
India US Relations: भारत की विदेश नीति और बदलती वैश्विक व्यवस्था को लेकर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अमेरिका की धरती से अहम टिप्पणी की है। न्यूयॉर्क में एशिया सोसाइटी के एक कार्यक्रम में जयशंकर ने कहा कि एक दौर में अमेरिका में यह धारणा थी कि भारत के पास बहुत अधिक विकल्प नहीं होने चाहिए और उसे अपने रिश्तों पर मुख्य रूप से वॉशिंगटन के साथ ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उनके मुताबिक, अब अंतरराष्ट्रीय राजनीति का परिदृश्य बदल चुका है और देश पहले की तुलना में कहीं अधिक खुले तौर पर एक-दूसरे के साथ संबंध बना रहे हैं।
जयशंकर ने इसी संदर्भ में कहा कि पहले जिस तरह की अपेक्षा भारत से की जाती थी, आज अमेरिका खुद कई देशों के साथ समानांतर रूप से रिश्ते संभाल रहा है। उन्होंने इसे वैश्विक व्यवस्था में आ रहे व्यापक बदलाव से जोड़ते हुए कहा कि दुनिया बहुध्रुवीयता (Multipolarity) की दिशा में आगे बढ़ रही है।
‘भारत के पास ज्यादा विकल्प न हों’ वाली सोच पर बोले जयशंकर
विदेश मंत्री ने पुराने अमेरिकी दृष्टिकोण का जिक्र करते हुए कहा कि एक समय ऐसा नैरेटिव था कि भारत के पास बहुत ज्यादा विकल्प नहीं होने चाहिए और उसे अमेरिका के साथ अपने संबंधों को प्राथमिकता देनी चाहिए। जयशंकर ने कहा कि दूसरी ओर अमेरिका खुद एक वैश्विक शक्ति होने के कारण अपने विकल्प खुले रखता था।
उन्होंने कहा कि अब ऐसी स्थिति में बदलाव आया है और देशों के बीच संबंधों को लेकर पहले जैसी औपचारिक सीमाएं नहीं रह गई हैं। जयशंकर के मुताबिक, अब हर देश अलग-अलग देशों के साथ अपने हितों के आधार पर संबंध आगे बढ़ा रहा है।
‘हर कोई हर किसी के साथ कर रहा है काम’
जयशंकर ने मौजूदा वैश्विक स्थिति को रेखांकित करते हुए कहा कि देश अब खुले तौर पर एक-दूसरे के साथ काम कर रहे हैं। उनके अनुसार, यही बदलाव दुनिया को बहुध्रुवीय व्यवस्था की तरफ ले जा रहा है।
उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक देश या एक समूह के साथ संबंधों तक सीमित रहना ही देशों की नीति नहीं है। अलग-अलग परिस्थितियों में अलग-अलग साझेदारियों को आगे बढ़ाना अब वैश्विक कूटनीति का हिस्सा बन रहा है।
अमेरिका खुद अपना रहा है भारत की रणनीतिक स्वायत्तता वाला तरीका
जयशंकर ने अमेरिका की मौजूदा विदेश नीति का उदाहरण देते हुए कहा कि वॉशिंगटन जिस तरह चीन, रूस, यूक्रेन, यूरोप और एशिया के दूसरे हिस्सों के साथ संबंधों को एक साथ संभाल रहा है, वह उस तरीके से मिलता-जुलता है जिसे भारत लंबे समय से अपनाता आया है।
उन्होंने कहा कि जिस तरह की बहुस्तरीय कूटनीति को पहले भारत के संदर्भ में चर्चा का विषय बनाया जाता था, आज अमेरिका भी उसी तरह अलग-अलग वैश्विक शक्तियों और क्षेत्रों के साथ अपने हितों के मुताबिक संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
रणनीतिक स्वायत्तता को लेकर क्या बोले विदेश मंत्री?
कार्यक्रम में भारत की विदेश नीति के संदर्भ में रणनीतिक स्वायत्तता का मुद्दा भी सामने आया। जयशंकर के मुताबिक, बदलती दुनिया में देशों के लिए अपने राष्ट्रीय हितों के अनुरूप अलग-अलग साझेदारियों को बनाए रखना महत्वपूर्ण हो गया है।
उन्होंने कहा कि वैश्विक राजनीति अब ऐसी स्थिति में पहुंच रही है जहां देशों के बीच संबंध किसी एक स्थायी खांचे में नहीं बंधे हैं। अलग-अलग मुद्दों पर देश अलग-अलग साझेदारों के साथ सहयोग कर सकते हैं। यही प्रक्रिया आगे चलकर बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को मजबूत करती है।
अमेरिका-भारत संबंधों में व्यापार और आतंकवाद भी अहम मुद्दे
न्यूयॉर्क कार्यक्रम में जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों में आने वाली चुनौतियों पर भी बात की। उन्होंने व्यापार वार्ता की जटिलता और अमेरिकी टैरिफ नीति में बदलाव को द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े मुद्दों में शामिल बताया। इसके साथ ही उन्होंने भारत की आतंकवाद संबंधी चिंताओं को समझे जाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए आतंकवाद एक बेहद महत्वपूर्ण सुरक्षा मुद्दा है और यदि किसी प्रमुख साझेदार को भारत की इस चिंता की पर्याप्त समझ या संवेदनशीलता नहीं है, तो इसका असर द्विपक्षीय संबंधों पर पड़ सकता है।
बदलती दुनिया में अपने हितों पर जोर
विदेश मंत्री की टिप्पणियों का व्यापक संदर्भ यही रहा कि वैश्विक राजनीति में शक्ति संतुलन और साझेदारियों का स्वरूप बदल रहा है। देशों के बीच आर्थिक, सुरक्षा और रणनीतिक हितों के आधार पर कई स्तरों पर संबंध विकसित हो रहे हैं।
जयशंकर ने इस बदलाव को बहुध्रुवीय दुनिया की ओर बढ़ते कदम के रूप में पेश किया। उनके मुताबिक, आने वाले दौर में देश अलग-अलग क्षेत्रों और शक्तियों के साथ अपने संबंधों को अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार संतुलित करते हुए आगे बढ़ाएंगे।
न्यूयॉर्क में दिया गया यह बयान ऐसे समय आया है जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता, टैरिफ, सुरक्षा और क्षेत्रीय भू-राजनीति से जुड़े कई मुद्दों पर बातचीत जारी है। ऐसे में जयशंकर की टिप्पणी ने भारत की विदेश नीति में रणनीतिक स्वायत्तता और बहुध्रुवीय वैश्विक व्यवस्था पर उसके जोर को एक बार फिर सामने रखा है।
written by Siddhi Srivastava



