
Maharashtra Politics: महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर बड़ा भूचाल आने के संकेत मिल रहे हैं। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे को उस समय बड़ा झटका लगा जब दिल्ली में आयोजित पार्टी की महत्वपूर्ण संसदीय दल की बैठक में 9 में से केवल 3 सांसद ही शामिल हुए। बाकी 6 सांसदों की गैरमौजूदगी ने पार्टी में संभावित टूट की अटकलों को और तेज कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, बैठक से दूरी बनाने वाले 6 सांसदों ने अपना अलग संसदीय गुट बनाने की दिशा में कदम बढ़ा दिया है। दावा किया जा रहा है कि इन सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र सौंपकर अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। हालांकि, अभी तक इन सांसदों की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
दिल्ली बैठक में कौन-कौन पहुंचे?
दिल्ली स्थित संसद भवन के पार्टी कार्यालय में आयोजित बैठक में केवल तीन सांसद शामिल हुए।
- अरविंद सावंत
- अनिल देसाई
- राजाभाऊ वाजे
वहीं छह सांसद बैठक से गैरहाजिर रहे, जिनमें संजय जाधव, भाऊसाहेब वाकचौरे, ओमराजे निंबालकर, संजय दिना पाटिल, संजय देशमुख और नागेश पाटिल आष्टिकर शामिल हैं।
कैसे बढ़ा विवाद?
दरअसल, 14 जून को उद्धव ठाकरे ने मुंबई स्थित मातोश्री में सांसदों की बैठक बुलाई थी। उस बैठक में भी कई सांसद व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हुए थे और केवल ऑनलाइन जुड़े थे। इसके बाद से ही पार्टी में असंतोष और टूट की चर्चाएं शुरू हो गई थीं।
इस बीच शिवसेना (यूबीटी) नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर दावा किया था कि कुछ सांसदों को पार्टी छोड़ने के लिए बड़ी रकम का लालच दिया जा रहा है। इसके बाद राजनीतिक माहौल और गरमा गया।
यूबीटी की कार्रवाई की तैयारी
पार्टी नेतृत्व ने बैठक में अनुपस्थित सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। सूत्रों के मुताबिक पहले कारण बताओ नोटिस जारी किया जाएगा, उसके बाद व्हिप उल्लंघन के आधार पर कानूनी विकल्पों पर विचार किया जाएगा।
दिल्ली में मौजूद संजय राउत लगातार घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं और पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ चर्चा कर रहे हैं।
शिंदे गुट को मिल सकती है मजबूती
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यदि ये सांसद औपचारिक रूप से अलग होते हैं तो मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को बड़ा राजनीतिक लाभ मिल सकता है। शिंदे समर्थक नेताओं का दावा है कि पार्टी में शामिल होने को लेकर कई जनप्रतिनिधियों के साथ बातचीत अंतिम चरण में है।
हालांकि पूरे घटनाक्रम पर अंतिम तस्वीर तब साफ होगी जब गैरहाजिर सांसद सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट करेंगे। फिलहाल महाराष्ट्र की राजनीति में इस घटनाक्रम ने नई हलचल पैदा कर दी है और आने वाले दिनों में इसके दूरगामी राजनीतिक प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।



