिक व्यवस्था प्रभावित हुई थी और रिहाई के बाद उसके दोबारा ऐसी गतिविधियों में शामिल होने की आशंका थी। सरकार ने हिरासत के समर्थन में विभिन्न मामलों और जांच के दौरान सामने आई सामग्री का हवाला दिया था।
वहीं, अफरोज की ओर से दलील दी गई कि पुराने आपराधिक मामलों में नाम होना अपने आप में निवारक हिरासत का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। उसके वकीलों ने सुप्रीम कोर्ट के पूर्व फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि NSA के तहत कार्रवाई के लिए उपलब्ध सामग्री पर स्वतंत्र और उचित विचार किया जाना आवश्यक है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले भी उठाए थे सवाल
8 सितंबर की सुनवाई में पीठ ने विशेष रूप से यह सवाल उठाया था कि पुलिस हिरासत में दिए गए कथित बयान के आधार पर NSA के तहत निवारक हिरासत का आदेश कैसे कायम रह सकता है। उसी दिन अदालत ने दलीलें पूरी होने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इस फैसले के साथ अफरोज की NSA के तहत हिरासत का मामला खत्म हो गया है। हालांकि, NSA हिरासत रद्द होने का अर्थ संबंधित आपराधिक मामलों में आरोपों का स्वतः समाप्त होना नहीं है; वे कार्यवाही अपने अलग कानूनी आधार पर चल सकती हैं।
written by Siddhi Srivastava



